कौन हैं सूर्या? साउथ सिनेमा के 'सिंघम' और करोड़ों दिलों की धड़कन!
तमिल सुपरस्टार सूर्या के संघर्ष, सामाजिक कार्यों और 'जय भीम' जैसी फिल्मों के जरिए मिली वैश्विक पहचान का विस्तृत विवरण।

दक्षिण भारतीय अभिनेता सूर्या, जिन्होंने अपनी अभिनय क्षमता और समाजसेवा के माध्यम से भारतीय सिनेमा में एक विशिष्ट स्थान बनाया है।
आज के दौर में जब भी भारतीय सिनेमा के सबसे दमदार और वर्सटाइल एक्टर्स की बात होती है, तो एक नाम हर किसी की जुबान पर सबसे पहले आता है और वो है सूर्या। चेन्नई में सरवनन शिवकुमार के रूप में जन्मे सूर्या ने महज एक स्टार के तौर पर नहीं, बल्कि एक बेहतरीन कलाकार के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। हाल ही में उनकी फिल्म 'रेट्रो' की जबरदस्त कामयाबी और 'कंगुवा' जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर उनकी चर्चा हर तरफ हो रही है। लोग सिर्फ उनकी एक्टिंग के ही नहीं, बल्कि उनके डाउन-टू-अर्थ स्वभाव और समाज के प्रति उनके योगदान के भी कायल हैं। सूर्या आज तमिल सिनेमा के सबसे महंगे और प्रभावशाली एक्टर्स में से एक हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत से साबित किया है कि विरासत से ज्यादा हुनर मायने रखता है।
सूर्या का फिल्मी सफर किसी रोलर कोस्टर राइड से कम नहीं रहा है। दिग्गज एक्टर शिवकुमार के बेटे होने के बावजूद उन्होंने शुरुआत में एक गारमेंट फैक्ट्री में काम किया और अपनी पहचान छिपाए रखी। उन्होंने १९९७ में 'नेरुक्कू नेर' से डेब्यू किया, लेकिन असली पहचान उन्हें २००१ में आई फिल्म 'नंदा' से मिली। शुरुआती संघर्षों में उन्हें डांस और एक्टिंग को लेकर काफी आलोचनाएं झेलनी पड़ीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद 'काखा काखा' की बड़ी कामयाबी और 'गजनी' में एक शॉर्ट टर्म मेमरी लॉस वाले प्रेमी के किरदार ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। उनकी फिल्म 'वारणम आयिरम' में पिता और बेटे की दोहरी भूमिका को आज भी भारतीय सिनेमा की बेहतरीन परफॉर्मेंस में गिना जाता है, जिसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत कर सिक्स-पैक एब्स भी बनाए थे।
सिर्फ कमर्शियल फिल्में ही नहीं, सूर्या ने 'जय भीम' और 'सूररई पोट्रु' जैसी फिल्मों के जरिए सामाजिक मुद्दों पर भी गहरी चोट की है। 'सूररई पोट्रु' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला, जो उनके करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ। 'सिंघम' ट्रिलॉजी में उनके एग्रेसिव पुलिस ऑफिसर वाले किरदार ने तो पूरे देश में धूम मचा दी थी, जिसे उत्तर भारत में भी खूब पसंद किया गया। इतना ही नहीं, 'विक्रम' फिल्म में उनका 'रोलेक्स' वाला छोटा सा कैमियो इतना वायरल हुआ कि आज भी फैंस उनके उस खूंखार विलेन वाले लुक के दीवाने हैं। वह हर किरदार में इस कदर ढल जाते हैं कि दर्शकों को लगता ही नहीं कि वे पर्दे पर किसी एक्टर को देख रहे हैं।
सूर्या की पर्सनल लाइफ और उनकी समाजसेवा भी उतनी ही प्रभावशाली है। २००६ में उन्होंने अपनी सह-कलाकार और मशहूर एक्ट्रेस ज्योतिका से शादी की, और यह जोड़ी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे पसंदीदा जोड़ियों में से एक है। फिल्मों के अलावा, सूर्या अपनी 'अग्रम फाउंडेशन' के जरिए हजारों गरीब बच्चों की शिक्षा का जिम्मा उठाते हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी फिल्म 'रेट्रो' के मुनाफे से १० करोड़ रुपये अपनी संस्था को दान किए हैं। वे सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक जागरूक नागरिक भी हैं जो शिक्षा नीति और नीट जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करने से पीछे नहीं हटते।
आज सूर्या का प्रभाव सिर्फ तमिलनाडु तक सीमित नहीं है, बल्कि वे ऑस्कर अकादमी का हिस्सा बनने वाले पहले दक्षिण भारतीय अभिनेता बने हैं। फोर्ब्स इंडिया की सेलिब्रिटी १०० लिस्ट में कई बार शामिल होने वाले सूर्या को उनकी वर्सटैलिटी के कारण अक्सर कमल हासन का उत्तराधिकारी माना जाता है। चाहे वह '७ ओम अरिवु' में बोधिधर्म का किरदार हो या '२४' में विलेन आत्रेय की ट्रिपल भूमिका, सूर्या ने हर बार अपनी सीमा को लांघा है। यही वजह है कि आज बच्चा हो या बड़ा, हर कोई सूर्या की अगली फिल्म का बेसब्री से इंतजार करता है और उनकी हर मूव सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगती है।

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