ओटीटी पर 'धुरंधर' का सेंसर अवतार: म्यूट डायलॉग्स और 10 मिनट की कैंची से भड़के फैंस, 'एनिमल' और 'कबीर सिंह' का हवाला देकर सेंसर बोर्ड को घेरा
ओटीटी पर फिल्म 'धुरंधर' की रिलीज के साथ ही छिड़ा बड़ा विवाद। फैंस ने म्यूट डायलॉग्स और 10 मिनट की फिल्म कटौती पर जताया भारी गुस्सा। 'एनिमल' और 'कबीर सिंह' का उदाहरण देते हुए सोशल मीडिया पर सेंसर बोर्ड को घेरा। क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी खत्म हो रही है रचनात्मक आजादी? जानें क्यों 'धुरंधर' के अनकट वर्जन की मांग कर रहे हैं दर्शक और क्या है कानूनी पेंच।
सेंसरशिप की दोहरी मार—जब मनोरंजन की आजादी पर भारी पड़ी 'कैंची' की धार।
मुंबई | 30 जनवरी 2026
डिजिटल मनोरंजन की दुनिया में तब भारी आक्रोश फैल गया जब ब्लॉकबस्टर फिल्म 'धुरंधर' ने अपने ओटीटी प्रीमियर के साथ दर्शकों के बीच दस्तक दी। लेकिन यह दस्तक उम्मीदों के अनुरूप नहीं, बल्कि कड़े सेंसरशिप की भेंट चढ़ी हुई नजर आई। फिल्म के रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर 'Censorship On OTT' का मुद्दा गरमा गया है। प्रशंसकों का आरोप है कि फिल्म के महत्वपूर्ण संवादों को म्यूट कर दिया गया है और लगभग 10 मिनट के दृश्यों पर कैंची चला दी गई है, जिससे फिल्म की मूल आत्मा और प्रवाह पूरी तरह बाधित हो गया है। यह विवाद अब केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ओटीटी प्लेटफार्मों के लिए दोहरे मापदंडों की एक बड़ी बहस में तब्दील हो चुका है।
विवाद की जड़: क्या कटा और क्या बदला?
'धुरंधर' को लेकर सिनेमाघरों में जो उत्साह था, वह ओटीटी रिलीज के साथ ही ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। दर्शकों ने रिलीज के कुछ ही मिनटों के भीतर प्लेटफॉर्म पर अपनी नाराजगी व्यक्त करनी शुरू कर दी।
प्रशंसकों की नाराजगी के मुख्य कारण:
- कटे हुए दृश्य: फिल्म की लंबाई में लगभग 10 मिनट की कटौती की गई है। इसमें मुख्य रूप से वे हिंसक और इंटेंस दृश्य शामिल हैं जिन्होंने बड़े पर्दे पर खूब तालियां बटोरी थीं।
- म्यूट डायलॉग्स: फिल्म के कई पावरफुल और 'रॉ' डायलॉग्स के आपत्तिजनक शब्दों को बीप या म्यूट कर दिया गया है, जिससे सीन का प्रभाव खत्म हो गया है।
- सेंसरशिप के दोहरे मापदंड: फैंस का गुस्सा इस बात पर है कि 'एनिमल' और 'कबीर सिंह' जैसी फिल्मों को बिना किसी बड़े कट के ओटीटी पर स्ट्रीम किया गया था, तो 'धुरंधर' के साथ यह 'सौतेला' व्यवहार क्यों?
सोशल मीडिया पर 'बहिष्कार' की गूँज
ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर #DhurandharUncut और #JusticeForDhurandhar जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। प्रशंसकों का कहना है कि जब वे प्रीमियम सब्सक्रिप्शन के लिए पैसे देते हैं, तो उन्हें सेंसर किया हुआ कंटेंट क्यों दिखाया जा रहा है? कई यूजर्स ने तो यहाँ तक कह दिया कि 'सेंसर बोर्ड' को ओटीटी की स्वायत्तता में दखल नहीं देना चाहिए, क्योंकि यहाँ उम्र की पुष्टि (Age Verification) की व्यवस्था पहले से मौजूद है।
कानूनी और आधिकारिक पक्ष
वर्तमान में, भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म 'आईटी नियम 2021' (IT Rules 2021) के तहत स्व-नियमन (Self-Regulation) के दायरे में आते हैं। हालांकि, हाल के दिनों में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कंटेंट की निगरानी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। 'धुरंधर' के मामले में यह अभी स्पष्ट नहीं है कि कटौती ओटीटी प्लेटफॉर्म ने स्वयं की है या फिर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के किसी छिपे हुए दबाव में की गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ओटीटी प्लेटफॉर्म 'थिएट्रिकल वर्जन' (Theatrical Version) ही दिखाते हैं, तो उन्हें सीबीएफसी के सर्टिफिकेट का पालन करना अनिवार्य होता है, जो अक्सर डिजिटल स्पेस की आजादी को सीमित कर देता है।
फिल्म जगत पर प्रभाव
इस विवाद ने फिल्म निर्माताओं के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। निर्देशकों का तर्क है कि यदि ओटीटी पर भी सेंसरशिप इसी तरह हावी रही, तो रचनात्मकता के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। 'धुरंधर' के मेकर्स ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वे फिल्म का 'अनकट वर्जन' (Uncut Version) रिलीज करने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
'धुरंधर' को लेकर मचा यह बवाल इस बात का संकेत है कि आधुनिक दर्शक अब केवल मूक उपभोक्ता नहीं रह गया है; वह अपनी पसंद और रचनात्मक अखंडता के प्रति जागरूक है। यदि ओटीटी प्लेटफॉर्म और सेंसरशिप निकाय एक स्पष्ट नीति नहीं बनाते हैं, तो दर्शक और प्लेटफॉर्म के बीच का यह विश्वास संकट गहराता जाएगा। 'धुरंधर' की यह कटी-फटी रिलीज शायद डिजिटल क्रांति के दौर में सेंसरशिप के अंत की शुरुआत या फिर एक नई और सख्त पाबंदी का आगाज हो सकती है।

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