इन दिनों अगर बॉलीवुड में किसी निर्देशक की सबसे अलग और रहस्यमयी सिनेमाई दुनिया की बात होती है, तो उसमें Sriram Raghavan का नाम सबसे ऊपर आता है। उनकी फिल्मों का मतलब सिर्फ कहानी नहीं, बल्कि ऐसा अनुभव होता है जहां हर सीन के बाद दर्शक अगला ट्विस्ट सोचने लगते हैं। “अंधाधुन” जैसी फिल्म ने उन्हें सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी पहचान दिलाई। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर आज भी उनके सिनेमा की चर्चा होती है और लोग उन्हें बॉलीवुड का “नियो-नोयर मास्टर” कहते हैं।

मुंबई में जन्मे श्रीराम राघवन का बचपन पुणे में बीता। उनके पिता बॉटनिस्ट थे, जबकि मां फिल्मों की बड़ी शौकीन थीं। शायद वहीं से फिल्मों के लिए उनका प्यार शुरू हुआ। उन्होंने पुणे के एफटीआईआई से पढ़ाई की, जहां उनके बैचमेट Rajkumar Hirani ने उनकी स्टूडेंट फिल्म “द एट कॉलम अफेयर” को एडिट किया था। यही फिल्म आगे चलकर नेशनल अवॉर्ड जीत गई और इंडस्ट्री को एक ऐसे फिल्ममेकर का नाम मिला जो आगे जाकर थ्रिलर सिनेमा की परिभाषा बदलने वाला था।

श्रीराम राघवन ने शुरुआत में टीवी और डॉक्यूमेंट्री की दुनिया में काम किया। “रमन राघव” जैसी डॉक्यूमेंट्री और “सीआईडी” व “आहट” जैसे शोज़ के लिए लिखते हुए उन्होंने सस्पेंस की बारीकियां सीखी। फिर उनकी मुलाकात Ram Gopal Varma से हुई और यहीं से उनकी फिल्मी कहानी ने बड़ा मोड़ लिया। साल 2004 में आई “एक हसीना थी” ने साबित कर दिया कि हिंदी सिनेमा में भी हॉलीवुड स्तर का डार्क थ्रिल बनाया जा सकता है। इसके बाद “जॉनी गद्दार” आई, जो बॉक्स ऑफिस पर भले कमाल नहीं कर पाई, लेकिन बाद में उसे कल्ट क्लासिक का दर्जा मिला। आज भी फिल्म स्कूलों में उसकी स्क्रीनप्ले और स्टाइल की चर्चा होती है।

हालांकि “एजेंट विनोद” उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, लेकिन श्रीराम राघवन ने वापसी ऐसी की कि पूरी इंडस्ट्री हैरान रह गई। “बदलापुर” में उन्होंने Varun Dhawan का ऐसा डार्क अवतार दिखाया जिसे किसी ने पहले नहीं देखा था। फिल्म की हिंसा, इमोशन और बदले की कहानी ने दर्शकों को झकझोर दिया। इसके बाद आया उनका सबसे बड़ा मास्टरपीस “अंधाधुन”, जिसमें Ayushmann Khurrana, Tabu और Radhika Apte ने ऐसा खेल खेला कि हर दर्शक अंत तक उलझा रहा। फिल्म ने दुनिया भर में ताबड़तोड़ कमाई की, खासकर चीन में इसका क्रेज अलग ही स्तर पर पहुंच गया। यही फिल्म श्रीराम राघवन को नेशनल अवॉर्ड और कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स तक ले गई।

श्रीराम राघवन की खासियत यही है कि उनकी फिल्मों में हीरो से ज्यादा कहानी का दिमाग चलता है। उनके किरदार कभी पूरी तरह अच्छे नहीं होते और न ही पूरी तरह बुरे। यही ग्रे शेड्स उनके सिनेमा को अलग पहचान देते हैं। “मेरी क्रिसमस” से लेकर आने वाली फिल्म “इक्कीस” तक, वह लगातार नए एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं। खास बात ये है कि उनकी फिल्मों में विदेशी नॉवेल्स और फ्रेंच सिनेमा का असर दिखता है, लेकिन वह उसे पूरी तरह देसी अंदाज़ में पेश करते हैं। शायद यही वजह है कि आज के दौर में जब ज्यादातर फिल्में फॉर्मूला पर चलती हैं, श्रीराम राघवन का सिनेमा अब भी अनप्रेडिक्टेबल और फ्रेश लगता है।

आज श्रीराम राघवन सिर्फ एक निर्देशक नहीं, बल्कि उस सोच का नाम बन चुके हैं जिसने बॉलीवुड को सिखाया कि थ्रिलर सिर्फ एक जॉनर नहीं, बल्कि एक अनुभव हो सकता है। उनके फैंस हर नई फिल्म का इंतजार इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि स्क्रीन पर जो दिखेगा, वैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा होगा।

Pratahkal Newsroom

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