क्या भारतीय सिनेमा रचेगा इतिहास? ऑस्कर 2026 की रेस में 'कांतारा' और 'तन्वी द ग्रेट' समेत तीन फिल्मों ने मारी बाजी
क्या ऑस्कर 2026 में भारत जीतेगा गोल्ड? कांतारा: चैप्टर 1, तन्वी द ग्रेट और होमबाउंड जैसी फिल्मों ने ऑस्कर की रेस में शामिल होकर रचा इतिहास। ऋषभ शेट्टी और अनुपम खेर की फिल्मों ने दुनिया भर में मचाया धमाल। पूरी रिपोर्ट और ऑस्कर शॉर्टलिस्ट की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

मुंबई/लॉस एंजिल्स: क्या 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स में तिरंगा एक बार फिर शान से लहराएगा? यह सवाल आज भारत के हर सिनेमा प्रेमी की जुबान पर है। भारतीय सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण में, 'ऑस्कर 2026' की दौड़ में भारत की तीन प्रमुख फिल्मों ने अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर दी है। एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज (AMPAS) द्वारा जारी हालिया लिस्ट ने दुनिया भर के फिल्म प्रेमियों के बीच हलचल मचा दी है। इस बार भारत की ओर से ऋषभ शेट्टी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'कांतारा: ए लीजेंड - चैप्टर 1', दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर के निर्देशन में बनी 'तन्वी द ग्रेट' और नीरज घेवान की फिल्म 'होमबाउंड' ने प्रतिष्ठित ऑस्कर की शॉर्टलिस्ट और एलिजिबिलिटी लिस्ट में जगह बनाकर इतिहास रचने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं।
इस फिल्मी महाकुंभ की सबसे बड़ी चर्चा ऋषभ शेट्टी की फिल्म को लेकर है, जिसने अपनी लोककथाओं और जड़ों से जुड़ी कहानी के दम पर एकेडमी के सदस्यों का ध्यान खींचा है। वहीं, 'तन्वी द ग्रेट' के साथ अनुपम खेर ने एक निर्देशक के तौर पर अपनी सूक्ष्म दृष्टि का परिचय दिया है। इन फिल्मों का शॉर्टलिस्ट होना केवल एक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय कहानियाँ अब वैश्विक मानकों पर खरी उतर रही हैं। फिल्म 'होमबाउंड' के निर्माता करण जौहर ने इस खबर पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए इसे एक 'लैंडमार्क मोमेंट' करार दिया है। फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले ईशान खट्टर, जाह्नवी कपूर और विशाल जेठवा के प्रदर्शन की भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है।
कानूनी और तकनीकी पहलुओं की बात करें तो ऑस्कर की 'बेस्ट पिक्चर' श्रेणी में जगह बनाने के लिए फिल्मों को कड़े मानदंडों से गुजरना पड़ता है। 'कांतारा चैप्टर 1' और 'तन्वी द ग्रेट' ने उन सभी शर्तों को पूरा किया है, जिनमें अमेरिका के प्रमुख महानगरीय क्षेत्रों में थिएटर रिलीज और विशिष्ट तकनीकी प्रारूप शामिल हैं। एकेडमी के नियमों के अनुसार, अब इन फिल्मों को दुनिया भर की 200 से अधिक फिल्मों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी। अनुपम खेर ने इस गौरवपूर्ण क्षण पर कहा कि यह भारतीय सिनेमा की सामूहिक जीत है। उनके साथ फिल्म से जुड़े कलाकार जैकी श्रॉफ, बोमन ईरानी और करण टैकर ने भी इस उपलब्धि को भारतीय कला के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन बताया है।
सिनेमा के इस वैश्विक मंच पर भारत की यह मौजूदगी महज संयोग नहीं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में कंटेंट में आए क्रांतिकारी बदलाव का परिणाम है। जहाँ एक ओर ऋषभ शेट्टी अपनी मिट्टी की खुशबू को हॉलीवुड तक ले गए हैं, वहीं कंगना रनौत जैसी हस्तियों ने भी समय-समय पर भारतीय कला को अंतरराष्ट्रीय सम्मान दिलाने की वकालत की है। नीरज घेवान की 'होमबाउंड' पहले ही कान्स जैसे बड़े मंचों पर अपनी छाप छोड़ चुकी है, और अब ऑस्कर के टॉप 15 में शामिल होना इसकी गुणवत्ता पर मुहर लगाता है।
जैसे-जैसे ऑस्कर की अंतिम नामांकन सूची (Final Nominations) की तारीख करीब आ रही है, वैसे-वैसे भारतीय प्रशंसकों की धड़कनें तेज होती जा रही हैं। क्या ये फिल्में अंतिम पांच में जगह बना पाएंगी? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन वर्तमान स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय सिनेमा अब केवल 'एंटरटेनमेंट' नहीं, बल्कि वैश्विक 'एक्सिलेंस' का पर्याय बन चुका है।

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