एक दौर था जब साउथ सिनेमा में ग्लैमर, एक्टिंग और क्लासिकल म्यूजिक का नाम आते ही सबसे पहले टी. आर. राजकुमारी का चेहरा याद किया जाता था। आज भी जब तमिल सिनेमा की पहली “ड्रीम गर्ल” की बात होती है, तो यही नाम सबसे ऊपर आता है। अपनी खूबसूरती, शानदार स्क्रीन प्रेजेंस और दमदार आवाज़ से उन्होंने उस दौर में ऐसा जादू चलाया था, जब फिल्मों में महिला कलाकारों को इतनी बड़ी पहचान मिलना आसान नहीं था। यही वजह है कि दशकों बाद भी उनकी कहानी लोगों को आकर्षित करती है और नई पीढ़ी उनके सफर के बारे में जानना चाहती है।

5 मई 1922 को जन्मीं तंजावुर राधाकृष्णन राजायी ने बहुत कम उम्र में फिल्मों की दुनिया में कदम रखा। शुरुआत में उनका नाम टी. आर. राजायी और बाद में टी. आर. राजलक्ष्मी के रूप में भी सामने आया, लेकिन असली पहचान उन्हें टी. आर. राजकुमारी नाम से मिली। उनकी शुरुआती फिल्मों में “काचा देवयानी” ने जबरदस्त सफलता हासिल की और देखते ही देखते वह तमिल सिनेमा की नई सनसनी बन गईं। उस दौर में उनकी फिल्मों के पोस्टर ही थिएटर तक दर्शकों को खींच लाते थे। “हरिदास” जैसी रिकॉर्ड तोड़ फिल्म ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया और उनकी ग्लैमरस छवि ने पूरे साउथ इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया।

टी. आर. राजकुमारी सिर्फ अभिनेत्री ही नहीं थीं, बल्कि बेहतरीन कर्नाटक सिंगर और डांसर भी थीं। यही मल्टीटैलेंट उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाता था। उनकी आवाज़ में ऐसा आकर्षण था कि “पार्का पार्का थिकट्टुवथुमिल्लै”, “इंद्रे एनथु कुथुकालम” और “वाणुलावुम थरई नी” जैसे गाने लोगों की जुबान पर चढ़ गए। स्क्रीन पर उनका अंदाज बेहद रॉयल माना जाता था और यही वजह थी कि उन्होंने एम. जी. रामचंद्रन, शिवाजी गणेशन, पी. यू. चिन्नप्पा और एम. के. त्यागराज भगवतर जैसे दिग्गज सितारों के साथ काम करके अपनी अलग पहचान बनाई।

फिल्मों में सफलता मिलने के बाद उन्होंने सिर्फ एक्टिंग तक खुद को सीमित नहीं रखा। अपने भाई टी. आर. रामन्ना के साथ मिलकर उन्होंने “आर. आर. पिक्चर्स” नाम की प्रोडक्शन कंपनी शुरू की। उस समय किसी महिला कलाकार का प्रोडक्शन में उतरना बड़ी बात मानी जाती थी। “पासम”, “परिया इडाथु पेन”, “पनम पडैथवन” और “परक्कुम पावै” जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने साबित कर दिया कि वह सिर्फ पर्दे की स्टार नहीं, बल्कि इंडस्ट्री की मजबूत क्रिएटिव ताकत भी हैं। उनकी फिल्मों में मनोरंजन के साथ मजबूत कहानी और संगीत का अनोखा मेल देखने को मिलता था।

टी. आर. राजकुमारी की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने ग्लैमर को क्लास और टैलेंट के साथ पेश किया। वह उस दौर की ऐसी स्टार थीं जिनकी फैन फॉलोइंग सिर्फ तमिल सिनेमा तक सीमित नहीं रही। हिंदी और तेलुगु फिल्मों में भी उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। “देवदास” में चंद्रमुखी का किरदार हो या “चंद्रलेखा” जैसी भव्य फिल्म, हर रोल में उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। यही वजह है कि आज भी उन्हें भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली अभिनेत्रियों में गिना जाता है।

20 सितंबर 1999 को लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया, लेकिन उनका स्टारडम आज भी जिंदा है। सिनेमा प्रेमियों के बीच उनकी चर्चा इसलिए भी होती है क्योंकि उन्होंने उस दौर में महिला सुपरस्टार होने का मतलब बदल दिया था। टी. आर. राजकुमारी सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं थीं, बल्कि वह भारतीय सिनेमा के शुरुआती ग्लैमर युग की सबसे चमकदार पहचान थीं, जिनकी विरासत आज भी साउथ इंडस्ट्री के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है।

Pratahkal Newsroom

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