भारतीय सिनेमा और राजनीति के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनका जीवन केवल सफलता की कहानियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह संघर्ष, आत्म-खोज और परिवर्तन की एक गहरी यात्रा बन जाता है। ऐसे ही एक व्यक्तित्व थे अभिनेता, निर्माता और राजनेता विनोद खन्ना, जिनका जीवन 27 अप्रैल 2017 को 70 वर्ष की आयु में समाप्त हुआ, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है।

6 अक्टूबर 1946 को अविभाजित भारत के पेशावर में जन्मे विनोद खन्ना का परिवार विभाजन के बाद मुंबई आकर बस गया। उनके पिता कपड़ा और रसायन व्यवसाय से जुड़े थे, जबकि माता गृहिणी थीं। बचपन से ही कला और अभिनय की ओर आकर्षित खन्ना ने 1968 में फिल्म मन का मीत से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। शुरुआत भले ही सहायक भूमिकाओं से हुई, लेकिन जल्द ही उनकी उपस्थिति दर्शकों के बीच ध्यान आकर्षित करने लगी।

1970 का दशक उनके करियर का स्वर्णिम दौर साबित हुआ, जब सच्चा झूठा, आन मिलो सजना और पूरब और पश्चिम जैसी फिल्मों ने उन्हें पहचान दिलाई। इसके बाद मेरा गांव मेरा देश, अचानक, हाथ की सफाई, हेरा फेरी और अमर अकबर एंथनी जैसी सुपरहिट फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा के शीर्ष सितारों में स्थापित कर दिया। अपनी दमदार स्क्रीन प्रेज़ेंस और खलनायकी से लेकर नायक तक के प्रभावी अभिनय के कारण वे उस दौर के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में शामिल रहे।

विनोद खन्ना का निजी जीवन भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा। उन्होंने 1971 में गीतांजलि तलेयार से विवाह किया, जिनसे उनके दो पुत्र राहुल और अक्षय खन्ना हुए, जो आगे चलकर फिल्म उद्योग में सक्रिय हुए। 1985 में उनका तलाक हो गया। बाद में 1990 में उन्होंने कविता दफ्तरी से विवाह किया, जिनसे उनके एक पुत्र और एक पुत्री हैं।

उनके जीवन का सबसे चर्चित और अप्रत्याशित मोड़ 1975 में आया, जब वे आध्यात्मिक गुरु Osho के शिष्य बन गए। इसके बाद वे उनके आश्रमों से जुड़े रहे और 1980 के दशक की शुरुआत में अमेरिका के ओरेगन स्थित राजनेशपुरम कम्यून में भी रहे। वहां उन्होंने साधना, ध्यान और साधारण जीवन अपनाया, यहाँ तक कि वे ओशो के माली के रूप में भी कार्य करते रहे। इस दौरान उन्होंने अपना नाम बदलकर “स्वामी विनोद भारती” रख लिया।

हालांकि लगभग पाँच वर्षों के बाद उन्होंने इस जीवन शैली से दूरी बना ली। बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि वह अनुभव उनके लिए आत्म-खोज का हिस्सा था, लेकिन वे धीरे-धीरे इससे असंतुष्ट हो गए और मुख्यधारा के जीवन में लौट आए। उन्होंने यह भी कहा कि आध्यात्मिकता को लेकर उनका दृष्टिकोण समय के साथ बदल गया। वर्ष 1997 में उन्होंने राजनीति में कदम रखते हुए भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली। वे पंजाब के गुरदासपुर से लोकसभा सांसद चुने गए और बाद में कई बार संसद पहुंचे। उन्हें केंद्रीय पर्यटन, संस्कृति और विदेश राज्य मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी भी मिली।

अप्रैल 2017 में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते उन्हें मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ यह सामने आया कि वे ब्लैडर कैंसर से पीड़ित थे। 27 अप्रैल 2017 को उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गई और प्रधानमंत्री सहित अनेक नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। विनोद खन्ना का जीवन एक ऐसे व्यक्तित्व की कहानी है जिसने सिनेमा, आध्यात्मिकता और राजनीति तीनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका सफर आज भी इस बात का उदाहरण है कि एक कलाकार केवल पर्दे तक सीमित नहीं होता, बल्कि जीवन के हर मोड़ पर नई परिभाषा गढ़ सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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