तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से ही सिनेमाई करिश्मे और वैचारिक जड़ों के अनूठे संगम के लिए जानी जाती रही है। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद सामने आए एग्जिट पोल के आंकड़ों ने एक बार फिर इस राज्य की सियासी बिसात पर हलचल पैदा कर दी है। विशेष रूप से एक्सिस माय इंडिया के निष्कर्षों ने राजनीतिक विश्लेषकों को स्तब्ध कर दिया है, जिसमें दक्षिण भारतीय फिल्मों के महानायक विजय की नवनिर्मित पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) को न केवल एक मजबूत विकल्प, बल्कि सत्ता के सबसे बड़े दावेदार के रूप में उभरते हुए दिखाया गया है। यह अनुमान उस समय आया है जब सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) अपने लगातार दूसरे कार्यकाल के जरिए एक नया रिकॉर्ड बनाने की उम्मीद कर रही थी।

एक्सिस माय इंडिया के विस्तृत एग्जिट पोल के आंकड़ों के अनुसार, 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 है। सर्वेक्षण के परिणाम बताते हैं कि अभिनेता विजय की TVK को 98 से 120 सीटें मिल सकती हैं, जो उन्हें बहुमत के बेहद करीब या उसके पार ले जा सकता है। इसके विपरीत, एम के स्टालिन के नेतृत्व वाले DMK गठबंधन को 92 से 100 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है, जबकि एनडीए गठबंधन 22 से 32 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है। सबसे चौंकाने वाला पहलू वोट प्रतिशत का है, जहां TVK को लगभग 35 फीसदी वोट मिलने की संभावना जताई गई है। यदि ये आंकड़े नतीजों में तब्दील होते हैं, तो यह द्रविड़ राजनीति के पारंपरिक गढ़ में एक ऐतिहासिक सेंधमारी होगी।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो विजय का यह राजनीतिक उत्थान दक्षिण भारत के दो महानतम नायकों, एम.जी. रामचंद्रन (MGR) और एन.टी. रामा राव (NTR) की याद दिलाता है। जिस तरह 1977 में एम.जी.आर. ने डीएमके से अलग होकर अपनी पार्टी एआईएडीएमके बनाई और सत्ता के शिखर पर पहुंचे, या जिस तरह 1982 में एन.टी.आर. ने तेलुगु गौरव के नाम पर मात्र नौ महीनों में कांग्रेस के वर्चस्व को खत्म कर दिया था, कुछ वैसा ही करिश्मा अब अभिनेता विजय के साथ जुड़ता दिख रहा है। विजय ने अपनी फिल्मों के जरिए 'गरीबों के हमदर्द' और एक 'सेक्युलर लीडर' की जो छवि गढ़ी है, उसने उन्हें युवाओं और शोषित वर्गों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है।

विजय की रणनीति उनके पूर्ववर्तियों से काफी प्रभावित नजर आती है। जहां एम.जी.आर. ने अपने विशाल प्रशंसक संघों (मक्कल इयक्कम) को चुनावी मशीनरी में बदला था, वहीं विजय ने भी अपने संगठन 'विजय मक्कल इयक्कम' का उपयोग करके जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विजय की सफलता का राज उनकी धर्मनिरपेक्ष और स्वतंत्र छवि है। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दलों के साथ गठबंधन न करके अपनी क्षेत्रीय पहचान को सर्वोपरि रखा। एग्जिट पोल के रुझानों के बाद विजय का शिरडी जाकर साईं बाबा के दर्शन करना भी उनकी आध्यात्मिक और व्यक्तिगत शैली को रेखांकित करता है, जो तमिलनाडु के मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को प्रभावित करता है।

हालांकि, अगर वास्तविक परिणाम इन अनुमानों से भिन्न रहते हैं और डीएमके सत्ता बरकरार रखने में सफल होती है, तो एम के स्टालिन अपने पिता एम. करुणानिधि का वह रिकॉर्ड तोड़ देंगे जिसमें वह कभी लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री नहीं बन पाए थे। इस चुनाव का महत्व केवल हार-जीत तक सीमित नहीं है; यह इस बात का निर्णय करेगा कि तमिलनाडु की राजनीति अब भी पारंपरिक द्रविड़ विचारधारा के इर्द-गिर्द घूमेगी या यह एक नए 'सुपरस्टार' युग की ओर प्रस्थान करेगी। यदि एग्जिट पोल सही साबित होते हैं, तो एक्टर विजय न केवल 'किंगमेकर' बल्कि 'किंग' की भूमिका में होंगे, जो भारतीय लोकतंत्र में सिनेमा और राजनीति के अटूट संबंध का एक नया अध्याय लिखेगा। आगामी मतगणना के परिणाम ही इस सियासी सस्पेंस का अंत करेंगे, लेकिन फिलहाल विजय ने भारतीय राजनीति के केंद्र में अपनी जगह बना ली है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story