आज जब भी दमदार कंटेंट, इमोशनल स्टोरीटेलिंग और रियल लाइफ इंस्पिरेशन की बात होती है, तो Sudha Kongara का नाम सबसे आगे दिखाई देता है। सोशल मीडिया पर उनकी फिल्मों की चर्चा लगातार हो रही है और खासकर “सूररई पोटरु” और “सर्फिरा” के बाद वह पूरे देश में एक अलग पहचान बना चुकी हैं। एक ऐसी डायरेक्टर जिन्होंने बड़े स्टार्स से ज्यादा अपनी कहानी की ताकत पर भरोसा किया और साबित कर दिया कि अच्छी स्क्रिप्ट ही असली सुपरस्टार होती है। आज हर कोई जानना चाहता है कि आखिर ये महिला फिल्ममेकर कौन हैं जिन्होंने तमिल, तेलुगु और हिंदी सिनेमा में अपनी अलग दुनिया बना ली।

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में जन्मीं सुधा कोंगरा का बचपन चेन्नई में बीता। हिस्ट्री और मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई करने वाली सुधा ने शुरुआत में फिल्मों में राइटिंग का काम किया। उन्होंने अंग्रेजी फिल्म “मित्र, माई फ्रेंड” के लिए स्क्रीनराइटर के तौर पर काम किया, लेकिन असली सीख उन्हें मिली दिग्गज निर्देशक Mani Ratnam के साथ सात साल तक असिस्टेंट डायरेक्टर रहते हुए। वहीं से उन्होंने समझा कि सिनेमा सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं बल्कि इमोशन और समाज की आवाज भी हो सकता है।

सुधा कोंगरा ने डायरेक्टर के तौर पर पहला कदम तेलुगु फिल्म “आंध्र अंधगाडु” से रखा, लेकिन उन्हें असली पहचान मिली “इरुधि सुट्रु” से, जिसे हिंदी में “साला खड़ूस” के नाम से रिलीज किया गया। इस फिल्म में R. Madhavan और Ritika Singh की जोड़ी ने बॉक्सिंग की दुनिया को इतने रॉ और इमोशनल अंदाज में दिखाया कि दर्शक दंग रह गए। इस फिल्म ने सुधा को बेस्ट डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया और साबित कर दिया कि वह सिर्फ कमर्शियल नहीं बल्कि कंटेंट ड्रिवन सिनेमा की मास्टर हैं। बाद में उन्होंने इसका तेलुगु रीमेक “गुरु” भी बनाया जिसमें Venkatesh Daggubati नजर आए।

लेकिन सुधा कोंगरा का असली तूफान आया “सूररई पोटरु” के साथ। Suriya स्टारर इस फिल्म ने ओटीटी पर रिलीज होकर भी इतिहास रच दिया। एयर डेक्कन के फाउंडर कैप्टन जी.आर. गोपीनाथ की जिंदगी से इंस्पायर्ड इस फिल्म ने आम आदमी के सपनों को इतनी ताकत से दिखाया कि लोग भावुक हो गए। फिल्म को शंघाई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के पैनोरमा सेक्शन में जगह मिली और नेशनल अवॉर्ड्स में पांच बड़े सम्मान अपने नाम किए। खुद सुधा को बेस्ट स्क्रीनप्ले के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला। यही वजह है कि आज उन्हें इंडियन सिनेमा की सबसे दमदार महिला डायरेक्टर्स में गिना जाता है।

कोविड के दौर में जब थिएटर इंडस्ट्री संघर्ष कर रही थी, तब सुधा ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपनी पकड़ साबित की। “पावा कधैगल” और “पुथम पुधु कालई” जैसे प्रोजेक्ट्स में उनका काम खूब सराहा गया। इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्म “सर्फिरा” बनाई जिसमें Akshay Kumar लीड रोल में नजर आए। अब उनकी फिल्म “पराशक्ति” भी लगातार चर्चा में बनी हुई है। तमिलनाडु के एंटी हिंदी प्रोटेस्ट की बैकड्रॉप पर बनी इस फिल्म में Sivakarthikeyan, Ravi Mohan और Sreeleela जैसे सितारे दिखाई दिए। फिल्म को लेकर मिले-जुले रिएक्शन जरूर आए, लेकिन सुधा की बोल्ड स्टोरीटेलिंग की तारीफ हर तरफ हुई।

आज सुधा कोंगरा सिर्फ एक डायरेक्टर नहीं बल्कि नई सोच वाले भारतीय सिनेमा की पहचान बन चुकी हैं। उनकी फिल्मों में स्ट्रगल है, इमोशन है, समाज की सच्चाई है और सबसे बड़ी बात, इंसानी सपनों की उड़ान है। यही कारण है कि हर नई फिल्म के साथ उनका नाम ट्रेंड करने लगता है और लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं कि इस बार सुधा कौन सी कहानी पर्दे पर लेकर आने वाली हैं।

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Pratahkal Newsroom

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