आजकल सोशल मीडिया रील्स से लेकर म्यूजिक चार्ट्स तक एक ऐसी आवाज़ फिर से गूंज रही है जो कानों में पड़ते ही सुकून का एहसास कराती है। हम बात कर रहे हैं सबकी पसंद और 'गोल्डन वॉयस' के मालिक शान की, जिनके गानों का जादू नई पीढ़ी के सिर चढ़कर भी बोल रहा है। शान सिर्फ एक गायक नहीं हैं, बल्कि वे एक इमोशन हैं जिसने नब्बे और दो हजार के दशक के रोमांस को एक नई पहचान दी। आज जब शोर-शराबे वाले गानों की भीड़ बढ़ गई है, तब शान की वही सादगी भरी और स्मूद गायकी लोगों को फिर से अपनी प्लेलिस्ट में 'रिपीट मोड' ऑन करने पर मजबूर कर रही है।

30 सितंबर 1972 को मायानगरी मुंबई में जन्मे शांतनु मुखर्जी, जिन्हें दुनिया शान के नाम से जानती है, के लिए संगीत कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि उनकी विरासत थी। उनके दादा जाहर मुखर्जी एक मशहूर गीतकार थे और पिता मनस मुखर्जी संगीत निर्देशक, जिससे घर में शुरू से ही सुरों का पहरा था। हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता उनके लिए बिछाया हुआ नहीं था। शान ने अपने करियर की शुरुआत विज्ञापनों के लिए जिंगल्स गाकर की थी। छोटे-छोटे विज्ञापनों में आवाज़ देने से लेकर कवर गानों और रीमिक्स के दौर में अपनी जगह बनाने के लिए उन्होंने जमकर स्ट्रगल किया, जिसने उनकी आवाज़ को वो परिपक्वता दी जो आज उनकी पहचान है।

शान के करियर में असली टर्निंग पॉइंट तब आया जब उनका एल्बम 'तन्हा दिल' रिलीज हुआ और रातों-रात वे हर युवा की धड़कन बन गए। इस एक गाने ने उन्हें इंडी-पॉप का बेताज बादशाह बना दिया और फिर बॉलीवुड में हिट गानों की जैसे झड़ी लग गई। 'मुसु मुसु हासी' की मासूमियत हो, 'वो लड़की है कहां' की मस्ती, या फिर 'चांद सिफारिश' और 'मेरे दिल गोज मम्म' जैसी रोमांटिक धुनें, शान ने साबित कर दिया कि वे हर मूड में फिट बैठते हैं। 'बहती हवा सा था वो' जैसे गानों के जरिए उन्होंने जो गहराई दिखाई, उसने उन्हें 2000 के दशक की सबसे वर्सटाइल रोमांटिक आवाज़ बना दिया।

शान की प्रतिभा सिर्फ प्लेबैक सिंगिंग तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने छोटे पर्दे पर भी अपनी एक अलग छाप छोड़ी। 'सा रे गा मा पा' जैसे प्रतिष्ठित शो की मेजबानी करते हुए उन्होंने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया बल्कि देश के कोने-कोने से आए नए टैलेंट के लिए एक प्रेरणा भी बने। बाद में 'द वॉयस इंडिया' जैसे रियलिटी शोज में जज और मेंटर की भूमिका निभाते हुए उनकी शांत शख्सियत और कलाकारों को आगे बढ़ाने के उनके जुनून ने उन्हें जनता का सबसे पसंदीदा गुरु बना दिया। वे आज भी अपनी उसी सादगी और पॉजिटिव वाइब के लिए इंडस्ट्री में सम्मान के साथ देखे जाते हैं।

पुरस्कारों की बात करें तो शान की अलमारी फिल्मफेयर और आईफा जैसे बड़े अवॉर्ड्स से सजी हुई है, जो उन्हें 'चांद सिफारिश' और 'जब से तेरे नैना' जैसे एवरग्रीन गानों के लिए मिले हैं। लेकिन उनके लिए असली कामयाबी वो प्यार है जो आज भी उनके लाइव कॉन्सर्ट्स में उमड़ती भीड़ के रूप में दिखता है। साल 2023 में बोस्टन का उनका यादगार शो हो या शाहरुख खान की फिल्म 'डंकी' के लिए गाया उनका हालिया गाना, शान ने हर बार यह साबित किया है कि आवाज़ पुरानी नहीं होती, वह 'टाइमलेस' होती है। आज के बदलते दौर में भी शान का वही चार्म बरकरार है, जो उन्हें संगीत की दुनिया का एक कभी न खत्म होने वाला दौर बनाता है।

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Pratahkal Newsroom

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