क्रैश डाइटिंग ने ली थी सुनैना रोशन की जान, टीबी मेनिनजाइटिस ने दी थी पैरालिसिस की चेतावनी
क्या क्रैश डाइटिंग किसी की जान ले सकती है? ऋतिक रोशन की बहन सुनैना रोशन ने 2001 के उस खौफनाक दौर का खुलासा किया, जब एक छोटी सी गलती उन्हें कोमा और पैरालिसिस की कगार पर ले आई थी। आखिर कैसे उन्होंने मौत को मात दी? पढ़ें पूरी कहानी।

तस्वीर में अभिनेता ऋतिक रोशन अपनी बहन सुनैना रोशन के साथ दिख रहे हैं। सुनैना ने हाल ही में 2001 में क्रैश डाइट से हुई गंभीर बीमारी के बारे में बताया।
बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन की बहन सुनैना रोशन ने हाल ही में अपने जीवन के एक अत्यंत कठिन दौर का खुलासा किया है, जिसने स्वास्थ्य के प्रति लोगों की सोच को झकझोर कर रख दिया है। सुनैना ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से बताया कि वर्ष 2001 में एक 'क्रैश डाइट' के प्रति उनके जुनून ने उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को बुरी तरह नष्ट कर दिया था, जिसके घातक परिणाम स्वरूप उन्हें टीबी मेनिनजाइटिस (tuberculosis meningitis) जैसी जानलेवा बीमारी का सामना करना पड़ा। सुनैना के अनुसार, यह स्थिति इतनी गंभीर थी कि चिकित्सकों ने उन्हें पैरालिसिस, दृष्टि खोने या कोमा में जाने की स्पष्ट चेतावनी दी थी।
इस भयावह स्वास्थ्य संकट को याद करते हुए सुनैना ने बताया कि उन्हें एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था और उसके बाद भी चार महीने तक घर पर ही रिकवरी के लिए कड़े चिकित्सीय निर्देशों का पालन करना पड़ा। उन्होंने खुलासा किया कि स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीमारी के चरम पर दो से तीन दिनों तक वह पूरी तरह अचेत अवस्था में थीं। उनके पिता राकेश रोशन और माता पिंकी रोशन ने भी इस कठिन समय को याद करते हुए सुनैना के साहस की सराहना की है। उनकी माता ने बताया कि डॉ. फारुख उडवाडिया ने उनके बचने की पुष्टि तीन सप्ताह के संघर्ष के बाद की थी।
सुनैना का यह संदेश समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि शारीरिक फिटनेस की अंधी दौड़ में शॉर्टकट अपनाना कितना जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी स्वास्थ्य लक्ष्य जीवन से बढ़कर नहीं होता और सही पोषण ही रिकवरी का एकमात्र स्थायी मार्ग है। अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने अपने फॉलोअर्स से अपील की है कि वे 'क्रैश डाइटिंग' के बजाय धैर्य और संतुलित पोषण को प्राथमिकता दें। यह घटना न केवल रोशन परिवार के लिए एक व्यक्तिगत त्रासदी थी, बल्कि एक महत्वपूर्ण जीवन सीख भी है, जो स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता और सावधानी बरतने का आह्वान करती है।

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