'80 साल लड़ने की उम्र नहीं'- संजय कपूर की संपत्ति पर छिड़ा घमासान, अदालत ने बुजुर्ग मां को दी नसीहत।
सर्वोच्च न्यायालय ने 80 वर्षीय रानी कपूर को मध्यस्थता की सलाह देते हुए कहा कि यह उम्र कानूनी लड़ाई लड़ने की नहीं है और प्रिया कपूर से जवाब मांगा है।

संजय कपूर का परिवार; मृत्यु के बाद मां रानी और पत्नी प्रिया के बीच संपत्ति विवाद।
संजय कपूर संपत्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने रानी कपूर को दी मध्यस्थता की सलाह, प्रिया कपूर को नोटिस जारी
नई दिल्ली: उद्योगपति संजय कपूर के असामयिक निधन के एक वर्ष पश्चात उनके परिवार के भीतर छिड़ी संपत्ति की जंग अब देश की शीर्ष अदालत की दहलीज तक पहुंच गई है। करोड़ों डॉलर की इस विरासत को लेकर छिड़े कानूनी संग्राम में नया मोड़ तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने संजय कपूर की 80 वर्षीय माता रानी कपूर को कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर कानूनी लड़ाइयां लड़ने के बजाय मध्यस्थता का रास्ता चुनना अधिक श्रेयस्कर है। यह विवाद न केवल कपूर परिवार की आंतरिक कलह को उजागर करता है, बल्कि भारतीय कॉर्पोरेट जगत के प्रतिष्ठित परिवारों में उत्तराधिकार को लेकर होने वाले जटिल संघर्षों की ओर भी संकेत करता है।
इस हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई की जड़ें संजय कपूर की लंदन में हुई मृत्यु के बाद से गहरी होती गईं। विवाद की शुरुआत तब हुई जब संजय कपूर की पूर्व पत्नी और बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर ने अपने दोनों बच्चों, समायरा और कियान कपूर के अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी तीसरी पत्नी प्रिया कपूर के खिलाफ उत्तराधिकार का मुकदमा दायर किया। इसके पश्चात, पारिवारिक समीकरण तब और उलझ गए जब रानी कपूर ने भी अपनी बहू प्रिया कपूर के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। रानी कपूर ने आरोप लगाया है कि अक्टूबर 2017 में गठित 'सोना ग्रुप फैमिली ट्रस्ट' पूरी तरह से जाली और धोखाधड़ी का परिणाम है, जिसका उद्देश्य उन्हें उनके न्यायसंगत अधिकारों और पैतृक संपत्ति से वंचित करना है।
सोमवार को न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। पीठ ने रानी कपूर की याचिका पर प्रिया कपूर और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने रानी कपूर के वकील को संबोधित करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि 80 वर्ष की आयु संघर्ष करने के लिए नहीं होती। अदालत ने जोर देकर कहा कि यदि पक्षकार मध्यस्थता के माध्यम से बीच का रास्ता नहीं निकालते हैं, तो यह पूरी कानूनी प्रक्रिया व्यर्थ साबित हो सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 मई के लिए निर्धारित की है, जिससे यह स्पष्ट है कि न्यायालय इस विवाद का त्वरित और शांतिपूर्ण समाधान चाहता है।
रानी कपूर का पक्ष रखते हुए उनके वकीलों ने दावा किया कि जब वह 2017 में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और स्ट्रोक से उबर रही थीं, तब उन पर दबाव बनाकर खाली कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए थे। उनका आरोप है कि उनके दिवंगत बेटे संजय कपूर और प्रिया कपूर ने उनकी शारीरिक और मानसिक कमजोरी का फायदा उठाते हुए संपत्ति को फैमिली ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दिया। रानी कपूर ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को भी चुनौती दी है जिसमें संपत्ति को फ्रीज करने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। उनका मुख्य तर्क यह है कि जब तक संपत्ति के असली मालिक का निर्धारण नहीं हो जाता, तब तक परिवार को उसे खर्च करने से रोका जाना चाहिए।
दूसरी ओर, प्रिया कपूर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए जवाबी कानूनी कार्रवाई की है। उन्होंने अपनी ननद मंधिरा के विरुद्ध मानहानि का आपराधिक मुकदमा दायर किया है। प्रिया का दावा है कि विभिन्न पॉडकास्ट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के उद्देश्य से भ्रामक और अपमानजनक टिप्पणियां की गई हैं। पटियाला हाउस कोर्ट में चल रहे इस मानहानि मामले में प्रिया के वकीलों का तर्क है कि रानी कपूर द्वारा लगाए गए आरोप कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा होने के बजाय उन्हें सार्वजनिक रूप से बदनाम करने का एक षड्यंत्र मात्र हैं।
अन्ततः, यह मामला केवल एक व्यापारिक घराने की संपत्ति का विवाद नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक रिश्तों के विखंडन और कानूनी दांव-पेंचों की एक लंबी दास्तान है। सुप्रीम कोर्ट की हस्तक्षेप और मध्यस्थता की सलाह यह स्पष्ट करती है कि करोड़ों की इस दौलत के पीछे मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक शांति की भारी कीमत चुकाई जा रही है। अब सभी की निगाहें 7 मई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि कपूर परिवार कोर्ट के सुझाव को मानकर आपसी सहमति की ओर कदम बढ़ाता है या यह कानूनी गतिरोध और लंबा खिंचता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
