बाल कलाकार के रूप में शुरुआत कर भारतीय सिनेमा पर राज करने वाली अभिनेत्री श्रीदेवी के फिल्मी करियर, उपलब्धियों और योगदान का विवरण।

भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री श्रीदेवी एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान प्रशंसकों का अभिवादन करती हुईं।
जब भी बॉलीवुड की सबसे आइकॉनिक अभिनेत्रियों का नाम लिया जाता है, तो सबसे पहले ज़हन में जो चेहरा आता है वो है Sridevi। आज भी सोशल मीडिया पर उनके गाने, डायलॉग और फिल्मी सीन वायरल होते रहते हैं। “हवा हवाई”, “मैं तेरी दुश्मन” और “मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां” जैसे गानों ने उन्हें सिर्फ स्टार नहीं बल्कि एक इमोशन बना दिया। श्रीदेवी वो अभिनेत्री थीं जिन्होंने अपने दम पर फिल्मों को सुपरहिट बनाया और उस दौर में फीमेल सुपरस्टार कहलायीं जब इंडस्ट्री पूरी तरह हीरो-केंद्रित मानी जाती थी। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, एक्सप्रेशन और डांसिंग स्टाइल ने उन्हें बाकी सभी अभिनेत्रियों से अलग बना दिया था।
तमिलनाडु के मीनामपट्टी गांव में जन्मी श्रीदेवी का असली नाम श्री अम्मा यंगर अय्यप्पन था। महज़ चार साल की उम्र में उन्होंने तमिल फिल्म “कंधन करुणई” से कैमरे का सामना किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बचपन से ही कैमरे के सामने उनकी मासूमियत और तेज़ एक्सप्रेशन लोगों का ध्यान खींचने लगे थे। तेलुगु, तमिल, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम करते-करते वह जल्दी ही साउथ सिनेमा की सबसे बड़ी हीरोइन बन गईं। “मूंद्रम पिरई”, “सिगप्पु रोजाक्कल”, “पदहरेल्ला वयसु” और “क्षणा क्षणम” जैसी फिल्मों ने उनके अभिनय की गहराई साबित कर दी।
बॉलीवुड में उनका असली धमाका 1983 में “हिम्मतवाला” से हुआ। जितेंद्र के साथ उनकी जोड़ी इतनी सुपरहिट हुई कि हर प्रोड्यूसर उन्हें अपनी फिल्म में लेना चाहता था। “तोहफा”, “मवाली”, “जस्टिस चौधरी” और “मकसद” जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़े। लेकिन सिर्फ ग्लैमर ही नहीं, अभिनय में भी उनका कोई मुकाबला नहीं था। “सदमा” में मासूम लड़की का किरदार हो या “नगीना” में रहस्यमयी नागिन, श्रीदेवी हर रोल में पूरी तरह ढल जाती थीं। “मिस्टर इंडिया” में उनकी कॉमिक टाइमिंग ने दर्शकों को दीवाना बना दिया, जबकि “चांदनी” ने उन्हें देश की रोमांटिक क्वीन बना दिया। “चालबाज़” और “लम्हे” जैसी फिल्मों ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ स्टार नहीं बल्कि बेहद ताकतवर अभिनेत्री भी थीं।
श्रीदेवी का करियर सिर्फ हिट फिल्मों तक सीमित नहीं रहा, उन्होंने भारतीय सिनेमा में महिलाओं के किरदारों को नई पहचान दी। वह उस दौर की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्री बनीं और कई बार हीरो से भी ज्यादा चर्चा में रहीं। अमिताभ बच्चन, कमल हासन, रजनीकांत, अनिल कपूर और चिरंजीवी जैसे सुपरस्टार्स के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों की फेवरेट रही। उन्हें नेशनल अवॉर्ड, सात फिल्मफेयर अवॉर्ड और पद्मश्री जैसे बड़े सम्मान मिले। 2012 में “इंग्लिश विंग्लिश” से उन्होंने ऐसा कमबैक किया जिसने पूरी इंडस्ट्री को चौंका दिया। इस फिल्म में एक साधारण गृहिणी के किरदार में उन्होंने करोड़ों महिलाओं की भावनाओं को स्क्रीन पर उतार दिया। इसके बाद “मॉम” में उनकी दमदार परफॉर्मेंस ने फिर साबित किया कि अभिनय उनके लिए सिर्फ काम नहीं बल्कि जुनून था।
ऑफ स्क्रीन श्रीदेवी बेहद शांत और शर्मीली मानी जाती थीं, लेकिन कैमरा ऑन होते ही वह ऊर्जा का तूफान बन जाती थीं। निर्माता बोनी कपूर से उनकी शादी और बेटियां जाह्नवी कपूर व खुशी कपूर आज भी उनकी विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। 24 फरवरी 2018 को दुबई में उनकी अचानक मौत की खबर ने पूरे देश को हिला दिया था। लाखों फैंस सड़कों पर उतर आए और पूरा बॉलीवुड सदमे में डूब गया। लेकिन सितारे कभी सच में जाते नहीं, और श्रीदेवी इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। आज भी उनकी फिल्में, उनका फैशन, उनकी मुस्कान और उनकी अदाकारी नई पीढ़ी को इंस्पायर करती है।

