कौन हैं एस. एस. राजामौली? बाहुबली और आरआरआर से दुनिया जीतने वाले मास्टरमाइंड
निर्देशक एस. एस. राजामौली ने बाहुबली और आरआआर के जरिए भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाई है और अब वे महेश बाबू के साथ नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।

फिल्म निर्देशक एस. एस. राजामौली एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपनी फिल्म के विजन और भारतीय सिनेमा के बदलते स्वरूप पर चर्चा करते हुए।
आज अगर भारतीय सिनेमा की बात होती है तो एक नाम हर जगह गूंजता है और वो है S. S. Rajamouli। सोशल मीडिया से लेकर हॉलीवुड तक, हर कोई उनके विज़न, भव्यता और कहानी कहने के अंदाज़ का दीवाना है। “बाहुबली” और “आरआरआर” जैसी फिल्मों ने सिर्फ बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड नहीं तोड़े, बल्कि भारतीय सिनेमा की पहचान पूरी दुनिया में बदल दी। राजामौली अब सिर्फ तेलुगु सिनेमा के निर्देशक नहीं रहे, बल्कि वो ग्लोबल फिल्ममेकिंग का ऐसा चेहरा बन चुके हैं जिनकी हर नई फिल्म का इंतज़ार करोड़ों लोग करते हैं।
10 अक्टूबर 1973 को जन्मे राजामौली का बचपन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। उनका परिवार कभी बेहद संपन्न था, लेकिन वक्त ने ऐसा पलटा मारा कि पूरा परिवार आर्थिक संकट में आ गया। चेन्नई के एक छोटे से दो कमरे के फ्लैट में 13 लोग साथ रहते थे। इसी संघर्ष ने राजामौली को मेहनत, परफेक्शन और कहानी की ताकत सिखाई। बचपन में उनकी दादी ने उन्हें रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाईं, जबकि उनके पिता विजयेंद्र प्रसाद ने कॉमिक्स और फिल्मों की दुनिया से परिचय कराया। शायद यही वजह है कि उनकी फिल्मों में इतिहास, पौराणिकता और बड़े-बड़े इमोशन्स का इतना जबरदस्त मेल दिखाई देता है।
राजामौली ने अपने करियर की शुरुआत टीवी सीरियल और विज्ञापनों से की थी। “स्टूडेंट नंबर 1” से उन्होंने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। “सिम्हाद्री”, “स्ये”, “छत्रपति”, “विक्रमार्कुडु” और “यमाडोंगा” जैसी फिल्मों ने उन्हें तेलुगु सिनेमा का बड़ा नाम बना दिया। लेकिन असली धमाका “मगधीरा” से हुआ, जिसने उस दौर में विजुअल इफेक्ट्स और बड़े स्केल की फिल्ममेकिंग को नई पहचान दी। इसके बाद “ईगा” जैसी फिल्म बनाकर उन्होंने साबित कर दिया कि अगर कहानी दमदार हो तो एक मक्खी भी सुपरस्टार बन सकती है।
फिर आया वो दौर जिसने भारतीय सिनेमा का इतिहास बदल दिया। “बाहुबली: द बिगिनिंग” और “बाहुबली 2” ने भारत में पैन इंडिया फिल्मों का नया युग शुरू किया। करोड़ों दर्शक इस सवाल में डूब गए थे कि “कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?” और यही क्रेज राजामौली को देश का सबसे बड़ा निर्देशक बना गया। “बाहुबली 2” पहली भारतीय फिल्म बनी जिसने 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की। इसके बाद “आरआरआर” ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया। फिल्म के गाने “नाटू नाटू” ने ऑस्कर जीतकर इतिहास रच दिया और राजामौली को न्यूयॉर्क फिल्म क्रिटिक्स सर्कल अवॉर्ड जैसे इंटरनेशनल सम्मान दिलाए। टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में भी शामिल किया।
राजामौली की सबसे बड़ी ताकत उनकी कहानी कहने की शैली है। उनकी फिल्मों में हीरो सिर्फ इंसान नहीं लगता, बल्कि एक दंतकथा जैसा महसूस होता है। बड़े-बड़े एक्शन सीक्वेंस, भावनाओं से भरे किरदार और शानदार विजुअल्स उनकी पहचान बन चुके हैं। वो हर सीन को इतने डिटेल में डिजाइन करते हैं कि हॉलीवुड तक उनके काम की तारीफ करता है। उनकी फिल्मों ने साउथ सिनेमा को नॉर्थ इंडिया और इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंचाने में बहुत बड़ा रोल निभाया है। आज के कई बड़े निर्देशक खुलकर कहते हैं कि राजामौली ने उन्हें बड़े सपने देखने की हिम्मत दी।
फिलहाल राजामौली अपनी अगली मेगा फिल्म “वाराणसी” पर काम कर रहे हैं, जिसमें Mahesh Babu नजर आने वाले हैं। बताया जा रहा है कि ये एक ग्लोबट्रॉटिंग एडवेंचर फिल्म होगी जिसमें भारतीय जड़ों के साथ इंटरनेशनल अंदाज़ देखने को मिलेगा। इसके अलावा उनका ड्रीम प्रोजेक्ट “महाभारत” भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। राजामौली साफ कह चुके हैं कि वो इस कहानी को दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म सीरीज़ बनाना चाहते हैं। यही वजह है कि आज हर कोई पूछ रहा है — आखिर एस. एस. राजामौली आगे क्या धमाका करने वाले हैं?

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