वैश्विक स्तर पर सुरक्षित और पौष्टिक खानपान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनाए जाने वाले वर्ल्ड फूड सेफ्टी डे के अवसर पर बॉलीवुड फिल्म उद्योग की प्रमुख हस्तियों की अनूठी और अनुशासित जीवनशैली खुलकर सामने आई है। भारतीय सिनेमा के शीर्ष कलाकारों द्वारा अपने स्वास्थ्य और फिटनेस को बनाए रखने के लिए किए जाने वाले कड़े परहेजों ने देश भर के प्रशंसकों को अचंभित कर दिया है। अपनी बेदाग फिटनेस के लिए विख्यात अभिनेता अक्षय कुमार के एक हालिया बयान ने इस विषय पर देशव्यापी चर्चा को जन्म दे दिया है। अभिनेता ने एक लोकप्रिय टेलीविजन कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से यह साझा किया कि उन्होंने पिछले पंद्रह वर्षों से एक बार भी समोसे का स्वाद नहीं चखा है। उनका यह कदम किसी कॉस्मेटिक बदलाव या वजन कम करने की तात्कालिक होड़ का हिस्सा नहीं है, बल्कि विशुद्ध रूप से चिकित्सीय और स्वास्थ्य संबंधी कारणों पर आधारित है।

अक्षय कुमार ने इस तथ्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि उनके करियर की एक प्रसिद्ध फिल्म के मुख्य गीत की शूटिंग के दौरान भी उन्होंने समोसे से पूरी तरह दूरी बनाए रखी थी। परिष्कृत गेहूं के आटे अर्थात मैदा से निर्मित होने और वनस्पति तेल में अत्यधिक डीप-फ्राई किए जाने के कारण समोसे का सेवन करने से उन्हें गंभीर एसिडिटी, सीने में जलन और शारीरिक बेचैनी का सामना करना पड़ता था। इसी जैविक असहजता के चलते उन्होंने समोसे को अपनी दैनिक आहार तालिका से पूरी तरह और स्थाई रूप से निष्कासित कर दिया। अक्षय कुमार भारतीय मनोरंजन जगत के अकेले ऐसे व्यक्तित्व नहीं हैं जो अपने भोजन के प्रति इतने गंभीर और सतर्क हैं। आज के इस विशेष दिवस पर मनोरंजन जगत के ऐसे तमाम चेहरे अग्रिम पंक्ति में खड़े दिखाई देते हैं जो अपने सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से सजग पोषण, संतुलित खानपान और स्वच्छ जैविक आहार का न केवल प्रचार करते हैं, बल्कि विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियानों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य मानकों को विनियमित करने वाली संस्था, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा संचालित विभिन्न जन-जागरूकता अभियानों में इन सितारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। लीक से हटकर और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी भूमिकाएं निभाने वाले बहुमुखी अभिनेता राजकुमार राव वर्तमान में एफएसएसएआई के विशेष अभियान 'आज से थोड़ा कम' के आधिकारिक ब्रांड एम्बेसडर के रूप में देश को संबोधित कर रहे हैं। इस अभियान के अंतर्गत वे आम नागरिकों से डिब्बाबंद और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में मिलाई जाने वाली अतिरिक्त चीनी, कृत्रिम नमक और अस्वस्थ फैट की मात्रा को धीरे-धीरे कम करने की वैज्ञानिक अपील कर रहे हैं। इसी प्रकार, अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री जूही चावला एक अन्य महत्वपूर्ण सरकारी पहल 'गुड न्यूज़ मतलब?' से लंबे समय तक जुड़ी रहीं, जिसके तहत उन्होंने देश की ग्रामीण और शहरी आबादी के बीच विटामिनों और आवश्यक खनिजों से समृद्ध फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों की महत्ता को प्रतिपादित किया। इस जनहितैषी अभियान में टेलीविजन जगत की स्थापित अभिनेत्री साक्षी तंवर ने भी अग्रणी भूमिका निभाते हुए माताओं को कुपोषण मुक्त भोजन अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित किया।

इस राष्ट्रीय पोषण आंदोलन को गति प्रदान करते हुए अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने 'ईट राइट इंडिया' अभियान का पुरजोर समर्थन किया है और भारतीय नागरिकों से खाद्य सुरक्षा के कड़े मानकों के अनुरूप ही भोज्य पदार्थों का चयन करने का आग्रह किया है। इस अभियान की दार्शनिक और व्यावहारिक व्याख्या करते हुए प्रख्यात अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने अत्यंत सारगर्भित बात कही कि मनुष्य जैसा अन्न ग्रहण करता है, उसका शरीर और विचार ठीक उसी के अनुरूप ढलते जाते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी थाली में परोसे गए भोजन की शुद्धता और अपने मस्तिष्क में चल रहे विचारों की शुचिता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने आधुनिक पीढ़ी को दैनिक जीवन में मिलेट्स अर्थात मोटे अनाजों जैसे रागी, बाजरा और ज्वार को शामिल करने की पुरजोर वकालत की। इस अभियान के एक अन्य सक्रिय स्तंभ और अंतरराष्ट्रीय पहलवान संग्राम सिंह ने उत्तम स्वास्थ्य के तीन मूल सिद्धांत प्रस्तुत किए जिन्हें उन्होंने 'रीजनल, सीजनल और ओरिजिनल' का नाम दिया। उनके अनुसार, स्थानीय जलवायु में उपजे फल और मौसमी अनाज ही मानव शरीर के लिए सबसे अधिक अनुकूल और गुणकारी होते हैं।

भारतीय सिनेमा की अग्रणी अभिनेत्रियां भी खानपान की इस जिम्मेदारी को बखूबी समझती हैं और अपने व्यापक प्रभाव का उपयोग समाज को स्वस्थ बनाने के लिए कर रही हैं। अभिनेत्री करीना कपूर खान हमेशा से पारंपरिक और टिकाऊ भारतीय आहार की सबसे बड़ी समर्थक रही हैं, जिसमें दाल-चावल, घर का बना शुद्ध पराठा और खिचड़ी जैसे व्यंजन प्रमुखता से शामिल होते हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि किसी भी प्रकार की क्रैश डाइट या भूखे रहने की पश्चिमी प्रवृत्ति के बजाय मनुष्य को ऐसी खानपान पद्धतियां अपनानी चाहिए जिन्हें जीवन भर आसानी से निभाया जा सके। वहीं दूसरी ओर, अभिनेत्री आलिया भट्ट ने पर्यावरण संरक्षण और जीव दया से प्रेरित 'को-एग्जिस्ट' जैसी अनूठी पहलों के माध्यम से पूर्णतः शाकाहारी और शुद्ध देसी भोजन को वैश्विक मंच पर प्रमोट करने का सराहनीय कार्य किया है। इन विनियामक और व्यक्तिगत प्रयासों का सामूहिक प्रभाव देश के खाद्य सुरक्षा परिदृश्य को एक नई और सुरक्षित दिशा प्रदान कर रहा है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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