आजकल आप चाहे इंस्टाग्राम रील्स स्क्रॉल करें या यूट्यूब के ट्रेंडिंग चार्ट्स देखें, हर जगह एक ऐसी आवाज़ सुनाई देती है जो सीधे रूह को छू लेती है। यह आवाज़ किसी और की नहीं बल्कि सिड श्रीराम की है, जिन्होंने अपने जादुई सुरों से पूरे देश के म्यूज़िक लवर्स को मदहोश कर रखा है। जैसे ही फिल्म पुष्पा का गाना ‘श्रीवल्ली’ बजना शुरू होता है, श्रोता उस सोलफुल आवाज़ में खुद को खोया हुआ महसूस करते हैं। सिड की गायकी में एक ऐसी कच्ची भावना और शुद्धता है जो बिना किसी दिखावे या ओवर-ड्रामा के सीधे दिल पर दस्तक देती है। यही वजह है कि आज साउथ फिल्म इंडस्ट्री से लेकर बॉलीवुड तक उनकी मांग सातवें आसमान पर है और उनका हर नया गाना इंटरनेट पर आते ही एक इंस्टेंट वाइब बन जाता है।

सिड की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है, इसके पीछे बरसों की मेहनत और संगीत के प्रति उनका अटूट समर्पण है। चेन्नई में जन्मे सिड बचपन में ही अपने परिवार के साथ अमेरिका शिफ्ट हो गए थे, जहाँ उनकी माँ ने उन्हें मात्र तीन साल की उम्र से ही संगीत की शिक्षा देना शुरू कर दिया था। उनकी माँ खुद एक कर्नाटक संगीत की टीचर थीं, इसलिए उनकी जड़ें शास्त्रीय संगीत में बेहद गहरी हैं। अमेरिका में रहते हुए उन्होंने पश्चिमी संगीत और आर एंड बी को भी गहराई से समझा और एक्सप्लोर किया। यही वजह है कि उनकी गायकी में कर्नाटक संगीत और मॉडर्न वेस्टर्न म्यूज़िक का एक अनोखा संगम मिलता है जो उन्हें भीड़ से बिल्कुल अलग खड़ा करता है। बर्कली कॉलेज ऑफ म्यूज़िक से म्यूज़िक प्रोडक्शन और इंजीनियरिंग की पढ़ाई ने उनके टैलेंट को ग्लोबल लेवल पर तराशने का काम किया।

भारतीय फिल्म जगत में उनका असली ब्रेकथ्रू तब आया जब उन्होंने महान संगीतकार ए. आर. रहमान के साथ ‘अदिये’ और ‘थल्ली पोगाथे’ जैसे यादगार गाने गाए। इन गानों ने उन्हें युवाओं का सबसे पसंदीदा सिंगर बना दिया और रातों-रात वे एक यूथ आइकन बनकर उभरे। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई सुपरहिट ट्रैक दिए जिनमें ‘एन्नोडु नी इरुंधाल’, ‘मरुवार्थाई’, ‘सामजवरगमना’ और ‘कन्नाना कन्ने’ जैसे नाम शामिल हैं। इन गानों की कामयाबी ने संगीत की दुनिया में उनकी प्रतिष्ठा को एक नए मुकाम पर पहुँचा दिया। लेकिन जब पुष्पा फिल्म का ‘श्रीवल्ली’ गाना रिलीज़ हुआ, तो सिड श्रीराम केवल एक गायक नहीं बल्कि एक इमोशन बन गए, जिसकी गूँज हर घर और हर सोशल मीडिया फीड में सुनाई देने लगी।

सिड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे खुद को केवल प्लेबैक सिंगिंग तक सीमित नहीं रखते, बल्कि वे एक ऐसे कलाकार हैं जो संगीत की सीमाओं को तोड़ने में विश्वास रखते हैं। उनके इंडिपेंडेंट एल्बम ‘एंट्रॉपी’ और साल 2023 के इंग्लिश एल्बम ‘सिद्धार्थ’ में कर्नाटक संगीत, आर एंड बी और इंडी रॉक का एक बेहतरीन मेल देखने को मिलता है। उनके गाने जैसे ‘डियर सहाना’, ‘फ्रेंडली फायर’ और ‘द हार्ड वे’ यह साबित करते हैं कि उनका लक्ष्य केवल भारत ही नहीं बल्कि ग्लोबल म्यूज़िक सीन पर अपनी छाप छोड़ना है। वे परंपरा और भविष्य का एक ऐसा कॉम्बो पेश करते हैं जो सुनने वालों को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है।

पुरस्कारों की बात करें तो सिड ने फिल्मफेयर साउथ से लेकर साइमा तक कई बार बेस्ट प्लेबैक सिंगर के खिताब अपने नाम किए हैं। लेकिन वे खुद मानते हैं कि उनकी असली जीत ये अवॉर्ड्स नहीं बल्कि वो गहरा जुड़ाव है जो उनके सुनने वाले महसूस करते हैं। चाहे दिल टूटने का गम हो, प्यार का इज़हार हो या खुद की तलाश, सिड की आवाज़ हर मूड के लिए एक परफेक्ट साउंडट्रैक बन जाती है। आज सिड श्रीराम केवल एक गायक नहीं बल्कि संगीत की दुनिया का एक ऐसा आंदोलन बन चुके हैं, जिनकी यात्रा क्लासिकल जड़ों से शुरू होकर ग्लोबल स्टेज तक पहुँच चुकी है और यही कारण है कि आज हर कोई उनकी कला का मुरीद है।

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Pratahkal Newsroom

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