"वो भी हमारे अपने हैं!" नस्लभेद पर अक्षय कुमार ने उठाई आवाज़ ; सोशल मीडिया पर लोगों ने की प्रशंसा, देखें वीडियो
व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया के मंच से अक्षय कुमार ने उत्तर-पूर्वी भारतीयों के खिलाफ नस्लभेद पर खुलकर बयान दिया। प्रतिभागी और अपने मणिपुर के मेकअप आर्टिस्ट के अनुभव साझा कर उन्होंने राष्ट्रीय एकता, सम्मान और संवैधानिक समानता का मजबूत संदेश दिया।

अभिनेता अक्षय कुमार
प्राइम-टाइम टेलीविजन के चमकदार मंच पर जब हंसी-मजाक और खेल का माहौल होता है, तब शायद ही कोई सामाजिक मुद्दा राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन पाता है। लेकिन इस बार दृश्य अलग था। लोकप्रिय फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने अपने शो व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया के मंच को एक गंभीर सामाजिक संदेश के लिए इस्तेमाल किया और उत्तर-पूर्वी भारत के लोगों के खिलाफ होने वाले नस्लभेद और भेदभाव के विरुद्ध खुलकर आवाज उठाई।
यह क्षण तब आया जब उत्तर-पूर्व से आई एक प्रतिभागी ने अपने जीवन के दर्दनाक अनुभव साझा किए। उसने बताया कि किस प्रकार उसे उसके शारीरिक स्वरूप और पृष्ठभूमि के आधार पर अपमानजनक टिप्पणियों, तिरस्कार और रूढ़िगत धारणाओं का सामना करना पड़ा। स्टूडियो में सन्नाटा छा गया और माहौल अचानक संवेदनशील हो उठा।
This is why he’s called the People's Superstar. Standing up for North Indians and calling out the divide... Akshay sir, you have my respect forever 🙏✨ #WheelOfFortune @akshaykumar pic.twitter.com/QAXySmbYDF
— Vedika (@kaalajaadu___) February 19, 2026
अक्षय कुमार ने इस विषय पर सीधे और स्पष्ट शब्दों में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्व के लोग “उतने ही भारतीय हैं जितना मैं हूं” और किसी भी प्रकार का भेदभाव देश की एकता और संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने दर्शकों को याद दिलाया कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और हर क्षेत्र, हर संस्कृति और हर समुदाय का समान सम्मान होना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इन समुदायों ने देश की रक्षा, खेल, कला और विभिन्न राष्ट्रीय सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारतीय सशस्त्र बलों में उनकी भागीदारी का जिक्र करते हुए उन्होंने यह संदेश दिया कि राष्ट्रनिर्माण में उनकी भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
कार्यक्रम के दौरान एक और मार्मिक क्षण तब सामने आया जब अक्षय कुमार ने अपने मेकअप आर्टिस्ट, जो मणिपुर से हैं, को मंच पर बुलाया। उन्होंने साझा किया कि उन्हें अक्सर उनके चेहरे-मोहरे के कारण ‘चीनी’ कहकर पुकारा गया और अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। यह व्यक्तिगत अनुभव केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उस व्यापक समस्या का प्रतीक था जो वर्षों से समाज में मौजूद है।
अक्षय कुमार ने स्वीकार किया कि ऐसे अनुभव वास्तविक और लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा कि इन कहानियों को सुनकर उन्हें लगा कि चुप रहना उचित नहीं है। उनका यह वक्तव्य केवल एक अभिनेता की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक मंच से दिया गया सामाजिक संदेश था, जिसने दर्शकों का ध्यान गंभीरता से इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया।
इस प्रसारण के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से चर्चा का विषय बना। कई दर्शकों ने सराहना की कि एक मनोरंजन कार्यक्रम के मंच से इतने संवेदनशील सामाजिक प्रश्न को उठाया गया। नस्लीय पूर्वाग्रह और उत्तर-पूर्वी भारतीयों के प्रति रूढ़िगत सोच लंबे समय से चिंता का विषय रही है, और यह प्रसंग इस समस्या को राष्ट्रीय विमर्श में लाने का एक महत्वपूर्ण क्षण बन गया। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और किसी भी प्रकार के भेदभाव को अस्वीकार्य ठहराता है। ऐसे में राष्ट्रीय मंच से दिया गया यह संदेश केवल भावनात्मक अपील नहीं, बल्कि सामाजिक और संवैधानिक मूल्यों की पुनर्पुष्टि भी था।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
