तेलुगु सिनेमा में अगर कोई ऐसा कलाकार है जिसकी स्क्रीन पर एंट्री होते ही दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है, तो वो हैं Saptagiri। इन दिनों फिर से उनका नाम सोशल मीडिया और फिल्मी गलियारों में जमकर चर्चा में है। कभी अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग से लोगों को हंसाने वाले सप्तगिरी अब फिल्मों के साथ-साथ राजनीति में आने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। यही वजह है कि फैंस उनके अगले कदम को लेकर काफी एक्साइटेड हैं। छोटे किरदारों से शुरू हुआ उनका सफर आज तेलुगु इंडस्ट्री के सबसे भरोसेमंद कॉमेडी चेहरों में गिना जाता है।

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के इराला गांव में जन्मे वेंकट प्रभु प्रसाद का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। उनके पिता फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में गार्ड थे और परिवार बेहद साधारण था। लेकिन बचपन से ही एक्टिंग का सपना उनके दिल में था। हैदराबाद पहुंचने के बाद उन्होंने लंबा स्ट्रगल किया। शुरुआत में वे असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करते थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें कैमरे के सामने ला खड़ा किया। फिल्म ‘बोम्मारिल्लू’ में मिला छोटा सा रोल उनके करियर का पहला बड़ा मोड़ साबित हुआ। इसी दौरान उन्होंने अपना नाम बदलकर ‘सप्तगिरी’ रख लिया, जो बाद में उनकी पहचान बन गया।

धीरे-धीरे उनकी कॉमिक टाइमिंग ने लोगों का दिल जीतना शुरू किया। ‘कंदिरीगा’, ‘जुलायी’, ‘प्रेमा कथा चित्रम’, ‘मनम’, ‘पावर’, ‘सोग्गाडे चिन्नी नायना’ और ‘मजनू’ जैसी फिल्मों में उन्होंने ऐसे किरदार निभाए जिन्हें आज भी दर्शक याद करते हैं। तेलुगु इंडस्ट्री में उन्हें कई लोग “मिनी ब्रह्मानंदम” तक कहने लगे क्योंकि कम बजट फिल्मों में उनकी मौजूदगी ही मनोरंजन की गारंटी मानी जाती थी। उनकी खासियत यह रही कि वे सिर्फ डायलॉग नहीं बोलते, बल्कि अपने एक्सप्रेशन और बॉडी लैंग्वेज से पूरा सीन चुरा लेते हैं।

साल 2016 उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना। फिल्म ‘एक्सप्रेस राजा’ में उनके काम ने ऐसा धमाका किया कि उन्हें बेस्ट मेल कॉमेडियन का नंदी अवॉर्ड मिला। इसके बाद ‘सप्तगिरी एक्सप्रेस’ में उन्होंने पहली बार लीड हीरो बनकर सबको चौंका दिया। एक कॉमेडियन का हीरो बनना आसान नहीं होता, लेकिन सप्तगिरी ने यह साबित कर दिया कि टैलेंट किसी एक दायरे में कैद नहीं होता। फिर ‘सप्तगिरी एलएलबी’ में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। 2017 में उन्हें संतोषम अल्लू रामलिंगैया स्मारकम अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया, जिसने उनके करियर को और मजबूत बना दिया।

पिछले कुछ सालों में भी उनका जादू कम नहीं हुआ। ‘क्रैक’, ‘वॉल्टेयर वीरय्या’, ‘वीरा सिम्हा रेड्डी’, ‘अमिगोस’, ‘रंगाबली’ और ‘सलार: पार्ट 1 – सीजफायर’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने किरदारों से अलग रंग भरे। दिलचस्प बात यह है कि कॉमेडी के साथ-साथ उन्होंने प्रोड्यूसर के तौर पर भी कदम रखा। वहीं 2023 में जब उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी की तरफ से राजनीति में आने की इच्छा जताई, तब से लोग यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि क्या वे पर्दे के बाद राजनीति में भी वही कमाल दिखा पाएंगे।

आज सप्तगिरी सिर्फ एक कॉमेडियन नहीं बल्कि स्ट्रगल, मेहनत और लगातार खुद को साबित करने की मिसाल बन चुके हैं। गांव के साधारण लड़के से लेकर तेलुगु सिनेमा के चर्चित चेहरे बनने तक का उनका सफर लाखों लोगों को प्रेरित करता है। यही वजह है कि जब भी उनकी कोई नई फिल्म आती है या कोई नया बयान सामने आता है, सोशल मीडिया पर उनका नाम ट्रेंड करने लगता है। उनकी कॉमेडी में देसीपन भी है, मास एंटरटेनमेंट भी और वही सादगी भी जिसने उन्हें दर्शकों का फेवरेट बना दिया।

Pratahkal Newsroom

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