अभिनेता सोनू सूद के इंजीनियरिंग से अभिनय तक के सफर और कोविड काल में उनके द्वारा किए गए मानवीय कार्यों का विस्तृत विवरण।

जब भी सोशल मीडिया पर किसी स्टार की असली हीरो वाली कहानी की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है सोनू सूद का। फिल्मों में खतरनाक विलेन का रोल निभाने वाले सोनू आज करोड़ों लोगों के लिए उम्मीद का दूसरा नाम बन चुके हैं। कोविड के दौर में जिस तरह उन्होंने हजारों मजदूरों, छात्रों और जरूरतमंद लोगों की मदद की, उसने उन्हें सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि जनता का हीरो बना दिया। यही वजह है कि आज भी उनका नाम ट्रेंड में रहता है और लोग उन्हें “रियल लाइफ सुपरस्टार” कहते हैं।

पंजाब के मोगा में जन्मे सोनू सूद ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई नागपुर से की थी, लेकिन किस्मत उन्हें फिल्मों की दुनिया में खींच लाई। साल 1999 में तमिल फिल्मों से अपना सफर शुरू करने वाले सोनू ने शुरुआत में काफी स्ट्रगल देखा। धीरे-धीरे उन्होंने साउथ सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बनाई और फिर हिंदी फिल्मों में एंट्री की। मणिरत्नम की फिल्म ‘युवा’ ने उन्हें नई पहचान दी, जबकि ‘आशिक बनाया आपने’, ‘अथाडु’ और ‘सुपर’ जैसी फिल्मों ने उनके करियर को नई रफ्तार दी।

सोनू सूद का असली धमाका तब हुआ जब उन्होंने फिल्मों में नेगेटिव किरदारों को अपनी खास स्टाइल से यादगार बना दिया। ‘अरुंधति’ में उनका खौफनाक पासुपति वाला किरदार आज भी साउथ सिनेमा के सबसे आइकॉनिक विलेन रोल्स में गिना जाता है। इसी फिल्म के लिए उन्हें नंदी अवॉर्ड और फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। इसके बाद सलमान खान की ‘दबंग’ में छेदी सिंह बनकर उन्होंने ऐसा तहलका मचाया कि हर तरफ सिर्फ उन्हीं की चर्चा होने लगी। ‘सिंबा’, ‘आर... राजकुमार’, ‘शूटआउट एट वडाला’, ‘हैप्पी न्यू ईयर’, ‘जोधा अकबर’ और ‘कुंग फू योगा’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई।

दिलचस्प बात ये है कि सोनू सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने तमिल, तेलुगु, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, उर्दू और यहां तक कि चाइनीज फिल्मों में भी काम किया। जैकी चैन के साथ ‘कुंग फू योगा’ में उनका इंटरनेशनल अंदाज देखने को मिला। फिल्मों के अलावा उन्होंने अपना प्रोडक्शन हाउस ‘शक्ति सागर प्रोडक्शंस’ भी शुरू किया और अब निर्देशन की दुनिया में भी कदम रख चुके हैं। उनकी आने वाली फिल्म ‘फतेह’ को लेकर भी जबरदस्त चर्चा है क्योंकि इसमें वह अभिनेता के साथ निर्देशक, लेखक और निर्माता की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।

लेकिन सोनू सूद को सबसे अलग बनाता है उनका इंसानियत वाला चेहरा। कोविड महामारी के दौरान जब लाखों लोग अपने घर पहुंचने के लिए परेशान थे, तब सोनू ने बसें, ट्रेनें और फ्लाइट्स तक का इंतजाम किया। उन्होंने छात्रों को विदेशों से वापस लाने में मदद की, बेरोजगार लोगों के लिए रोजगार प्लेटफॉर्म शुरू किया और जरूरतमंदों के इलाज के लिए ‘इलाज इंडिया’ जैसी पहल शुरू की। उनकी ‘सूद चैरिटी फाउंडेशन’ आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और करियर में लोगों की मदद कर रही है। इसी मानवीय काम के लिए संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने उन्हें ‘एसडीजी स्पेशल ह्यूमैनिटेरियन एक्शन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया।

आज सोनू सूद सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि भरोसे का दूसरा नाम बन चुके हैं। स्क्रीन पर उनका विलेन वाला अवतार जितना डरावना दिखता है, असल जिंदगी में उतना ही बड़ा दिल उन्हें लोगों का पसंदीदा बनाता है। यही वजह है कि हर पीढ़ी के दर्शकों के बीच उनकी फैन फॉलोइंग लगातार बढ़ती जा रही है और लोग आज भी यही कहते हैं — फिल्मों में विलेन, लेकिन असल जिंदगी में सबसे बड़ा हीरो।

Pratahkal Newsroom

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