आज के दौर में अगर आप किसी बॉलीवुड पार्टी में हैं, किसी शादी में नाच रहे हैं या इंस्टाग्राम पर कोई ट्रेंडिंग रील स्क्रॉल कर रहे हैं, तो मुमकिन ही नहीं कि आपको विशाल-शेखर का जादू सुनाई न दे। तीन बिलियन से ज्यादा यूट्यूब स्ट्रीम्स और सत्तर से ज्यादा नंबर-वन गानों का रिकॉर्ड रखने वाली यह जोड़ी सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की वो पहचान है जिसने बॉलीवुड को एक ग्लोबल वाइब दी है। शीला की जवानी से लेकर बेशरम रंग तक, इनका हर ट्रैक एक चार्टबस्टर साबित होता है और यही वजह है कि आज हर पीढ़ी के बीच सिर्फ इन्हीं के संगीत की चर्चा हो रही है।

इस म्यूज़िकल रेवोल्यूशन के पीछे दो बेहद अलग लेकिन प्रभावशाली टैलेंट विशाल दडलानी और शेखर रवजियानी खड़े हैं। मुंबई की गलियों से निकले ये दोनों कलाकार असल में बचपन के दोस्त थे, जिनकी किस्मत ने उन्हें एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में दोबारा मिलाया और वहीं से एक नई शुरुआत हुई। विशाल जहां अपने इलेक्ट्रॉनिक बैंड पेंटाग्राम के साथ एक्सपेरिमेंटल साउंड के लिए जाने जाते थे, वहीं शेखर की क्लासिकल ट्रेनिंग उनके संगीत को एक ठहराव और गहराई देती थी। इन दोनों के विपरीत अंदाज ही इस जोड़ी की सबसे बड़ी ताकत बन गए जिसने आगे चलकर संगीत की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया।

हालांकि इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था, लेकिन झंकार बीट्स फिल्म ने इनका पूरा गेम ही बदल दिया। तू आशिकी है और सुनो ना जैसे गानों ने रातों-रात इन्हें सुर्खियों में ला दिया और इन्हें फिल्मफेयर का प्रतिष्ठित आरडी बर्मन अवॉर्ड भी दिलाया। इसके बाद दस, सलाम नमस्ते और ब्लफमास्टर जैसी फिल्मों ने इन्हें बड़े बैनर्स की पहली पसंद बना दिया। असली धमाका तो ओम शांति ओम के साथ हुआ, जहां दर्द-ए-डिस्को और मैं अगर कहूं जैसे गानों ने यह साबित कर दिया कि यह जोड़ी हर तरह के मूड को सुरों में पिरोने में माहिर है और अब वे टॉप लीग का हिस्सा बन चुके थे।

साल दो हजार आठ के बाद तो जैसे विशाल-शेखर का सुनहरा दौर शुरू हो गया और उन्होंने एक के बाद एक कई कल्चरल मोमेंट्स दिए। दोस्ताना का देसी गर्ल हो, बचना ऐ हसीनों का खुदा जाने, अंजाना अंजानी का तुझे भुला दिया या फिर रा-वन का छम्मक छल्लो, इनका हर गाना लोगों की जुबान पर चढ़ गया। इन्होंने शीला की जवानी और ऊ ला ला जैसे गानों से डांस फ्लोर को हिला कर रख दिया, तो वहीं जग घूमेया और दिल दियां गल्लां जैसे गानों के जरिए रोमांस की एक नई परिभाषा लिखी। स्टूडेंट ऑफ द ईयर का राधा गाना आज भी शादियों की पहली पसंद बना हुआ है।

विशाल-शेखर की खासियत सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं रही, बल्कि इन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का परचम लहराया। एकॉन, द वैम्प्स, इमोजेन हीप और डिप्लो जैसे ग्लोबल आर्टिस्ट्स के साथ काम करके इन्होंने इंडियन म्यूज़िक को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाया। स्वैग से स्वागत और नशे सी चढ़ गई जैसे गानों ने न सिर्फ यूट्यूब पर रिकॉर्ड तोड़े बल्कि वायरल कल्चर को भी नए सिरे से परिभाषित किया। संगीत बनाने के साथ-साथ ये दोनों इंडियन आइडल और एमटीवी हसल जैसे बड़े शोज़ में जज बनकर देश के नए टैलेंट को तराशने का काम भी बखूबी कर रहे हैं।

आज विशाल-शेखर सिर्फ म्यूज़िक डायरेक्टर्स का नाम नहीं बल्कि एक ऐसा ब्रांड बन चुके हैं जो हर जनरेशन को अपने संगीत से जोड़ता है। चाहे पठान की मॉडर्न बीट्स हों या सुल्तान की रूहानी धुन, इनका संगीत हर मिजाज के लिए एक परफेक्ट साउंडट्रैक बन चुका है। अपनी इसी वर्सटैलिटी और इनोवेशन की वजह से यह जोड़ी आज भी इंडस्ट्री में ट्रेंड कर रही है और आने वाले कई सालों तक भारतीय संगीत को नई दिशा देती रहेगी। यही कारण है कि आज हर संगीत प्रेमी के फोन और दिल में इनका नाम सबसे ऊपर है।

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Pratahkal Newsroom

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