बॉलीवुड की प्रेम कहानियां युवा पीढ़ी से क्यों बना रहीं दूरी? निर्देशक शकुन बत्रा ने बताई वजह
निर्देशक शकुन बत्रा ने बताया कि बॉलीवुड की प्रेम कहानियां युवा पीढ़ी से क्यों जुड़ नहीं पा रही हैं। Lust Stories 3 के निर्देशक ने फिल्मों में प्रेम के अवास्तविक चित्रण, लोकप्रिय चलन और कहानी कहने के तरीके पर अपनी राय रखी।

तस्वीर में निर्देशक शकुन बत्रा चश्मा पहने सीढ़ियों पर बैठे नजर आ रहे हैं।
बॉलीवुड की प्रेम कहानियां युवा पीढ़ी से वह जुड़ाव कायम नहीं कर पा रही हैं, जिसकी उम्मीद फिल्म निर्माताओं को रहती है। निर्देशक शकुन बत्रा के मुताबिक, हिंदी फिल्मों में प्रेम और रिश्तों का चित्रण वास्तविक जीवन से काफी दूर है। यही वजह है कि आज के युवा पर्दे पर दिखाई जाने वाली प्रेम कहानियों से खुद को जोड़ नहीं पा रहे हैं।
हाल के समय में Off Campus और Sterling Point जैसे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों को भारतीय युवाओं के बीच दर्शक मिले हैं, लेकिन बॉलीवुड की रोमांटिक कहानियां उसी तरह प्रभाव नहीं छोड़ पा रही हैं। शकुन बत्रा ने इस अंतर के पीछे कहानी कहने के तरीके और प्रेम को पर्दे पर दिखाने की प्रचलित धारणाओं को अहम कारण बताया।
निर्देशक ने हाल ही में Lust Stories 3 में 20 वर्ष की उम्र के दो लोगों के बीच जटिल प्रेम संबंध को पर्दे पर प्रस्तुत किया। उन्होंने इस विषय पर HT City से बातचीत में कहा, “मेरा मानना है कि आप खुद को किसी दूसरे व्यक्ति के दिमाग में रखकर यह नहीं सोच सकते कि वह किसी चीज को किस तरह देखेगा। अगर मेरे पास कहने के लिए कोई बात है, तो मैं उसे सामने रखूंगा। अगर मैंने अपना काम सही ढंग से किया है, तो हो सकता है कि आज नहीं, लेकिन एक या दो साल में लोग उसे समझें और स्वीकार करें। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था, जब मैं बड़ा हो रहा था और फिल्में देखता था।”
बत्रा ने कहा कि निर्देशक और कहानीकार के रूप में अपनी वास्तविक सोच और अनुभव को सामने रखना जरूरी है। उनके मुताबिक, दर्शकों को क्या देखना चाहिए, यह पहले से तय करके कहानी बनाने के बजाय फिल्मकारों को अपनी बात प्रामाणिक तरीके से रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “निर्देशक और कहानीकार के रूप में आप अपने सबसे प्रामाणिक रूप को सामने रखते हैं, न कि यह तय करते हैं कि उस व्यक्ति को क्या देखना चाहिए। अगर आप इस तरह काम कर रहे हैं, तो यह एक तरह का काम के बदले भुगतान वाला काम बन जाता है, जिसमें आप सोचते हैं कि मुझे इस व्यक्ति को अच्छा महसूस कराना है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस तरीके से काम नहीं कर सकते।
शकुन ने आगे कहा, “मुझे वही दिखाना है, जो मैं महसूस कर रहा हूं और जिसे व्यक्त करना चाहता हूं। मुझे उम्मीद रहती है कि मैंने अपनी बात को इतना सरल बना दिया होगा कि कोई दूसरा व्यक्ति भी उसे समझ सके।”
युवा पीढ़ी से जुड़ने में फिल्मकारों की नाकामी के सवाल पर बत्रा ने कहा कि निर्देशकों को अपनी अनुभूतियों और विचारों के आधार पर रचनात्मक काम करना चाहिए, न कि केवल उन विषयों का अनुसरण करना चाहिए जो उस समय लोकप्रिय हों।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “मैं ऐसी कई बैठकों में रहा हूं, जहां कहा जाता है कि ‘ये चल रहा है’ यानी यही चलन में है। लेकिन मुझसे वह नहीं हो पाता। इसी वजह से मेरे करियर में कई बार लंबे अंतराल आए हैं। अगर कोई चीज बार-बार बदलकर भी काम कर रही है, तो मैं ऐसा नहीं कर सकता। मैं उसे बहुत खराब तरीके से करूंगा, तो फिर खुद को उस स्थिति से क्यों गुजारूं?”
बत्रा के अनुसार, बॉलीवुड में वर्षों से प्रेम को जिस तरह प्रस्तुत किया जाता रहा है, वह भी दर्शकों और फिल्मों के बीच बढ़ती दूरी का एक कारण है। उन्होंने कहा, “आप किसी ऐसे व्यक्ति से मिलते हैं, जो आपका जीवनसाथी है, और फिर जिंदगी शानदार हो जाती है, लेकिन ऐसा कभी नहीं होता।”
निर्देशक का मानना है कि फिल्मों में अक्सर यह धारणा दिखाई जाती है कि अपने जीवनसाथी से मिलने के बाद जीवन की सभी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं और सब कुछ अच्छा हो जाता है। हालांकि, वास्तविक जीवन में रिश्ते इतने सरल नहीं होते। प्रेम का ऐसा आदर्श रूप वास्तविक अनुभवों से मेल नहीं खाता और इसी कारण खासकर युवा दर्शक इन कहानियों से जुड़ाव महसूस नहीं कर पाते।
बत्रा की टिप्पणी बॉलीवुड में प्रेम कहानियों को प्रस्तुत करने के तरीके पर सवाल उठाती है। उनके विचार में दर्शकों से जुड़ने के लिए केवल लोकप्रिय चलन के अनुरूप कहानियां बनाना पर्याप्त नहीं है। फिल्मकारों को अपने अनुभवों को प्रामाणिक ढंग से पर्दे पर प्रस्तुत करना होगा, जबकि प्रेम और रिश्तों को वास्तविकता से दूर दिखाने वाली धारणाएं युवा दर्शकों के साथ जुड़ाव की राह में बाधा बनी हुई हैं।

