कौन हैं शिवकार्तिकेयन? छोटे पर्दे से निकलकर तमिल सिनेमा पर छा जाने वाले 'एसके' का असली जलवा
टीवी एंकर से तमिल फिल्म इंडस्ट्री के टॉप एक्टर बने शिवकार्तिकेयन ने फिल्म 'अमरण' की सफलता से बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास रच दिया है।

फिल्म 'अमरण' की सफलता के बाद चर्चा में आए तमिल अभिनेता शिवकार्तिकेयन, जिन्होंने मेजर मुकुंद वरदराजन की भूमिका निभाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया है।
इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर सिनेमाघरों तक हर तरफ सिर्फ एक ही नाम की गूंज सुनाई दे रही है और वो नाम है शिवकार्तिकेयन। जिन्हें फैंस प्यार से 'एसके' पुकारते हैं, उन्होंने अपनी हालिया फिल्म 'अमरण' से बॉक्स ऑफिस पर ऐसा धमाकेदार तहलका मचाया है कि हर कोई दंग रह गया है। मेजर मुकुंद वरदराजन की जांबाजी और शहादत को बड़े पर्दे पर जीवंत करने वाले इस कलाकार ने यह साबित कर दिया है कि वह सिर्फ कॉमेडी के बादशाह नहीं, बल्कि एक बेहद गंभीर और पावरहाउस परफॉर्मर भी हैं। आज उनकी गिनती तमिल सिनेमा के उन चुनिंदा सितारों में होती है जिनकी फिल्में सौ करोड़ का आंकड़ा तो जैसे खेल-खेल में पार कर लेती हैं और यही वजह है कि आज हर कोई उनकी सफलता की चर्चा कर रहा है।
लेकिन शिवकार्तिकेयन की यह शानदार कामयाबी रातों-रात नहीं मिली है बल्कि इसके पीछे सालों का कड़ा संघर्ष छिपा है। उनकी कहानी किसी प्रेरणादायक फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। साल 2006 में उन्होंने 'कलक्का पोवधु यारू' नाम के एक कॉमेडी रियलिटी शो में बतौर कंटेस्टेंट हिस्सा लिया और अपनी बेहतरीन मिमिक्री से सबको अपना दीवाना बना लिया। एक साधारण टेलीविजन एंकर और स्टैंड-अप कॉमेडियन के रूप में अपना सफर शुरू करने वाले इस सितारे ने अपनी मेहनत के दम पर साल 2012 में फिल्म 'मरीना' से बड़े पर्दे पर कदम रखा। शुरुआत में कई लोगों को लगा था कि एक टीवी होस्ट फिल्मों में नहीं चल पाएगा, लेकिन उन्होंने अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों का दिल जीतकर सबकी बोलती बंद कर दी।
साल 2013 उनके करियर के लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ जब 'एथिर नीचल' और 'वरुथपदाता वलीबर संगम' जैसी फिल्मों ने उन्हें घर-घर में एक मशहूर नाम बना दिया। उनकी सादगी और आम आदमी वाले लुक ने उन्हें 'नम्मा वीट्टू पिल्लई' यानी हमारे घर का लड़का वाली छवि दी, जिससे लोग उनसे खुद को जुड़ा हुआ महसूस करने लगे। इसके बाद उन्होंने 'काकी सट्टाई' में एक ईमानदार पुलिसवाले और 'रेमो' में एक नर्स के भेष में लवर बॉय का किरदार निभाकर अपनी वर्सटालिटी दिखाई। उनके इसी बेमिसाल काम के लिए उन्हें आठ साइमा अवॉर्ड्स, दो तमिलनाडु स्टेट फिल्म अवॉर्ड्स और प्रतिष्ठित फिल्मफेयर अवॉर्ड जैसे कई बड़े सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
शिवकार्तिकेयन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह सिर्फ अभिनय तक ही सीमित नहीं रहे बल्कि उन्होंने संगीत और निर्माण के क्षेत्र में भी अपना लोहा मनवाया है। उन्होंने अपनी बेटी के साथ 'वायादी पेता पुल्ला' जैसा बेहद प्यारा गाना गाया जिसे करोड़ों लोगों ने पसंद किया, वहीं 'अरबिक कुथु' जैसे ग्लोबल हिट गाने के बोल भी उन्हीं की कलम से निकले हैं। उन्होंने अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस भी शुरू किया और 'कणा' जैसी प्रेरणादायक फिल्म बनाई जिसने महिला क्रिकेट की कहानी को दुनिया के सामने रखा। एक एक्टर, सिंगर, लिरिसिस्ट और प्रोड्यूसर के तौर पर उनका यह बहुमुखी अंदाज ही उन्हें आज के दौर का एक कंपलीट एंटरटेनर बनाता है।
पिछले कुछ सालों में 'डॉक्टर' और 'डॉन' जैसी फिल्मों की लगातार सफलता ने उन्हें तमिल सिनेमा के टॉप लीग में मजबूती से खड़ा कर दिया है। उनकी फिल्म 'अयालान' ने अपनी विजुअल तकनीक से सबको हैरान किया, तो वहीं 'अमरण' ने साल 2024 की सबसे बड़ी हिट्स में अपनी जगह पक्की कर ली। तमिलनाडु सरकार से 'कलैममणि' पुरस्कार जीत चुके शिवकार्तिकेयन आज सफलता के उस मुकाम पर हैं जहां एआर मुरुगादॉस जैसे दिग्गज निर्देशक उनके साथ फिल्म 'मदरासी' के लिए हाथ मिला रहे हैं। एक साधारण जेल सुपरिंटेंडेंट के बेटे से लेकर साउथ फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार बनने तक का उनका यह सफर लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है कि अगर सपने देखने की हिम्मत हो, तो उन्हें सच भी किया जा सकता है।

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