कौन हैं सोनू निगम? हर पीढ़ी की प्लेलिस्ट पर राज करने वाले ‘मॉडर्न रफ़ी’ की अनसुनी कहानी
चार दशक का करियर, 30 से अधिक भाषाएं और नेशनल अवॉर्ड; जानें कैसे सोनू निगम ने खुद को हर दौर में संगीत जगत में प्रासंगिक बनाए रखा।

गायक सोनू निगम एक लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान मंच पर परफॉर्म करते हुए, जिन्होंने अपने करियर में 6000 से अधिक गाने गाए हैं।
आज के दौर में जब हर रोज नए कलाकार आते और जाते हैं, तब एक नाम ऐसा है जो दशकों से सोशल मीडिया से लेकर लाइव कॉन्सर्ट्स तक पूरी मजबूती के साथ छाया हुआ है, और वो नाम है सोनू निगम। आजकल वे अपने नए अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स और यूनिक कोलैबोरेशन की वजह से एक बार फिर हर जगह चर्चा का विषय बने हुए हैं। हर कोई बस यही जानना चाह रहा है कि आखिर इतने सालों बाद भी इस आवाज़ का जादू फीका क्यों नहीं पड़ा और क्यों आज की नई जनरेशन भी उनकी उतनी ही दीवानी है जितनी नब्बे के दशक की थी। सोनू निगम की यही खासियत उन्हें सिर्फ एक गायक नहीं बल्कि संगीत की दुनिया का एक कभी न खत्म होने वाला दौर बनाती है।
सोनू निगम का फरीदाबाद से शुरू हुआ सफर किसी फिल्मी पटकथा की तरह उतार-चढ़ाव और जुनून से भरा रहा है। उन्होंने संगीत की दुनिया में अपना पहला कदम महज चार साल की उम्र में रख दिया था, जब उन्होंने अपने पिता के साथ मंच पर मोहम्मद रफ़ी का मशहूर गाना 'क्या हुआ तेरा वादा' गाकर सबको हैरान कर दिया था। यहीं से उनकी सुरीली पहचान की नींव पड़ी और उनकी गायकी में रफ़ी साहब की झलक देखकर दुनिया उन्हें 'मॉडर्न रफ़ी' के नाम से पुकारने लगी। उन्नीस साल की उम्र में जब वे मुंबई आए, तो उनके पास सिर्फ बड़े सपने और अपनी कला पर भरोसा था, जहां कड़े संघर्ष और शास्त्रीय संगीत की तालीम ने उन्हें एक मंझा हुआ कलाकार बना दिया।
नब्बे के दशक में जब बॉलीवुड संगीत के बड़े दिग्गजों का बोलबाला था, तब सोनू निगम ने अपनी जादुई आवाज़ से अपनी एक अलग जगह बनाई। 'अच्छा सिला दिया', 'संदेसे आते हैं' और 'ये दिल दीवाना' जैसे गानों ने उन्हें युवाओं का चहेता बना दिया, लेकिन उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ उनका एल्बम 'दीवाना' साबित हुआ। इस एल्बम की सफलता ने उन्हें हर भारतीय घर का हिस्सा बना दिया। इसके बाद साल दो हजार का दौर तो उनके लिए स्वर्ण युग की तरह रहा, जहां 'सूरज हुआ मद्धम' और 'तन्हाई' जैसे गानों ने उन्हें सफलता की नई ऊंचाइयों पर बैठाया। फिल्म 'कल हो ना हो' के टाइटल ट्रैक के लिए मिला नेशनल अवार्ड उनकी गायकी की विविधता का सबसे बड़ा प्रमाण बना।
सोनू निगम की असली ताकत उनका किसी एक दायरे में न बंधना है, जो उन्हें आज भी सबसे अलग खड़ा करता है। चाहे वो शास्त्रीय संगीत की बारीकियां हों, सूफी का सुकून, गजल की गहराई या फिर रॉक और पॉप का जोश, सोनू ने हर जॉनर पर अपना जबरदस्त कंट्रोल साबित किया है। तीस से ज्यादा भाषाओं में छह हजार से ज्यादा गाने गाना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। उन्होंने खुद को सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि नॉन-फिल्म एल्बम, भक्ति संगीत और ग्लोबल लेवल पर किए गए विदेशी कलाकारों के साथ काम के जरिए अपनी पहुंच को सात समंदर पार तक पहुंचाया है।
उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने 'सा रे गा मा पा' जैसे शोज होस्ट करके टीवी की दुनिया में भी अपनी धाक जमाई और बाद में 'इंडियन आइडल' जैसे मंचों पर जज बनकर नई पीढ़ी का मार्गदर्शन किया। आज अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल जैसे दिग्गज गायक भी उन्हें अपनी प्रेरणा मानते हैं। साल दो हजार बाईस में मिला पद्म श्री सम्मान इस बात पर मुहर लगाता है कि सोनू निगम का योगदान सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे भारतीय संस्कृति के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। वे आज भी खुद को लगातार अपडेट कर रहे हैं, चाहे वो अपना म्यूजिक लेबल शुरू करना हो या नए कलाकारों के साथ प्रयोग करना, वे एक सच्चे कलाकार की तरह हमेशा आगे बढ़ रहे हैं।

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