त्रिशाला दत्त का करियर: मनोचिकित्सा के क्षेत्र में बनाई अपनी पहचान
बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त फिल्मों से दूर न्यूयॉर्क में लाइसेंस प्राप्त विवाह और परिवार चिकित्सक के रूप में कार्यरत हैं।

अभिनेता संजय दत्त अपनी बेटी त्रिशाला दत्त के साथ, जो न्यूयॉर्क में एक लाइसेंस प्राप्त विवाह और परिवार चिकित्सक के रूप में मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करती हैं।
बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त और दिवंगत अभिनेत्री ऋचा शर्मा की बेटी त्रिशाला दत्त ने फिल्म जगत की चकाचौंध से दूर रहकर न्यूयॉर्क में मनोचिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। अगस्त 1988 में जन्मीं त्रिशाला का जीवन किसी संघर्षपूर्ण कहानी से कम नहीं रहा है। वर्ष 1996 में ब्रेन ट्यूमर के कारण अपनी मां को खोने के बाद उनका पालन-पोषण मुख्य रूप से न्यूयॉर्क में उनके नाना-नानी द्वारा किया गया। हालांकि वे एक प्रसिद्ध फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखती हैं, लेकिन उन्होंने अभिनय के बजाय मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और भावनात्मक उपचार को अपने करियर के रूप में चुना।
त्रिशाला ने जॉन जे कॉलेज ऑफ क्रिमिनल जस्टिस से शिक्षा प्राप्त की, जहां उन्होंने कानून का अध्ययन किया और कुछ समय के लिए फॉरेंसिक विज्ञान में भी रुचि दिखाई। वर्तमान में वह एक लाइसेंस प्राप्त विवाह और परिवार चिकित्सक (LMFT) के रूप में कार्यरत हैं। उनका कार्य मुख्य रूप से दक्षिण एशियाई समुदाय के भीतर आघात, चिंता, अवसाद, ओसीडी (OCD) और रिश्तों से जुड़ी समस्याओं पर केंद्रित है। उन्होंने स्वीकार किया है कि कभी उनके मन में बॉलीवुड में आने का विचार आया था, लेकिन वह केवल अपने पिता के साथ अधिक समय बिताने की इच्छा से प्रेरित था, न कि अभिनय के प्रति किसी वास्तविक जुनून से।
त्रिशाला की कुल संपत्ति का आधिकारिक खुलासा कभी नहीं हुआ है, क्योंकि वे फिल्मों या विज्ञापनों से दूर एक निजी पेशेवर जीवन जीती हैं। उनकी आय का मुख्य स्रोत संयुक्त राज्य अमेरिका में एक मनोचिकित्सक के रूप में उनका स्वतंत्र करियर है। 'इनसाइड थॉट्स आउट लाउड' के साथ एक हालिया साक्षात्कार में, त्रिशाला ने न्यूयॉर्क में अपने बचपन के दौरान झेले गए भावनात्मक दर्द के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि अपनी भारतीय पहचान के कारण उन्हें बहुत कम उम्र से ही नस्लवाद और बच्चों द्वारा ताने व बुलिंग का सामना करना पड़ा।
उन्होंने अपने आठ साल की उम्र में मां को खोने के गहरे आघात को याद करते हुए साझा किया कि कैसे इस त्रासदी ने उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित किया। स्कूली दिनों और भारत की यात्राओं के दौरान उन्हें बॉडी-शेमिंग और अकेलेपन से भी जूझना पड़ा, जहां सार्वजनिक जांच ने उन्हें असहज कर दिया था। त्रिशाला का कहना है कि उनके इन दर्दनाक अनुभवों ने ही उन्हें एक मनोचिकित्सक बनने के लिए प्रेरित किया। बचपन के संघर्षों ने उन्हें मानसिक स्वास्थ्य सहायता के महत्व का एहसास कराया। आज, उनकी आघात से उपचार तक की यह यात्रा उन लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है, जो चिंता, दुख और अन्य भावनात्मक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। उनका यह सफर स्पष्ट करता है कि कैसे एक व्यक्ति अपने अतीत के घावों को उद्देश्यपूर्ण करियर में बदलकर दूसरों की मदद कर सकता है।

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