मराठी थिएटर से करियर शुरू करने वाले सयाजी शिंदे ने दक्षिण भारतीय सिनेमा और बॉलीवुड में विलेन के रूप में पहचान बनाने के बाद राजनीति में कदम रखा है।

आजकल हर तरफ अगर किसी दमदार विलेन, सख्त पुलिस अफसर या राजनीति से जुड़े किरदार की चर्चा होती है, तो उसमें सयाजी शिंदे का नाम जरूर आता है। मराठी थिएटर से लेकर तेलुगु, तमिल, हिंदी, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों तक अपनी धाक जमाने वाले सयाजी शिंदे एक ऐसे कलाकार हैं, जिनकी आवाज, आंखों का गुस्सा और स्क्रीन प्रेजेंस आज भी लोगों को डराने के साथ-साथ इंप्रेस कर देती है। हाल ही में राजनीति में एंट्री और लगातार अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में नजर आने की वजह से वह फिर से सुर्खियों में हैं।

महाराष्ट्र के सतारा जिले के छोटे से गांव वेले कमाठी में किसान परिवार में जन्मे सयाजी शिंदे की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। कॉलेज के दिनों में वह महाराष्ट्र सरकार के सिंचाई विभाग में सिर्फ 165 रुपये महीने की नौकरी करते थे, जहां रात में चौकीदारी करनी पड़ती थी। इसी दौरान थिएटर का चस्का लगा और उन्होंने 1978 में मराठी एकांकी नाटकों से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत कर दी। ‘जुलवा’, ‘वन रूम किचन’ और ‘आमच्या या घरात’ जैसे मराठी नाटकों ने उन्हें थिएटर की दुनिया में पहचान दिलाई और धीरे-धीरे मुंबई तक उनका नाम पहुंच गया।

सयाजी शिंदे की किस्मत तब बदली जब अभिनेता मनोज बाजपेयी ने उन्हें राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘शूल’ के लिए रिकमेंड किया। इस फिल्म में ‘बच्चू यादव’ के रोल ने उन्हें रातोंरात पहचान दिला दी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। तमिल फिल्म ‘भारती’ में महान कवि सुब्रमण्यम भारती का किरदार निभाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह सिर्फ विलेन नहीं, बल्कि हर तरह के रोल में जान डाल सकते हैं। फिर ‘सरकार राज’, ‘संजू’, ‘अंतिम’, ‘काला’ और ‘गॉडफादर’ जैसी फिल्मों में उनकी मौजूदगी ने उन्हें इंडस्ट्री का भरोसेमंद चेहरा बना दिया।

तेलुगु सिनेमा में तो सयाजी शिंदे का अलग ही जलवा रहा। ‘पोकीरी’, ‘आर्या 2’, ‘ध्रुवा’, ‘स्पाइडर’, ‘डूकुडू’ और ‘आईस्मार्ट शंकर’ जैसी फिल्मों में उनके निगेटिव और पावरफुल किरदार आज भी फैंस को याद हैं। खास बात ये है कि वह हर भाषा के हिसाब से खुद को ढाल लेते हैं। कभी खतरनाक डॉन, कभी भ्रष्ट नेता, कभी पुलिस अफसर और कभी कॉमिक अंदाज में नजर आने वाले सयाजी ने अपने करियर में सैकड़ों फिल्मों में काम किया है। यही वजह है कि साउथ से लेकर बॉलीवुड तक हर बड़े स्टार के साथ उनकी ऑनस्क्रीन टक्कर देखने को मिली।

सिर्फ फिल्मों तक ही नहीं, सयाजी शिंदे ने वेब सीरीज और प्रोडक्शन की दुनिया में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। ‘किलर सूप’ जैसी चर्चित सीरीज में उनका अंदाज लोगों को खूब पसंद आया। मराठी फिल्मों के निर्माण में भी उन्होंने योगदान दिया और नए कलाकारों को आगे बढ़ाने का काम किया। 1995 में फिल्म ‘अबोली’ के लिए उन्हें मराठी का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला, जबकि हाल ही में ‘घर बंदूक बिरयानी’ के लिए उन्हें फेवरेट विलेन का सम्मान भी मिला। यही नहीं, 2024 में अजित पवार की एनसीपी जॉइन कर उन्होंने राजनीति में भी नई शुरुआत कर दी।

आज सयाजी शिंदे सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और बहुभाषी स्टारडम की मिसाल बन चुके हैं। गांव के एक साधारण लड़के से देशभर की फिल्मों में खौफ पैदा करने वाले कलाकार बनने तक का उनका सफर युवाओं के लिए किसी इंस्पिरेशन से कम नहीं है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर आज भी उनके डायलॉग, एक्सप्रेशन और दमदार किरदार वायरल होते रहते हैं।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story