यश और गीतू मोहनदास की बहुप्रतीक्षित गैंगस्टर ड्रामा फिल्म ‘Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups’ रिलीज से पहले ही सोशल मीडिया बहस के केंद्र में आ गई है। फिल्म के प्रमोशनल टीजर और धमाकेदार ट्रैक ‘Tabaahi’ के सामने आने के बाद सोशल मीडिया के एक वर्ग ने फिल्म में दिखाए गए गहरे और स्टाइलिश अंदाज में पेश किए गए इंटीमेट ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को लेकर आपत्ति जतानी शुरू कर दी है।

सोशल मीडिया पर शुरू हुई इस बहस ने एक बार फिर भारतीय दर्शकों के उस रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां स्क्रीन पर दिखाई जाने वाली हिंसा को तो आसानी से स्वीकार किया जाता है, लेकिन वयस्क रिश्तों, महिला इच्छाओं और उनकी स्वतंत्रता से जुड़े दृश्यों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आती है। इस विवाद ने महिला संवेदनशीलता और उसकी एजेंसी को लेकर समाज में मौजूद असहजता को भी चर्चा में ला दिया है।

इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि लंबे समय से भारतीय सिनेमा को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोग यह शिकायत करते रहे हैं कि फिल्में दोहराव वाली और तय फॉर्मूले पर आधारित होती हैं। कई बार भारतीय फिल्मों के वैश्विक स्तर तक न पहुंच पाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। लेकिन जब कोई सुपरस्टार पारंपरिक ढांचे से बाहर निकलकर कुछ अलग करने की कोशिश करता है, तो वही डिजिटल प्लेटफॉर्म आलोचना का केंद्र बन जाते हैं।

‘Toxic’ के निर्माताओं का उद्देश्य पारंपरिक फॉर्मूला आधारित कमर्शियल सिनेमा से अलग हटकर भारतीय कहानी कहने के तरीके को बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना है। फिल्म को पैन-इंडिया स्तर पर तैयार किया गया है और इसका लक्ष्य हॉलीवुड जैसी वैश्विक वितरण प्रणाली को अपनाकर भारतीय कंटेंट को दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाना है।

इस फिल्म के जरिए गैंगस्टर जॉनर में एक अलग नजरिया पेश करने की कोशिश की गई है। आमतौर पर पुरुष प्रधान माने जाने वाले इस जॉनर में “फीमेल गेज” यानी महिला दृष्टिकोण को शामिल करने के लिए यश ने चर्चित निर्देशक गीतू मोहनदास के साथ काम किया। उनका उद्देश्य इस हाइपर-मस्क्युलिन स्पेस में एक नया और अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण लाना था।

फिल्म से जुड़े लोगों का मानना है कि ‘Toxic’ ऐसी कहानी दुनिया के सामने लाने की कोशिश कर रही है, जिसके लिए दर्शकों को तैयार होने की जरूरत है। हालांकि, फिल्म की रचनात्मक कोशिशों पर चर्चा करने के बजाय सोशल मीडिया का एक वर्ग यश, निर्देशक गीतू मोहनदास और कलाकारों को नैतिक कसौटी पर परखने में जुट गया है।

भारतीय सिनेमा में इस तरह की बहस पहले भी देखने को मिली है। कई फिल्मों पर रिलीज से पहले यह आरोप लगाए गए कि वे केवल विवाद और चर्चा के जरिए बॉक्स ऑफिस पर फायदा उठाना चाहती हैं। लेकिन सिनेमाघरों में आने के बाद दर्शकों ने पाया कि फिल्मों में दिखाए गए संवेदनशील और इंटीमेट हिस्से कहानी की संरचना का जरूरी हिस्सा थे।

‘Toxic’ के मामले में भी यही बहस दोहराती नजर आ रही है। फिल्म के नाम में ही ‘A Fairy Tale for Grown-Ups’ शामिल है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि यह वयस्क दर्शकों के लिए बनाई गई कहानी है। फिल्म में दिखाए गए इंटीमेट सीन अंडरवर्ल्ड आधारित कहानी का हिस्सा हैं और उन्हें केवल दर्शकों को आकर्षित करने के लिए शामिल नहीं किया गया है।

सोशल मीडिया पर वयस्क इंटीमेसी को लेकर इतनी आक्रामक प्रतिक्रिया क्यों सामने आती है, इस पर भी बहस हो रही है। इसकी एक वजह यह मानी जा रही है कि इंटीमेसी को समझने के लिए महिला की इच्छा, उसकी स्वतंत्रता और उसकी सहमति को स्वीकार करना जरूरी है, जिन मुद्दों को लेकर समाज में अभी भी असहजता बनी हुई है।

निर्देशक गीतू मोहनदास ने इंस्टाग्राम पर आलोचकों पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि वह बस “चिल कर रही हैं, जबकि लोग महिला सुख, सहमति और महिलाओं के सिस्टम खेलने को समझने की कोशिश कर रहे हैं।” उनके इस बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया।

‘Toxic’ को लेकर चल रहा विवाद केवल एक फिल्म के दृश्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय सिनेमा में बदलती कहानी कहने की शैली, महिला पात्रों की भूमिका और दर्शकों की सोच को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है। यश और गीतू मोहनदास की यह फिल्म रिलीज से पहले ही अपनी अलग शैली और विवादों के कारण सुर्खियों में बनी हुई है।

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