दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलज', जो पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है, एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। करीब चार साल तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के साथ चले लंबे विवाद के बाद, फिल्म को बिना सेंसरशिप के ओटीटी प्लेटफॉर्म Zee5 पर रिलीज किया गया था। हालांकि, रिलीज के महज 48 घंटों के भीतर इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहान ने पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए केंद्र सरकार पर सीधे तौर पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

हनी त्रेहान ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि Zee5 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से फिल्म को रोकने के लिए एक आधिकारिक पत्र प्राप्त हुआ था। उन्होंने बताया कि यह फिल्म मूल रूप से 'पंजाब '95' नाम से बनाई गई थी और इसे सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए नामों में से ही 'सतलज' शीर्षक दिया गया था। त्रेहान के अनुसार, सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 127 कट लगाने का सुझाव दिया था, जबकि शुरुआत में यह संख्या 21 थी। इसी गतिरोध के कारण निर्माताओं ने इसे ओटीटी पर रिलीज करने का निर्णय लिया। त्रेहान ने सवाल उठाया है कि क्या हम किसी लोकतांत्रिक देश में रह रहे हैं, जहां एक फिल्म को दिखाए जाने से रोका जा रहा है।

निर्देशक ने फिल्म के एकतरफा होने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि फिल्म में प्रॉक्सी वॉर के दौरान मारे गए सुरक्षाकर्मियों का भी उल्लेख है और यह किसी भी तरह से समाज को बांटने वाली नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में लोग शांति और भाईचारे के साथ फिल्म देख रहे हैं और इसे लेकर किसी भी प्रकार का सामाजिक असंतोष नहीं देखा गया है। त्रेहान ने जसवंत सिंह खालड़ा के 25,000 एनकाउंटर वाले दावों पर सफाई देते हुए कहा कि फिल्म में इसे 'अनुमानित आंकड़े' के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है।

हनी त्रेहान ने सरकार से अपील की है कि वे व्यापक दृष्टिकोण अपनाएं और जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित इस कहानी को दुनिया के सामने आने दें। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आज 31 साल बाद जसवंत सिंह खालड़ा का फिर से अपहरण किया जा रहा है। इस पूरे मामले ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सेंसरशिप के दायरे पर एक नई बहस छेड़ दी है। सरकारी तंत्र का तर्क है कि फिल्म का उपयोग अलगाववादी ताकतों द्वारा गलत तरीके से किया जा सकता है, जबकि निर्माताओं का पक्ष है कि यह एक ऐतिहासिक घटना का दस्तावेज है जिसे आम जन तक पहुंचना चाहिए।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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