फादर्स डे पर सोनी सब के कलाकारों ने अपने पिताओं के साथ जुड़ी भावुक यादें साझा कीं। जीवन के संघर्ष, सीख और प्रेरणा की अनकही कहानियाँ सामने आईं, जो रिश्तों की गहराई को उजागर करती हैं।

अंतरराष्ट्रीय फादर्स डे के अवसर पर टेलीविजन जगत के लोकप्रिय चैनल सोनी सब के कलाकारों ने अपने जीवन में पिता की भूमिका और उनसे मिली सीख को भावनात्मक रूप से साझा किया। इस विशेष अवसर पर विभिन्न धारावाहिकों से जुड़े कलाकारों ने अपने पिताओं के त्याग, मार्गदर्शन और प्रेरणा को याद करते हुए बताया कि कैसे उनके जीवन की दिशा तय करने में पिता की अहम भूमिका रही है।

सोनी सब के धारावाहिक ‘यादें’ में डॉ. देव मेहता का किरदार निभा रहे इक़बाल खान ने कहा कि दो बेटियों के पिता बनने के बाद उन्होंने अपने पिता को एक नए दृष्टिकोण से समझना शुरू किया है। उन्होंने बताया कि बचपन में माता-पिता के त्याग को पूरी तरह समझ पाना कठिन होता है, लेकिन अब वे उस जिम्मेदारी को गहराई से महसूस करते हैं। उनके अनुसार, उनके पिता ने उन्हें ईमानदारी, धैर्य और सम्मान जैसे मूल्य दिए, जो आज भी उनके जीवन और अभिनय दोनों में मार्गदर्शक हैं।

इसी धारावाहिक में डिग्गी का किरदार निभा रहे अर्जुन पुंज ने अपने बचपन की यादों को साझा करते हुए बताया कि पिता के साथ बिताए गए सरल और स्नेहपूर्ण पल उनके जीवन की सबसे मूल्यवान स्मृतियाँ हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता हमेशा धैर्यपूर्वक उनकी बात सुनते थे और उन्हें महत्व देते थे, और आज वे स्वयं भी अपने बच्चों के साथ उन्हीं मूल्यों को अपनाने का प्रयास करते हैं।

‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में शनाया की भूमिका निभा रहीं मुस्कान बामने ने बताया कि उनके पिता ने हमेशा उन्हें आत्मविश्वास दिया और यह विश्वास दिलाया कि वे कुछ भी हासिल कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि उनकी हर उपलब्धि की पहली खुशी उनके पिता के साथ साझा होती है और उनका उत्साह उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है।

इसी शो में चिराग पटेल की भूमिका निभा रहे नितिन बाबू ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि उन्होंने शब्दों से अधिक अपने कर्मों के माध्यम से जीवन के मूल्य सिखाए। उनके अनुसार, निरंतरता और जिम्मेदारी का महत्व उन्होंने अपने पिता के अनुशासन और समर्पण से सीखा है, जो उनके अभिनय करियर में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

‘हस्तिनापुर के वीर’ में भीष्म पितामह का किरदार निभा रहे मनीष वाधवा ने बताया कि पिता बनने के अनुभव ने उन्हें धैर्य और जिम्मेदारी की गहराई को समझने में मदद की है। उन्होंने कहा कि पर्दे पर और वास्तविक जीवन दोनों में उन्हें मार्गदर्शक और रक्षक की भूमिका निभाने का अवसर मिला है, जो उन्हें अपने पिता की सीख की याद दिलाता है।

इसी धारावाहिक में कुंती का किरदार निभा रहीं तोरल रसपुत्रा ने बताया कि उनके पिता हमेशा देर रात तक उनका इंतजार करते थे और बिना अधिक शब्दों के भी उनका साथ उन्हें सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान करता था। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने उन्हें सिखाया कि मेहनत शब्दों से अधिक प्रभावशाली होती है।

सोनी सब के इन कलाकारों की भावनात्मक कहानियाँ इस बात को दर्शाती हैं कि पिता केवल परिवार के स्तंभ ही नहीं, बल्कि जीवन के सच्चे मार्गदर्शक भी होते हैं, जिनका प्रभाव पीढ़ियों तक महसूस किया जाता है।

Pratahkal Bureau

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