हिंदी सिनेमा के जाने-माने निर्देशक और अभिनेता अनुराग कश्यप की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सोशल मीडिया पर एक वर्ग के खिलाफ की गई टिप्पणी और कोर्ट में पेश न होने के कारण गुजरात की एक अदालत ने उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सूरत शहर की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने सोमवार को उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया है।

कोर्ट में पेश न होने पर अदालत की सख्त कार्रवाई

सूरत की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जेवी चौहान की अदालत ने 54 वर्षीय फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई अदालत द्वारा पूर्व में जारी किए गए समन का पालन न करने और तारीख पर उपस्थित न होने के कारण की गई है।

अदालत ने अनुराग कश्यप को न्यायिक कार्यवाही के तहत समन भेजे थे। जब वे पेश नहीं हुए, तो अदालत के निर्देश पर एक प्रमुख समाचार पत्र के जरिए सार्वजनिक समन भी प्रकाशित कराया गया था। इसके बावजूद, सोमवार को सुनवाई के दौरान कश्यप या उनका कोई प्रतिनिधि कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ। इसी के बाद अदालत ने जमानती वारंट जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 24 दिसंबर के लिए तय कर दी है।

क्या होता है जमानती वारंट?

मामले से जुड़े वकील कमलेश रावल ने न्यायिक प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जमानती वारंट एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके तहत यदि आरोपी व्यक्ति अदालत द्वारा तय की गई जमानत राशि और शर्तें पूरी कर देता है, तो उसे रिहा किया जा सकता है।

रावल ने बताया कि शुरुआत में अनुराग कश्यप की अदालत में भौतिक उपस्थिति और सत्यापन के लिए अर्जी दी गई थी। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने प्रक्रिया शुरू की और समन जारी किया। बार-बार समन और अखबार में विज्ञापन के जरिए नोटिस दिए जाने के बाद भी जब वे अदालत में हाजिर नहीं हुए, तब जाकर कोर्ट ने वारंट जारी करने का कदम उठाया है।

किस मामले में और किन धाराओं के तहत दर्ज है केस?

यह पूरा मामला मई महीने का है, जब हिंदुत्व संगठनों (बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद) के कानूनी सलाहकार वकील कमलेश रावल की ओर से एक आवेदन दाखिल किया गया था। इस आवेदन पर सुनवाई करते हुए सूरत कोर्ट ने अनुराग कश्यप के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे:

  • धारा 192: विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी और वैमनस्य को बढ़ावा देना।
  • धारा 352: शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर किसी का अपमान करना।
  • धारा 352 (2): झूठी अफवाहें फैलाना या ऐसे बयान देना जिससे जनता में असंतोष फैले।
  • विवाद की शुरुआत: 'फुले' फिल्म और सोशल मीडिया पोस्ट

विवाद की शुरुआत 16 अप्रैल 2025 को अनुराग कश्यप द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर की गई एक पोस्ट से हुई थी।

  • फिल्म 'फुले' पर आपत्ति: हिंदी फिल्म 'फुले' का ट्रेलर जारी होने के बाद 'अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज' और 'विप्र सेना' नामक संगठनों ने फिल्म के कुछ हिस्सों और दृश्यों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
  • सोशल मीडिया पर बहस: अनुराग कश्यप ने इन आपत्तियों के जवाब में सोशल मीडिया पर एक संदेश पोस्ट किया।
  • कमेंट्स और टिप्पणी: याचिकाकर्ता के अनुसार, जब आदित्य नाम के एक व्यक्ति ने कश्यप की पोस्ट पर आपत्ति जताई, तो कश्यप ने गुस्से में प्रतिक्रिया दी और पूछा, "ब्राह्मण होकर तुमने क्या हासिल कर लिया?"

याचिकाकर्ता के दावे और आरोप

अदालत में दायर अर्जी में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि फिल्म निर्माता के इस बयान और टिप्पणी से पूरे ब्राह्मण समुदाय की छवि धूमिल हुई है।

  • समुदाय का अपमान: याचिकाकर्ता का दावा है कि कश्यप ने इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करके ब्राह्मण समुदाय को नीचा दिखाने का काम किया है।
  • सद्भाव बिगड़ने का खतरा: याचिकाकर्ता का तर्क है कि अनुराग कश्यप एक प्रसिद्ध अभिनेता, निर्देशक और निर्माता हैं, जिनकी फिल्मों और बयानों का समाज के हर वर्ग पर असर पड़ता है। ऐसे में उनके बयानों से देश में अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ने का खतरा है और यह राष्ट्रीय एकता तथा शांति व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

विवाद के बाद अनुराग कश्यप ने मांगी थी माफी

सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी के बाद जब विवाद बहुत ज्यादा बढ़ गया था, तब फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने सार्वजनिक रूप से ब्राह्मण समुदाय से माफी मांग ली थी।

उन्होंने स्वीकार किया था कि किसी यूजर को गुस्से में जवाब देते समय उनसे मर्यादा लांघ गई थी और उन्होंने अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया था। हालांकि, माफी मांगने के बावजूद यह मामला कानूनी प्रक्रिया में पहुंच गया और अब समन की अनदेखी करने पर अदालत ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया है। अब सभी की नजरें 24 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं कि अनुराग कश्यप कोर्ट के इस आदेश पर क्या कदम उठाते हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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