आजकल मलयालम सिनेमा की बात हो और सूरज वेंजारामूडू का नाम ना आए, ऐसा होना मुश्किल है। कभी अपनी कॉमिक टाइमिंग से लोगों को पेट पकड़कर हंसाने वाले सूरज अब ऐसे अभिनेता बन चुके हैं जिनकी फिल्मों का इंतजार दर्शक गंभीर कलाकार की तरह करते हैं। सोशल मीडिया पर उनके पुराने कॉमेडी क्लिप्स से लेकर ‘द ग्रेट इंडियन किचन’ और ‘विक्रुथि’ जैसी फिल्मों के सीन लगातार वायरल हो रहे हैं। यही वजह है कि एक समय सिर्फ कॉमेडियन समझे जाने वाले सूरज आज मलयालम इंडस्ट्री के सबसे बहुमुखी कलाकारों में गिने जाते हैं।

30 जून 1976 को केरल के तिरुवनंतपुरम के वेंजारामूडू में जन्मे सूरज का असली नाम सूरज वासुदेवन है। उनके पिता भारतीय सेना में थे और खुद सूरज भी आर्मी जॉइन करना चाहते थे, लेकिन एक साइकिल हादसे में हाथ टूटने के बाद उनका सपना अधूरा रह गया। इसके बाद उन्होंने मैकेनिकल डिप्लोमा किया, लेकिन किस्मत उन्हें मिमिक्री की दुनिया में ले गई। टीवी शो ‘जगापोका’ ने उन्हें पहली बड़ी पहचान दिलाई। अपने खास तिरुवनंतपुरम एक्सेंट और मजेदार मिमिक्री स्टाइल से उन्होंने जल्दी ही दर्शकों के दिल जीत लिए। हालांकि शुरुआत में उनके इसी अंदाज की आलोचना भी हुई, लेकिन सूरज ने हार नहीं मानी।

फिल्मों में उनका शुरुआती सफर आसान नहीं था। ‘रासिकन’, ‘अचुविन्टे अम्मा’ और ‘बस कंडक्टर’ जैसी फिल्मों में छोटे-छोटे रोल करने वाले सूरज की किस्मत तब बदली जब उन्होंने ममूटी के साथ ‘राजामाणिक्यम’ में काम किया। इसके बाद ‘थुरुप्पुगुलान’, ‘मायावी’, ‘क्लासमेट्स’, ‘चोट्टा मुंबई’ और ‘हैलो’ जैसी फिल्मों में उनकी कॉमेडी ने ऐसा असर छोड़ा कि वह मलयालम सिनेमा के सबसे भरोसेमंद कॉमिक स्टार बन गए। ‘दशमूलम दामू’ और ‘इडिवेट्टू सुगुनन’ जैसे उनके किरदार आज भी मीम कल्चर का हिस्सा हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने तीन बार केरल स्टेट अवॉर्ड में बेस्ट कॉमेडियन का खिताब जीता।

लेकिन असली गेम चेंजर बना साल 2013। फिल्म ‘पेरारियाथावर’ में एक शांत और संवेदनशील किरदार निभाकर सूरज ने सबको चौंका दिया। इस फिल्म के लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट एक्टर का सम्मान मिला। यह वही अभिनेता था जिसे लोग सिर्फ कॉमेडी तक सीमित मानते थे। इसके बाद ‘थोंडिमुथालुम द्रिक्साक्षियुम’, ‘विक्रुथि’, ‘एंड्रॉयड कुंजप्पन वर्जन 5.25’ और ‘ड्राइविंग लाइसेंस’ जैसी फिल्मों ने साबित कर दिया कि सूरज हर तरह के किरदार में जान डाल सकते हैं। ‘द ग्रेट इंडियन किचन’ में उनकी परफॉर्मेंस ने पूरे देश में चर्चा बटोरी और उन्हें पैन इंडिया पहचान दिलाई।

करीब 250 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके सूरज वेंजारामूडू आज सिर्फ अभिनेता नहीं बल्कि मलयालम सिनेमा की एक मजबूत पहचान बन चुके हैं। कॉमेडी, इमोशन, सोशल ड्रामा और इंटेंस किरदार, उन्होंने हर जगह खुद को साबित किया है। एशियानेट फिल्म अवॉर्ड्स से लेकर साउथ इंडियन इंटरनेशनल मूवी अवॉर्ड्स तक, उनके नाम दर्जनों सम्मान हैं। दिलचस्प बात यह है कि इतने बड़े स्टार बनने के बावजूद उनका देसी अंदाज और जमीन से जुड़ी पर्सनैलिटी आज भी लोगों को पसंद आती है। हाल के सालों में उनके निजी जीवन से जुड़ी कुछ खबरें भी चर्चा में रहीं, लेकिन फैंस की नजरों में उनकी लोकप्रियता जरा भी कम नहीं हुई।

आज सूरज वेंजारामूडू उस कलाकार का नाम हैं जिसने साबित किया कि टैलेंट सिर्फ हंसाने तक सीमित नहीं होता। एक स्टैंड-अप कॉमेडियन से नेशनल अवॉर्ड विनर अभिनेता बनने तक का उनका सफर संघर्ष, मेहनत और लगातार खुद को बदलने की मिसाल है। यही वजह है कि आज हर कोई जानना चाहता है कि आखिर सूरज वेंजारामूडू इतने खास क्यों हैं।

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Pratahkal Newsroom

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