आजकल तेलुगु सिनेमा की बात हो और वेंनेला किशोर का नाम न आए, ऐसा होना मुश्किल है। अपनी जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग, चेहरे के एक्सप्रेशन और हर सीन में जान डाल देने वाले अंदाज की वजह से वह सोशल मीडिया पर लगातार वायरल रहते हैं। चाहे बड़े स्टार की फिल्म हो या छोटे बजट की कहानी, वेंनेला किशोर अपनी मौजूदगी से हर फ्रेम को एंटरटेनमेंट में बदल देते हैं। यही वजह है कि दर्शक उन्हें सिर्फ कॉेडियन नहीं, बल्कि फिल्म का “सीक्रेट वेपन” मानते हैं।

19 सितंबर 1980 को तेलंगाना के कामारेड्डी में जन्मे बोक्काला किशोर कुमार का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। पढ़ाई के लिए वह हैदराबाद पहुंचे और बाद में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए। मिशिगन की फेरिस स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर्स करने के बाद उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम भी किया। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। अमेरिका में रहते हुए उन्हें निर्देशक देवा कट्टा की फिल्म ‘वेंनेला’ में काम करने का मौका मिला और यही फिल्म उनकी जिंदगी बदल गई। इस डेब्यू के बाद उनके नाम के आगे “वेंनेला” हमेशा के लिए जुड़ गया।

वेंनेला किशोर की सबसे बड़ी ताकत उनकी नैचुरल कॉमेडी है। वह ओवरएक्टिंग नहीं करते, बल्कि छोटे-छोटे रिएक्शन और डायलॉग डिलीवरी से लोगों को हंसाते हैं। ‘डीजे’, ‘बिंदास’, ‘पिल्ला जमींदार’, ‘बादशाह’, ‘श्रीमंथुडु’, ‘सर्कारू वारी पाटा’, ‘गुडाचारी’ और ‘भले भले मगाडिवॉय’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी दर्शकों को याद हैं। खास बात यह है कि वह सिर्फ कॉमिक रोल तक सीमित नहीं रहे, बल्कि कई फिल्मों में इमोशनल और सपोर्टिंग परफॉर्मेंस देकर भी अपनी एक्टिंग रेंज साबित कर चुके हैं।

एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्होंने निर्देशन में हाथ आजमाया। ‘वेंनेला 1½’ और ‘जाफा’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया, लेकिन वहां उन्हें उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा अभिनय की दुनिया में लौट आए। यही वापसी उन्हें और मजबूत बनाती है। आज इंडस्ट्री में उनकी पहचान ऐसे कलाकार की है जो किसी भी कमजोर सीन को अपने दम पर यादगार बना सकता है।

अवार्ड्स की बात करें तो वेंनेला किशोर ने अपने करियर में कई बड़े सम्मान हासिल किए हैं। ‘इंकोसारी’ और ‘भले भले मगाडिवॉय’ के लिए उन्हें नंदी अवॉर्ड मिला। वहीं साउथ इंडियन इंटरनेशनल मूवी अवॉर्ड्स और आईफा उत्सव में भी उन्हें बेस्ट कॉेडियन का सम्मान मिल चुका है। ‘भीष्मा’, ‘रंग दे’ और ‘सर्कारू वारी पाटा’ जैसी फिल्मों के लिए लगातार नॉमिनेशन मिलना यह साबित करता है कि उनका जादू आज भी कायम है।

आज वेंनेला किशोर सिर्फ तेलुगु सिनेमा का हिस्सा नहीं, बल्कि वहां की कॉमेडी संस्कृति का बड़ा चेहरा बन चुके हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियर से सुपरहिट कॉमिक स्टार बनने तक का उनका सफर लाखों युवाओं को यह भरोसा देता है कि अगर टैलेंट और मेहनत साथ हो, तो जिंदगी कभी भी नया मोड़ ले सकती है। यही वजह है कि लोग आज भी उनके हर नए सीन और हर नई फिल्म का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

Pratahkal Newsroom

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