तमिल सिनेमा में जब भी ताबड़तोड़ कॉमिक टाइमिंग, तेज़ काउंटर और हीरो तक को ट्रोल कर देने वाले डायलॉग्स की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है Santhanam का। इन दिनों एक बार फिर वह अपनी फिल्मों और सोशल मीडिया क्लिप्स की वजह से जबरदस्त चर्चा में हैं। टीवी के छोटे पर्दे से शुरू हुआ उनका सफर आज उन्हें साउथ इंडस्ट्री के सबसे चर्चित कॉमेडी स्टार्स में शामिल कर चुका है। खास बात यह है कि उन्होंने सिर्फ कॉमेडियन बनकर नहीं, बल्कि लीड हीरो और प्रोड्यूसर के तौर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई।

चेन्नई के पास पोज़िचलूर में पले-बढ़े संथानम ने अपने करियर की शुरुआत टीवी शो “लोल्लू सभा” से की थी। इस शो में वह तमिल फिल्मों के मजेदार स्पूफ करके लोगों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर देते थे। उनकी यही कॉमिक स्टाइल इतनी वायरल हुई कि अभिनेता Silambarasan ने उन्हें अपनी फिल्म “मन्मधन” में मौका दिया। इसके बाद “साचेन” और “पोल्लाधवन” जैसी फिल्मों में उनका काम लोगों को इतना पसंद आया कि वह धीरे-धीरे हर बड़ी फिल्म का जरूरी हिस्सा बन गए। उस दौर में तो हालत यह थी कि कई अटकी हुई फिल्मों को सिर्फ संथानम की मौजूदगी की वजह से डिस्ट्रिब्यूटर मिलने लगे थे।

संथानम की सबसे बड़ी ताकत उनकी “इंसल्ट कॉमेडी” मानी जाती है। वह हीरो, विलेन या किसी भी किरदार को अपने काउंटर से मजेदार बना देते थे। उनकी कॉमेडी अलग इसलिए भी लगी क्योंकि वह पुराने स्टाइल की अलग कॉमेडी ट्रैक करने के बजाय कहानी का हिस्सा बनकर दर्शकों को हंसाते थे। निर्देशक एम. राजेश के साथ उनकी तिकड़ी ने “सिवा मनसुला शक्ति”, “बॉस एंगिरा भास्करन” और “ओरु कल ओरु कन्नडी” जैसी सुपरहिट कॉमेडी फिल्में दीं। इन फिल्मों ने उन्हें लगातार विजय अवॉर्ड दिलाए और इंडस्ट्री ने उन्हें “कॉमेडी सुपरस्टार” कहना शुरू कर दिया। “राजा रानी”, “वानक्कम चेन्नई” और “एंद्रेंद्रुम पुन्नगई” जैसी फिल्मों में भी उनकी मौजूदगी दर्शकों के लिए बड़ा आकर्षण बन गई।

साल 2012 में उन्होंने “हैंडमेड फिल्म्स” नाम से अपना प्रोडक्शन हाउस शुरू किया और “कन्ना लड्डू थिन्ना आसैया” बनाकर साबित कर दिया कि वह सिर्फ कॉमेडियन नहीं, बल्कि समझदार प्रोड्यूसर भी हैं। इसके बाद उन्होंने खुद को लीड हीरो के रूप में तैयार करना शुरू किया। “वल्लावनुक्कु पुल्लुम आयुधम”, “धिल्लुकु धुड्डु”, “ए1”, “डागाल्टी”, “पैरिस जयराज” और “डीडी रिटर्न्स” जैसी फिल्मों में उन्होंने कॉमेडी के साथ लीड रोल में भी दम दिखाया। खासकर हॉरर-कॉमेडी फिल्मों में उनका अंदाज युवाओं को काफी पसंद आया। हाल के सालों में “वडक्कुपट्टी रामासामी” और “इंगा नान थान किंगु” जैसी फिल्मों से भी वह लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।

संथानम का सफर हमेशा आसान नहीं रहा। कई बार उनके डायलॉग्स और कॉमेडी स्टाइल विवादों में भी फंसे। महिलाओं, दिव्यांग लोगों और सामाजिक मुद्दों पर की गई कुछ टिप्पणियों को लेकर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। लेकिन इन विवादों के बावजूद उनकी लोकप्रियता में ज्यादा कमी नहीं आई। लोग आज भी उनकी वन-लाइनर कॉमेडी, चेहरे के एक्सप्रेशन और बेधड़क स्क्रीन प्रेजेंस के दीवाने हैं। यही वजह है कि टीवी से फिल्मों तक का उनका सफर आज भी नए कलाकारों के लिए बड़ी प्रेरणा माना जाता है।

आज Santhanam सिर्फ एक कॉमेडियन नहीं, बल्कि तमिल पॉप-कल्चर का बड़ा चेहरा बन चुके हैं। 16 से ज्यादा बड़े अवॉर्ड जीत चुके संथानम ने यह साबित किया कि अगर टाइमिंग सही हो और स्क्रीन पर पकड़ मजबूत हो, तो साइड रोल से भी सुपरस्टार बना जा सकता है। उनकी कॉमेडी का अंदाज आज भी मीम्स, रील्स और थिएटरों में बराबर वायरल रहता है और यही वजह है कि हर नई रिलीज के साथ लोग फिर पूछने लगते हैं — आखिर संथानम इतना ट्रेंड क्यों करते हैं?

Pratahkal Newsroom

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