कौन हैं तब्बू? हर किरदार में जान डालने वाली बॉलीवुड की सबसे रहस्यमयी स्टार
दो राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री तब्बू के फिल्मी सफर, शुरुआती संघर्ष और उनकी चुनिंदा बेहतरीन फिल्मों का विस्तृत विवरण।

भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री तब्बू जिन्होंने अपनी संजीदा अदाकारी और 'माचिस' जैसी फिल्मों के लिए दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल किया है।
Tabu आज भी बॉलीवुड की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं जिनका नाम आते ही लोगों के दिमाग में क्लास, इंटेंस एक्टिंग और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस की तस्वीर बन जाती है। इन दिनों वह फिर चर्चा में हैं क्योंकि एक तरफ उनकी फिल्में लगातार बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर रही हैं, तो दूसरी तरफ नई पीढ़ी भी उन्हें “रियल एक्टिंग क्वीन” कहकर सोशल मीडिया पर ट्रेंड करा रही है। ‘भूल भुलैया 2’, ‘दृश्यम 2’, ‘क्रू’ और ‘भूत बंगला’ जैसी फिल्मों ने साबित कर दिया कि तीन दशक बाद भी तब्बू का स्टारडम कम नहीं हुआ, बल्कि और ज्यादा मजबूत हो गया है।
4 नवंबर 1971 को हैदराबाद में जन्मीं तब्बू का असली नाम तबस्सुम फातिमा हाशमी है। उनका बचपन फिल्मों और पढ़ाई दोनों के माहौल में बीता। परिवार में शबाना आज़मी और तन्वी आज़मी जैसी कलाकारों की मौजूदगी ने उन्हें अभिनय की दुनिया के करीब जरूर रखा, लेकिन अपनी अलग पहचान उन्होंने खुद बनाई। बेहद कम उम्र में देव आनंद की फिल्म ‘हम नौजवान’ से कैमरे के सामने आने वाली तब्बू ने शुरुआत में काफी स्ट्रगल देखा। फिर 1994 में ‘विजयपथ’ आई और देखते ही देखते वह रातोंरात स्टार बन गईं। इसी फिल्म ने उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट डेब्यू अवॉर्ड दिलाया और बॉलीवुड को एक ऐसी अभिनेत्री मिली जो सिर्फ ग्लैमर नहीं, अभिनय से दिल जीतना जानती थी।
90 के दशक में तब्बू ने कमर्शियल और कंटेंट सिनेमा दोनों में ऐसा बैलेंस बनाया जो बहुत कम कलाकार कर पाते हैं। ‘जीत’, ‘साजन चले ससुराल’, ‘बॉर्डर’, ‘बीवी नं.1’, ‘हम साथ-साथ हैं’ और ‘हेरा फेरी’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में उन्होंने दर्शकों को एंटरटेन किया, वहीं ‘माचिस’, ‘विरासत’, ‘हु तू तू’, ‘अस्तित्व’ और ‘चांदनी बार’ जैसी फिल्मों में अपने गंभीर किरदारों से आलोचकों को भी चौंका दिया। ‘माचिस’ और ‘चांदनी बार’ के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला और यहीं से उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे ताकतवर अभिनेत्रियों में गिना जाने लगा। खास बात यह रही कि तब्बू ने कभी खुद को सिर्फ हीरोइन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि हर किरदार को अपनी पहचान बना दिया।
तब्बू की सबसे बड़ी ताकत उनका स्क्रीन पर रहस्यमयी और इमोशनल अंदाज माना जाता है। विशाल भारद्वाज की ‘मकबूल’ और ‘हैदर’ में उनका अभिनय आज भी एक्टिंग स्कूल की तरह देखा जाता है। ‘चीनी कम’ में अमिताभ बच्चन के साथ उनकी केमिस्ट्री हो या ‘अंधाधुन’ में उनका खतरनाक लेकिन आकर्षक किरदार, हर बार उन्होंने साबित किया कि उम्र और ट्रेंड से ऊपर सिर्फ टैलेंट चलता है। हॉलीवुड फिल्मों ‘द नेमसेक’ और ‘लाइफ ऑफ पाई’ में भी उन्होंने अपनी मौजूदगी से अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को प्रभावित किया। यही वजह है कि उन्हें सिर्फ बॉलीवुड स्टार नहीं, बल्कि ग्लोबल परफॉर्मर भी कहा जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि तब्बू अपनी निजी जिंदगी को हमेशा लाइमलाइट से दूर रखती हैं। उन्होंने शादी नहीं की और हमेशा खुलकर कहा कि जिंदगी को अपने तरीके से जीना उन्हें पसंद है। यही स्वतंत्र सोच उन्हें बाकी सितारों से अलग बनाती है। इंडस्ट्री में लोग उन्हें “एक्टरों की एक्टर” कहते हैं क्योंकि वह हर रोल को इतनी ईमानदारी से निभाती हैं कि दर्शक किरदार और असल जिंदगी के बीच फर्क ही भूल जाते हैं। पद्मश्री सम्मान, दो नेशनल अवॉर्ड और कई फिल्मफेयर अवॉर्ड जीत चुकी तब्बू आज भी नई अभिनेत्रियों के लिए इंस्पिरेशन हैं।
आज के दौर में जहां स्टारडम अक्सर सोशल मीडिया फॉलोअर्स से मापा जाता है, वहां तब्बू सिर्फ अपने काम से ट्रेंड करती हैं। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। चाहे कॉमेडी हो, थ्रिलर, रोमांस या इमोशनल ड्रामा, तब्बू हर शैली में खुद को साबित कर चुकी हैं। शायद इसी वजह से लोग उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे “टाइमलेस” अभिनेत्री कहते हैं, जिनकी एक्टिंग का जादू हर पीढ़ी पर बराबर चलता है।

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