डिजिटल पर्दे पर 'सेंसर' का साया: ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर लगाम और रचनात्मकता की नई जंग
भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर सेंसरशिप और कंटेंट कंट्रोल को लेकर सरकार ने कड़े रुख के संकेत दिए हैं। आईटी नियम 2021 के तहत वेब सीरीज और डिजिटल कंटेंट के लिए नई गाइडलाइंस और तीन-स्तरीय शिकायत तंत्र की पूरी जानकारी। जानिए कैसे रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक मर्यादा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।

डिजिटल पर्दे पर 'सेंसर' का साया: ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर लगाम और रचनात्मकता की नई जंग
नई दिल्ली। भारत के करोड़ों घरों में मनोरंजन का मुख्य जरिया बन चुके ओटीटी प्लेटफॉर्म्स अब एक बड़े नीतिगत बदलाव की दहलीज पर खड़े हैं। वेब सीरीज में बढ़ते अपशब्दों, हिंसा और विवादित दृश्यों को लेकर मचे घमासान के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 'अभिव्यक्ति की आजादी' के नाम पर कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाल ही में 'इंडियाज गॉट लैटेन' (India's Got Latent) जैसे शो से जुड़े विवादों और संसद में उठी मांगों ने इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
विवाद की जड़: बोल्ड कंटेंट और सामाजिक प्रतिक्रिया
बीते कुछ समय में कई वेब सीरीज और शो अपनी कहानियों से ज्यादा अपने विवादित संवादों के कारण चर्चा में रहे हैं। दर्शकों के एक बड़े वर्ग और कई सामाजिक संगठनों का आरोप है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स बिना किसी जवाबदेही के अश्लील और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कंटेंट परोस रहे हैं।
- अश्लीलता पर प्रहार: सरकार ने अब तक करीब 43 ऐसे छोटे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक किया है जो अश्लील सामग्री का प्रसारण कर रहे थे।
- सेंसिटिव नैरेटिव: वेब सीरीज में अक्सर राजनीतिक और धार्मिक नैरेटिव को लेकर विवाद होता रहा है, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका जताई जाती है।
- बच्चों की सुरक्षा: आयु-आधारित रेटिंग (Age-Gating) के बावजूद, बच्चों तक व्यस्क सामग्री (Adult Content) की आसान पहुँच एक बड़ी चिंता बनी हुई है।
सरकारी गाइडलाइंस और तीन-स्तरीय प्रणाली
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने साफ किया है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर 'सेंसर बोर्ड' (CBFC) की कैंची तो नहीं चलेगी, लेकिन उन्हें सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 (IT Rules 2021) के सख्त दायरे में रहना होगा। सरकार ने एक 'तीन-स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र' (Three-Tier Grievance Redressal Mechanism) लागू किया है:
- स्तर-1 (सेल्फ-रेगुलेशन): हर प्लेटफॉर्म को अपना एक 'शिकायत अधिकारी' नियुक्त करना होगा जो दर्शकों की शिकायतों का निपटारा करेगा।
- स्तर-2 (स्व-नियामक संस्था): यदि शिकायत हल नहीं होती, तो इसे इंडस्ट्री द्वारा गठित स्व-नियामक संस्था के पास भेजा जाएगा।
- स्तर-3 (सरकारी निगरानी): अंतिम स्तर पर केंद्र सरकार की एक इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी मामले की जांच करेगी और जरूरत पड़ने पर कंटेंट हटाने का निर्देश देगी।
कानूनी पहलू: रचनात्मकता बनाम मर्यादा
संवैधानिक रूप से, अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार है, लेकिन अनुच्छेद 19(2) सरकार को 'शालीनता', 'सार्वजनिक व्यवस्था' और 'देश की अखंडता' के हित में 'तर्कसंगत प्रतिबंध' लगाने की शक्ति देता है। हाल ही में सरकार ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को चेतावनी दी है कि वे 'कॉमेडी' या 'रचनात्मकता' के नाम पर अश्लीलता फैलाने से बचें, अन्यथा आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
संतुलन की चुनौती
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर सेंसरशिप की यह बहस केवल कंटेंट कंट्रोल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलती भारतीय संस्कृति और डिजिटल युग की चुनौतियों का प्रतिबिंब है। एक तरफ वैश्विक बाजार में भारतीय कंटेंट की साख बचाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ घरेलू संस्कारों और कानूनी मर्यादाओं का पालन। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और क्रिएटर्स मिलकर एक ऐसा रास्ता कैसे निकालते हैं जहाँ 'कला' भी सुरक्षित रहे और 'संस्कार' भी।

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