मुंबई: हिंदी फिल्म जगत में सलमान खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'दबंग' से अपने अभिनय सफर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा जल्द ही बॉलीवुड की सबसे व्यस्त अभिनेत्रियां में शुमार हो गईं। मुख्य भूमिकाएं, विशेष प्रस्तुतियां और डांस नंबर्स करने के चलते सालों तक उनका वर्क शेड्यूल बेहद व्यस्त रहा। अब सोनाक्षी सिन्हा ने अपने करियर के पहले दशक की इस अत्यधिक मानसिक और शारीरिक थकावट यानी 'बर्नआउट' पर खुलकर बात की है। अभिनेत्री ने खुलासा किया कि उन्होंने अपने 20 के दशक का लगभग पूरा समय एक प्रोजेक्ट से दूसरे प्रोजेक्ट की ओर भागते हुए बिताया, जिसके कारण उनके पास आराम करने या व्यक्तिगत जीवन के लिए कोई समय नहीं बचा। इस निरंतर काम के बोझ के चलते सोनाक्षी सिन्हा पूरी तरह से बर्नआउट महसूस करने लगी थीं।

हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक विशेष साक्षात्कार में सोनाक्षी सिन्हा ने पूरी स्पष्टता और बेबाकी के साथ बताया कि किस तरह लगातार काम के तनाव ने उनके स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया था। सोनाक्षी ने कहा, "मैंने बहुत कम उम्र में काम करना शुरू कर दिया था। जब मैंने शुरुआत की तब मैं 22 साल की थी और 23 साल की उम्र में मेरी पहली फिल्म रिलीज हुई थी। मेरा पूरा 20 का दशक सिर्फ और सिर्फ काम की भेंट चढ़ गया। मुझे महसूस होने लगा था कि मैं बर्नआउट की शिकार हो रही हूं और अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा काम कर रही हूं। मैं लगातार बिना रुके काम में व्यस्त रहती थी। मैं अपने खुद के लिए वक्त नहीं निकाल पाती थी और दो फिल्मों के बीच कोई ब्रेक भी नहीं लेती थी। मैं सीधे एक फिल्म के सेट से निकलकर दूसरी फिल्म के सेट पर पहुंच जाती थी। एक समय तो ऐसा भी आया जब मैं लगातार डबल शिफ्ट में काम कर रही थी।"

अगर सोनाक्षी सिन्हा के फिल्मों से पैक्ड इस दशक के आंकड़ों पर नजर डालें, तो अपनी पहली डेब्यू फिल्म से लेकर कोविड-19 महामारी के आने तक सोनाक्षी ने दस साल की अवधि में रिकॉर्ड 23 फिल्मों में अभिनय किया। इसी समयावधि के दौरान उन्होंने कई फिल्मों में विशेष कैमियो भूमिकाएं भी निभाईं और कई बेहद लोकप्रिय गानों के दृश्यों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। काम की इसी निरंतरता और रफ्तार ने उन्हें बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय और पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक बना दिया। हालांकि, इस अपार व्यावसायिक सफलता के बाद अंततः उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि जीवन को पूरी तरह से संतुष्ट और खुशहाल बनाए रखने के लिए केवल पेशेवर सफलता ही काफी नहीं होती है।

सोनाक्षी सिन्हा के जीवन में यह बड़ा बदलाव तब आया जब उन्होंने अपने 30 के दशक में कदम रखा। वर्ष 2017 और 2018 के आसपास उन्होंने अपने काम की रफ्तार को धीमा करने और खुद के लिए समय निकालने का एक बड़ा फैसला किया। पुरानी यादों को साझा करते हुए सोनाक्षी ने कहा, "मेरे जीवन में एक ऐसा मोड़ आया जब मैंने खुद से कहा कि मुझे अपने लिए समय निकालना होगा। यह मुझे एक बेहतर अभिनेता बनने के साथ-साथ एक बेहतर इंसान बनने में भी मदद करेगा। यही वह समय था जब मैंने अपने जीवन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करने शुरू किए। इसके बाद काम को देखने के मेरे नजरिए और मैं जिस तरह का काम करती हूं, उस पूरी दिशा में एक बड़ा बदलाव आ गया।"

अपने इस पूरे सफर के अनुभवों और सीख पर विचार करते हुए सोनाक्षी ने बताया कि यह आत्मज्ञान उन्हें धीरे-धीरे हुआ। उन्होंने कहा, "आप वक्त के साथ सीखते हैं, यह सब आपके पास अपने आप नहीं आ जाता। उस दौर में मुझे लगता था कि काम करने का यही एकमात्र सही तरीका है। इसके अलावा, मैं हमेशा से एक बेहद सुरक्षित माहौल वाले जीवन में रही थी। मेरे लिए वह समय सिर्फ अपने काम को देखने और समझने का था। मैंने जब तक यह काम किया, तब तक इसका पूरा आनंद भी लिया। लेकिन जीवन में एक पड़ाव ऐसा जरूर आता है जब आपको यह अहसास होता है कि जिंदगी में काम के अलावा भी बहुत कुछ है।" अगर उनके आगामी पेशेवर मोर्चे की बात करें, तो सोनाक्षी सिन्हा जल्द ही अश्विनी अय्यर तिवारी के निर्देशन में बनने वाली एक कोर्टरूम ड्रामा फिल्म 'सिस्टम' में मुख्य भूमिका में नजर आने वाली हैं।


Pratahkal Newsroom

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