पहला पेचेक किसी भी व्यक्ति के लिए सिर्फ कमाई की रकम नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से अर्जित पहली आय और उससे जुड़ी यादों का खास हिस्सा होता है। सोनी सब के कलाकार मनीष वाधवा, मुकुल हरीश, इक़बाल खान, आभास मेहता और गुलकी जोशी ने अपने पहले पेचेक और उससे जुड़ी यादों को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी पहली कमाई का किस तरह इस्तेमाल किया था।

कॉलेज दोस्तों को ट्रीट देने से लेकर पहली कमाई माँ के साथ साझा करने तक, कलाकारों ने अपने पहले पेचेक से जुड़े उत्साह और खुशी को याद किया। कई कलाकारों के लिए पहली कमाई ने स्वतंत्रता का एहसास कराया और उनकी मेहनत को वास्तविक रूप दिया।

सोनी सब के ‘हस्तिनापुर के वीर’ में भीष्म पितामह की भूमिका निभा रहे मनीष वाधवा ने बताया कि उन्हें अपना पहला पेचेक 1998 में एक टीवी सीरियल में किए गए रोल के लिए मिला था। उन्होंने कहा, “मुझे मेरा पहला पेचेक 1998 में एक टीवी सीरियल में किए गए रोल के लिए मिला था। मुझे याद है कि मैंने पूरा पेचेक अपनी माँ को दे दिया था। यह बहुत साधारण पल था, लेकिन अपनी पहली कमाई उन्हें देने का एहसास बेहद अच्छा था। आज भी मेरे लिए वह याद और मेरा पहला पेचेक बहुत खास है।”

सोनी सब के ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में टाइगर का किरदार निभा रहे मुकुल हरीश ने अपने पहले पेचेक को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने साझा किया, “मेरा पहला पेचेक बहुत बड़ी रकम नहीं था, लेकिन उसे पाना मेरे लिए एक बड़ी उपलब्धि थी। मैं बॉम्बे में था और जश्न मनाने के लिए उत्साहित था, इसलिए मैंने खुद को ट्रीट देने का फैसला किया और लगभग पूरा पेचेक एक ही बार में खर्च कर दिया। उस उम्र में अपनी कमाई का जश्न मनाना अद्भुत था। पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो लगता है कि थोड़ा बचा लेना चाहिए था, लेकिन उस पहले पेचेक ने मुझे एक सबक दिया, जिसे मैं आज भी याद रखता हूँ: उपलब्धि का आनंद लो, लेकिन कल के लिए थोड़ा बचाकर रखो।”

सोनी सब के ‘यादें’ में डॉ. देव मेहता का किरदार निभा रहे इक़बाल खान ने बताया कि उनका पहला पेचेक 3,500 रुपए का था। यह रकम उन्हें कॉलेज के दिनों में एक पैंट्स ब्रांड के लिए शूट करने पर मिली थी। उन्होंने कहा, “मेरा पहला पेचेक 3,500 रुपए का था, जो मुझे कॉलेज के दिनों में एक पैंट्स ब्रांड के लिए शूट करने पर मिला था। उन्हें सिर्फ पैंट्स की तस्वीरें चाहिए थीं, मेरा चेहरा भी नहीं चाहिए था! उस समय मुझे लगा कि यह बहुत बड़ी रकम है। मैंने उससे किराया और ग्रॉसरी का खर्च निकाला और निरुलाज़ में फास्ट फूड खाया। यह बहुत साधारण शुरुआत थी, लेकिन अपनी पहली कमाई का एहसास आज भी याद है।”

सोनी सब के ‘हस्तिनापुर के वीर’ में जरासंध की भूमिका निभा रहे आभास मेहता ने भी अपनी पहली कमाई से जुड़ी याद साझा की। उन्होंने कहा, “मुझे याद है कि जब मैंने अपना पहला पेचेक लिया, तो मैं बहुत खुश था। सबसे पहले मैंने वह अपनी माँ को दिया। अपनी पहली कमाई उनके साथ साझा करना और उनकी खुशी देखना मेरे लिए बेहद खास था। यह याद मैं हमेशा संजोकर रखूँगा।”

वहीं, सोनी सब के ‘यादें’ में डॉ. सृष्टि अग्रवाल का किरदार निभा रहीं गुलकी जोशी ने बताया कि उन्हें पहला पेचेक 19 साल की उम्र में कॉलेज में पढ़ाई के दौरान मिला था। उन्होंने कहा, “मेरा पहला पेचेक मुझे तब मिला जब मैं 19 साल का था और कॉलेज में पढ़ रहा था। यह दूरदर्शन के एक शो के लिए था और मुझे लगभग 5,000 रुपए मिले थे। मैं इतना उत्साहित था कि मैंने कॉलेज में अपने सभी दोस्तों को सैंडविच खिलाने का फैसला किया। पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो वह रकम भले ही छोटी थी, लेकिन उस उम्र में खुद कमाना और दोस्तों के साथ उसे सेलिब्रेट करना बहुत खास था।”

पहली कमाई से जुड़ी इन यादों में किसी ने पूरी रकम माँ को सौंप दी, किसी ने किराया और ग्रॉसरी का खर्च निकाला, तो किसी ने दोस्तों के साथ सैंडविच और ट्रीट के जरिए अपनी खुशी साझा की। सोनी सब के कलाकारों के लिए पहला पेचेक उनकी शुरुआती मेहनत और उससे जुड़े खास पलों की ऐसी याद है, जिसे वे आज भी संजोकर रखते हैं। सोनी सब पर ‘यादें’, ‘हस्तिनापुर के वीर’ और ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ देखना न भूलें।

Pratahkal Bureau

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