आज अगर साउथ सिनेमा में किसी डायरेक्टर का नाम सबसे ज्यादा रिस्पेक्ट के साथ लिया जाता है, तो उसमें Vetrimaaran सबसे आगे नजर आते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी फिल्मों के सीन, डायलॉग्स और रॉ स्टोरीटेलिंग लगातार वायरल रहती है। वजह साफ है—वेत्रिमारन सिर्फ फिल्में नहीं बनाते, वो समाज की सच्चाई को पर्दे पर उतारते हैं। चाहे पुलिस सिस्टम की क्रूरता हो, गैंगवार की अंधेरी दुनिया हो या जाति और वर्ग संघर्ष, उनकी फिल्मों में हर चीज इतनी असली लगती है कि दर्शक खुद को कहानी के अंदर महसूस करने लगते हैं। यही कारण है कि उन्हें आज इंडियन सिनेमा के सबसे दमदार फिल्ममेकर्स में गिना जाता है।

1975 में तमिलनाडु के कुड्डालोर में जन्मे वेत्रिमारन का फिल्मों की तरफ झुकाव कॉलेज के दिनों में शुरू हुआ। लोयोला कॉलेज में इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई के दौरान उन्होंने एक छोटा फिल्म प्रोजेक्ट बनाया और वहीं से उन्हें समझ आया कि उनकी असली दुनिया कैमरे के पीछे है। मशहूर निर्देशक Balu Mahendra से मुलाकात ने उनकी जिंदगी बदल दी। वेत्रिमारन ने उनके असिस्टेंट के तौर पर काम किया और वहीं से फिल्ममेकिंग की बारीकियां सीखीं। संघर्ष आसान नहीं था। कई प्रोजेक्ट बंद हुए, प्रोड्यूसर पीछे हटे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आखिरकार 2007 में Polladhavan के साथ उन्होंने डायरेक्शन में डेब्यू किया और पहली ही फिल्म ने उन्हें इंडस्ट्री में अलग पहचान दिला दी।

असल गेम तब बदला जब Aadukalam रिलीज हुई। मदुरै के मुर्गा फाइटिंग कल्चर पर बनी इस फिल्म के लिए वेत्रिमारन ने सालों रिसर्च की थी। फिल्म ने नेशनल अवॉर्ड्स की बारिश कर दी और Dhanush के करियर को भी नई ऊंचाई दी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। Visaranai जैसी फिल्म ने पुलिस अत्याचार की ऐसी तस्वीर दिखाई कि पूरी दुनिया हिल गई। यही फिल्म ऑस्कर के लिए भारत की ऑफिशियल एंट्री बनी। फिर Vada Chennai ने गैंगस्टर ड्रामा को नया लेवल दिया और Asuran ने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ क्लब में एंट्री मारते हुए साबित कर दिया कि कंटेंट और कमर्शियल सिनेमा साथ चल सकते हैं।

वेत्रिमारन की सबसे बड़ी ताकत उनकी रियलिस्टिक स्टाइल है। उनकी फिल्मों में हीरो चमकदार नहीं होता, बल्कि आम आदमी जैसा लगता है। सड़कें असली दिखती हैं, किरदारों की भाषा लोकल होती है और इमोशन्स इतने कच्चे होते हैं कि दर्शक उनसे जुड़ जाते हैं। यही वजह है कि Vijay Sethupathi, Soori और धनुष जैसे कलाकार उनके साथ काम करके अपने करियर की सबसे यादगार परफॉर्मेंस दे चुके हैं। 2023 में आई Viduthalai Part 1 ने फिर साबित किया कि वेत्रिमारन सिर्फ कहानी नहीं सुनाते, बल्कि सिस्टम के उन हिस्सों को सामने लाते हैं जिन पर अक्सर फिल्में बोलने से डरती हैं।

डायरेक्शन के अलावा वेत्रिमारन ने प्रोड्यूसर के तौर पर भी शानदार काम किया है। Kaaka Muttai जैसी फिल्म को सपोर्ट करके उन्होंने नए टैलेंट को मंच दिया। उनकी प्रोडक्शन कंपनी ग्रास रूट फिल्म कंपनी आज कंटेंट ड्रिवन सिनेमा की पहचान बन चुकी है। पांच नेशनल फिल्म अवॉर्ड, कई फिल्मफेयर साउथ अवॉर्ड और तमिल सिनेमा में लगातार सुपरहिट फिल्मों की लाइन ने उन्हें एक ऐसे फिल्ममेकर में बदल दिया है जिनका नाम अब सिर्फ तमिल इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहा। आज पूरा इंडिया उनके अगले प्रोजेक्ट का इंतजार करता है क्योंकि वेत्रिमारन का मतलब है—रियल, रॉ और दमदार सिनेमा।

Pratahkal Newsroom

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