कौन हैं Vijay Raaz? अपनी आवाज़ और एक्टिंग से हर किरदार में जान फूंकने वाले कलाकार
एनएसडी से निकले विजय राज ने 'मॉनसून वेडिंग' और 'रन' जैसी फिल्मों से पहचान बनाई और अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी अपनी दमदार एक्टिंग का लोहा मनवा रहे हैं।

बॉलीवुड अभिनेता विजय राज जिन्होंने हाल ही में 'मर्डर इन माहिम' और 'भूल भुलैया 3' जैसी परियोजनाओं में अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया है।
आजकल जब भी बॉलीवुड के सबसे अलग और दमदार एक्टर्स की बात होती है, तो विजय राज का नाम अपने आप चर्चा में आ जाता है। कभी कॉमेडी से लोगों को पेट पकड़कर हंसाने वाले विजय राज अब ऐसे कलाकार बन चुके हैं, जो स्क्रीन पर आते ही पूरे सीन का रंग बदल देते हैं। उनकी भारी आवाज़, अजीब सा ठहराव और चेहरे के एक्सप्रेशन उन्हें बाकी एक्टर्स से बिल्कुल अलग बनाते हैं। हाल ही में “मर्डर इन माहिम”, “शोटाइम”, “भूल भुलैया 3” और “चंदू चैंपियन” जैसी फिल्मों और सीरीज़ में उनकी मौजूदगी ने फिर साबित कर दिया कि विजय राज सिर्फ सपोर्टिंग एक्टर नहीं, बल्कि हर कहानी की जान हैं।
दिल्ली में जन्मे विजय राज का सफर बिल्कुल फिल्मी रहा। कॉलेज के दिनों में थिएटर से शुरुआत करने वाले इस कलाकार ने एक्टिंग को ही अपना सपना बना लिया था। दिल्ली यूनिवर्सिटी के ड्रामेटिक सोसायटी से निकलकर उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में अपनी कला को निखारा और फिर मुंबई पहुंच गए। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन उनकी किस्मत तब बदली जब दिग्गज अभिनेता Naseeruddin Shah ने उनकी प्रतिभा पहचानकर उन्हें “भोपाल एक्सप्रेस” और बाद में “मॉनसून वेडिंग” जैसी फिल्मों तक पहुंचाया। “मॉनसून वेडिंग” में डुबे जी का किरदार ऐसा हिट हुआ कि पूरी इंडस्ट्री ने पहली बार विजय राज की एक्टिंग का असली जादू देखा।
इसके बाद विजय राज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। “रन” में गणेश का किरदार आज भी मीम्स और सोशल मीडिया पर वायरल होता रहता है। उनकी कॉमिक टाइमिंग इतनी नैचुरल थी कि लोग उन्हें देखते ही हंसने लगते थे। फिर “धमाल”, “वेलकम”, “दीवाने हुए पागल” और “फूल एंड फाइनल” जैसी फिल्मों ने उन्हें कॉमेडी का सुपरस्टार बना दिया। लेकिन विजय राज सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं रहे। “दिल्ली बेली” में खतरनाक गैंगस्टर सोमयाजुलु और “डेढ़ इश्किया” में जान मोहम्मद जैसे किरदारों ने दिखा दिया कि वह जितने मजेदार हैं, उतने ही डरावने और गंभीर भी बन सकते हैं।
विजय राज की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वह हर किरदार को इतना असली बना देते हैं कि दर्शक भूल जाते हैं कि वह एक्टिंग देख रहे हैं। “स्त्री” में रहस्यमयी शास्त्री हो या “गली बॉय” में आफताब शाकिर अहमद, “लूटकेस” का बाला राठौर हो या “गंगूबाई काठियावाड़ी” का रज़िया बाई वाला अंदाज़, हर बार उन्होंने अपने अभिनय से कहानी को नई ऊंचाई दी। उनकी आवाज़ भी इंडस्ट्री में अलग पहचान रखती है। फिल्मों, ट्रेलर्स और विज्ञापनों में उनकी नैरेशन स्टाइल इतनी दमदार है कि लोग सिर्फ आवाज़ सुनकर पहचान लेते हैं कि यह विजय राज हैं।
सिर्फ अभिनेता ही नहीं, विजय राज ने निर्देशक के तौर पर भी अपनी पहचान बनाई। साल 2014 में उन्होंने “क्या दिल्ली क्या लाहौर” से डायरेक्शन में कदम रखा और साबित कर दिया कि उनकी समझ सिर्फ कैमरे के सामने तक सीमित नहीं है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी उनका जलवा लगातार बढ़ता जा रहा है। “मेड इन हेवन”, “मामला लीगल है”, “परिवार” और “ए सिंपल मर्डर” जैसी सीरीज़ ने नई पीढ़ी को उनका और बड़ा फैन बना दिया। यही वजह है कि तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर के बाद भी विजय राज आज पहले से ज्यादा वायरल और चर्चित हैं।

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