पद्म श्री से सम्मानित अभिनेता विवेक ने फिल्मों में कॉमेडी के जरिए सामाजिक संदेश दिए और 'ग्रीन कलाम' अभियान के तहत 33 लाख पौधे लगाए।

तमिल सिनेमा में जब भी स्मार्ट कॉमेडी, दमदार वन-लाइनर और सोशल मैसेज वाली हंसी की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है Vivek का। आज भी उनके डायलॉग्स सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं और लोग उन्हें सिर्फ कॉमेडियन नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ मानते हैं। अपनी कॉमिक टाइमिंग से लाखों दिल जीतने वाले विवेक ने फिल्मों में ऐसा अंदाज़ बनाया, जिसमें हंसी के साथ समाज और राजनीति पर तगड़ा कटाक्ष भी होता था। यही वजह रही कि उन्हें “चिन्ना कलैवानर” यानी छोटे कलैवानर का नाम मिला और उनकी तुलना दिग्गज कॉमेडियन N. S. Krishnan से होने लगी।

19 नवंबर 1961 को तमिलनाडु के पेरुंगोट्टूर गांव में जन्मे विवेक का असली नाम ए. विवेकानंदन था। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह चेन्नई सचिवालय में नौकरी करते थे, लेकिन दिल हमेशा स्टेज और कॉमेडी में बसता था। मद्रास ह्यूमर क्लब में स्टैंड-अप करते हुए उनकी प्रतिभा पर मशहूर निर्देशक K. Balachander की नजर पड़ी। साल 1987 में फिल्म Manathil Urudhi Vendum से उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा। शुरुआती दिनों में छोटे रोल मिले, लेकिन धीरे-धीरे उनकी स्क्रीन प्रेजेंस इतनी मजबूत हो गई कि लोग हीरो के साथ-साथ विवेक को देखने थिएटर पहुंचने लगे।

साल 1998 के बाद विवेक का करियर रफ्तार पकड़ चुका था। Minnale, Kushi, Run, Saamy, Anniyan और Sivaji जैसी फिल्मों में उनकी कॉमेडी ने अलग ही लेवल बना दिया। खास बात यह थी कि उनका हर मजाक सिर्फ हंसाने के लिए नहीं होता था, बल्कि उसमें सामाजिक संदेश छिपा रहता था। कभी अंधविश्वास पर तंज, तो कभी भ्रष्टाचार और राजनीति पर कटाक्ष, विवेक ने कॉमेडी को सोचने पर मजबूर करने वाला हथियार बना दिया। Rajinikanth के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया और “अरिवु” जैसे किरदार आज भी याद किए जाते हैं।

विवेक सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने टीवी होस्ट, सिंगर और सोशल एक्टिविस्ट के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाई। भारत सरकार ने साल 2009 में उन्हें Padma Shri से सम्मानित किया। वहीं सत्यभामा यूनिवर्सिटी ने समाज और सिनेमा में योगदान के लिए उन्हें मानद डॉक्टरेट दी। पूर्व राष्ट्रपति A. P. J. Abdul Kalam से प्रेरित होकर उन्होंने “ग्रीन कलाम” अभियान शुरू किया, जिसका मकसद तमिलनाडु में करोड़ों पेड़ लगाना था। उनकी इस पहल से लाखों युवा जुड़े और उनके निधन तक 33 लाख से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके थे। यही कारण है कि लोग उन्हें सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि समाज बदलने वाला कलाकार मानते हैं।

अपने लंबे करियर में विवेक ने 220 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और तीन बार फिल्मफेयर अवॉर्ड के साथ कई तमिलनाडु स्टेट अवॉर्ड अपने नाम किए। बाद के वर्षों में Velaiyilla Pattathari, Yennai Arindhaal, Thozha और Vellai Pookkal जैसी फिल्मों में उन्होंने साबित किया कि वह सिर्फ कॉमेडियन नहीं, बल्कि शानदार अभिनेता भी हैं। 17 अप्रैल 2021 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी कॉमिक टाइमिंग, सामाजिक सोच और इंसानियत आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। यही वजह है कि विवेक का नाम आज भी तमिल सिनेमा के सबसे सम्मानित और यादगार कलाकारों में लिया जाता है।

Pratahkal Newsroom

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