बॉलीवुड अभिनेता शाहिद कपूर अपनी आगामी फिल्म 'कॉकटेल 2' की रिलीज की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन हाल ही में उन्होंने अपनी पिछली फिल्मों 'देवा' और 'ओ रोमियो' के निराशाजनक प्रदर्शन पर खुलकर बात की है। 'द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया' को दिए एक साक्षात्कार में शाहिद ने सिनेमा की अनिश्चितता को स्वीकार करते हुए बताया कि कैसे इन दो फिल्मों के अनुभवों ने उनके निर्णय लेने की प्रक्रिया को हमेशा के लिए बदल दिया है। उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग में लंबा अनुभव होने के बावजूद सफलता की गारंटी नहीं दी जा सकती, क्योंकि एक अभिनेता का काम केवल कैमरे के सामने अभिनय करना है, जबकि फिल्म का अंतिम स्वरूप निर्देशक के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।

शाहिद ने खुलासा किया कि इन फिल्मों की असफलता के बाद उन्होंने अपनी कार्यशैली में एक बड़ा बदलाव किया है। वर्षों तक वे स्क्रिप्ट की कहानी अकेले सुनना पसंद करते थे, लेकिन अब उनका मानना है कि यह दृष्टिकोण उनके फैसलों को सीमित कर सकता था। अब उन्होंने अपनी टीम को निर्देश दिया है कि वे स्क्रिप्ट सुनते समय उनके साथ मौजूद रहें। शाहिद का मानना है कि उनकी चयन प्रक्रिया अक्सर पूरी तरह से कलात्मक प्रवृत्ति से प्रेरित होती है, जो शायद दर्शकों की पसंद के साथ मेल नहीं खा पाती। इसलिए, अब वे चाहते हैं कि कहानी सुनते समय कमरे में तीन और लोग भी मौजूद हों ताकि वे फिल्म को केवल अपने नजरिए से ही न देखें। शाहिद कपूर की अगली फिल्म 'कॉकटेल 2' है, जिसका निर्देशन होमी अदजानिया ने किया है। तरुण जैन और लव रंजन द्वारा लिखित इस फिल्म में कृति सेनन और रश्मिका मंदाना भी मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह प्रेम त्रिकोण पर आधारित फिल्म 19 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

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