तेलुगु सिनेमा में अगर कॉमेडी के सबसे भरोसेमंद चेहरों की बात हो, तो अली का नाम सबसे पहले लिया जाता है। इन दिनों फिर से वह सोशल मीडिया और एंटरटेनमेंट जगत में चर्चा में हैं, क्योंकि उनकी पुरानी कॉमिक क्लिप्स, आइकॉनिक डायलॉग्स और टीवी शो के मजेदार मोमेंट्स इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रहे हैं। करीब 1000 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके अली सिर्फ एक कॉमेडियन नहीं, बल्कि तेलुगु इंडस्ट्री की ऐसी पहचान बन चुके हैं जिनकी मौजूदगी भर से सीन में जान आ जाती है। उनकी टाइमिंग, एक्सप्रेशन और देसी अंदाज ने उन्हें हर पीढ़ी का फेवरेट बना दिया।

आंध्र प्रदेश के राजामुंद्री में एक साधारण मुस्लिम परिवार में जन्मे अली का बचपन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। उनके पिता दर्जी थे और मां गृहिणी। छोटे से शहर से बड़े सपने लेकर निकले अली को फिल्मों तक पहुंचाने में राजामुंद्री की एक म्यूजिकल कंपनी ने अहम भूमिका निभाई। जब मशहूर निर्देशक भारती राजा अपनी फिल्म ‘सीताकोका चिलुका’ के लिए चाइल्ड आर्टिस्ट ढूंढ रहे थे, तब अली को मौका मिला और यहीं से उनकी जिंदगी बदल गई। बतौर बाल कलाकार उन्होंने कई फिल्मों में काम किया, लेकिन असली संघर्ष तब शुरू हुआ जब वह बड़े हो गए और चाइल्ड रोल मिलने बंद हो गए।

काफी स्ट्रगल के बाद अली ने कॉमेडी को अपना हथियार बनाया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। निर्देशक एस. वी. कृष्णा रेड्डी ने उन्हें ऐसे किरदार दिए जिन्होंने अली को स्टार कॉमेडियन बना दिया। ‘राजेंद्रुडु गजेंद्रुडु’ में उनका “एंधा चाटा” डायलॉग और कट्रावल्लि स्टाइल आज भी फैंस की जुबान पर रहता है। उनकी कॉमेडी सिर्फ मजाक तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसमें एक अलग देसी फ्लेवर और एनर्जी दिखी जिसने उन्हें बाकी कलाकारों से अलग पहचान दिलाई। यही वजह रही कि तेलुगु सिनेमा में उनका नाम एक ब्रांड बन गया।

सिर्फ फिल्मों तक ही नहीं, अली ने टीवी की दुनिया में भी जबरदस्त पहचान बनाई। ‘अली थो सरदागा’ जैसे शो ने उन्हें घर-घर तक पहुंचा दिया, जहां बड़े-बड़े सितारे उनके साथ खुलकर बातचीत करते नजर आए। उनकी होस्टिंग में एक अपनापन और मजाकिया अंदाज दिखता है जो दर्शकों को तुरंत कनेक्ट कर देता है। ‘जबर्दस्त’ जैसे पॉपुलर शो में जज बनकर भी उन्होंने खूब सुर्खियां बटोरीं। इसके अलावा विज्ञापनों में भी उनका चेहरा काफी लोकप्रिय रहा और वह कई ब्रांड्स के लिए पहचान बन गए।

अली की उपलब्धियां भी किसी सुपरस्टार से कम नहीं हैं। उन्हें दो नंदी अवॉर्ड और दो फिल्मफेयर साउथ अवॉर्ड मिल चुके हैं। ‘सीताकोका चिलुका’ के लिए बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट का सम्मान मिला, जबकि ‘अम्मा नन्ना ओ तमिला अम्मायी’ और ‘सुपर’ जैसी फिल्मों ने उन्हें बेस्ट कॉमेडियन के तौर पर नई ऊंचाई दी। खास बात यह है कि इतने लंबे करियर के बाद भी उनकी लोकप्रियता कम नहीं हुई। उनकी कॉमिक टाइमिंग आज भी नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए इंस्पिरेशन मानी जाती है।

फिल्मों और टीवी के अलावा अली ने राजनीति में भी कदम रखा था। साल 2019 में उन्होंने वाईएसआरसीपी जॉइन की और बाद में आंध्र प्रदेश सरकार में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एडवाइजर भी बने। हालांकि 2024 में उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली। लेकिन चाहे राजनीति हो, टीवी हो या फिल्में, अली हर जगह अपनी अलग पहचान छोड़ने में कामयाब रहे। यही वजह है कि आज भी जब तेलुगु कॉमेडी की बात होती है, तो अली का नाम सबसे ज्यादा सम्मान और प्यार के साथ लिया जाता है।

Pratahkal Newsroom

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