'सांसों की माला पे' का है हैरान करने वाला इतिहास: ऋषि कपूर की शादी से लेकर 'मिर्जापुर' तक, जानिए इस अमर गाने की अनकही कहानी!
मिर्जापुर द मूवी के मशहूर गाने सांसों की माला पे का इतिहास दशकों पुराना है, जिसका संबंध नुसरत फतेह अली खान और ऋषि कपूर की शादी से है।

ऋषि कपूर की शादी और नुसरत फतेह अली खान के संगीत प्रदर्शन के संदर्भ में पुरानी तस्वीरों का कोलाज नजर आ रहा है
'मिर्जापुर: द मूवी' के बेहद फेमस और चर्चा में चल रहे गाने 'सांसों की माला पे' की गूंज इन दिनों हर तरफ सुनाई दे रही है। इस गाने को लेकर लोगों में जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है, लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इस गाने का इतिहास कोई नया नहीं है, बल्कि दशकों पुराना है। इस अमर गाने को सबसे पहले महान कव्वाल उस्ताद नुसरत फतेह अली खान ने गाया था, तब यह एक पारंपरिक कव्वाली के रूप में मशहूर हुआ था। हालांकि, समय के साथ इस धुन और रचना को कई अलग-अलग रूपों में गढ़ा और पेश किया गया है, जिसका सफर काफी दिलचस्प रहा है।
'मिर्जापुर: द मूवी' के नौ-ट्रैक वाले एल्बम में शामिल इस गाने के नए वर्जन में उस्ताद नुसरत फतेह अली खान की रूहानी आवाज के साथ मधुर शर्मा और वैभव पानी के मॉडर्न म्यूजिक को बेहद खूबसूरती से मिक्स किया गया है। यह गाना फिल्म के मिड-क्रेडिट सीक्वेंस में तब बजता है, जब स्क्रीन पर बीना त्रिपाठी और उनके पुराने प्रेमी का जिक्र आता है। इस सीन में एक बेहद दिलचस्प और डार्क विडंबना देखने को मिलती है, क्योंकि जब बीना यह कहती हैं कि प्यार ही तो है, जिंदगी भर थोड़ी ही रहता है, तो बैकग्राउंड में एक ऐसा गाना बजता है जो हमेशा रहने वाले और अमर प्रेमी की याद में बनाया गया है। इस दशकों पुरानी कव्वाली के हिंदी सिनेमा और आधुनिक दौर तक पहुंचने की कहानी भी कम रोचक नहीं है।
इस गाने और भारत के साथ उस्ताद नुसरत फतेह अली खान के जुड़ाव की यह खास दास्तान साल 1979 से शुरू होती है। भारत की अपनी पहली यात्रा के दौरान, महान फिल्मकार राज कपूर ने नुसरत साहब को अभिनेता ऋषि कपूर की शादी में परफॉर्म करने के लिए आमंत्रित किया था। इस गाने के शुरुआती और सबसे ज्यादा चर्चित भारतीय परफॉर्मेंसेस में से एक का जिक्र उसी ऐतिहासिक शादी के मौके से जुड़ा हुआ है। इसके बाद यह गाना नुसरत साहब के कई कमर्शियल एल्बमों का भी अहम हिस्सा बना, जिसमें साल 1982 में आया उनका मशहूर 'सुप्रीम कलेक्शन, वॉल्यूम 12' भी शामिल था। इसके अलावा, साल 1983 में बर्मिंघम में हुई नुसरत साहब की एक लाइव परफॉर्मेंस की रिकॉर्डिंग भी इस गाने की लंबी लोकप्रियता और इसकी वैश्विक पहुंच से गहराई से जुड़ी हुई है। हालांकि, इस खूबसूरत रचना के असली लेखक या रचयिता को लेकर लोगों के मन में अक्सर एक भ्रम रहता है और इसकी मूल रचना को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं।
अक्सर इस रचना को महान कृष्ण भक्त कवयित्री मीराबाई से जोड़कर देखा जाता है, क्योंकि इसके शब्दों में रची-बसी भाषा और कल्पनाएं पूरी तरह से कृष्ण-भक्ति से ओत-प्रोत नजर आती हैं। हालांकि, सूफीनामा के रिकॉर्ड के अनुसार 'सांसों की माला पे सिमरूं निस-दिन पिया का नाम' के बोल मशहूर कवि तुफैल होशियारपुरी की रचना हैं, जिनका जीवनकाल 1914 से 1993 के बीच रहा था। इस रचना में श्याम, मोहन, वृंदावन और गोकुल का साफ और स्पष्ट जिक्र मिलता है, जो इसकी गहराई को और बढ़ा देता है।
हिंदी सिनेमा ने भी इस महान रचना को अपने तरीके से अपनाया और इसे अमर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। साल 1996 में रिलीज हुई फिल्म 'जीत' में इस गाने का इस्तेमाल किया गया और इसके ठीक अगले साल यानी 1997 में रिलीज हुई निर्देशक राजकुमार संतोषी की फिल्म 'कोयला' में भी इसे एक बार फिर से बेहद शानदार अंदाज में पेश किया गया। फिल्म 'कोयला' के इस वर्जन को जाने-माने संगीतकार राजेश रोशन ने कंपोज किया था और इसे अपनी जादुई आवाज से मशहूर गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने सजाया था। इस गाने को परदे पर सुपरस्टार शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया था, जो आज भी दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है। इसके बाद के सालों में भी इस धुन का जादू कम नहीं हुआ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिल्ममेकर माइकल विंटरबॉटम ने अपनी साल 2011 में आई फिल्म 'तृष्णा' में नुसरत साहब के ओरिजिनल वर्जन का बेहतरीन इस्तेमाल किया।
आज के डिजिटल दौर में स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे स्पॉटिफाई पर नुसरत साहब और राहत फतेह अली खान के वर्जन के साथ-साथ 'कोयला' फिल्म के लिए रिकॉर्ड किया गया वर्जन भी एक साथ उपलब्ध है, जिसका मतलब यह है कि आज का श्रोता एक ही म्यूजिकल आइडिया के तीन अलग-अलग और अनूठे अंदाज का भरपूर आनंद उठा सकता है। इसके अलावा, यह धुन और इसके बोल अब भक्ति संगीत की दुनिया में भी पूरी तरह से शामिल हो चुके हैं। आज के समय में म्यूजिक स्ट्रीमिंग कैटलॉग पर ऐसे कई नए भक्ति वर्जन मौजूद हैं, जिनमें इस जाने-पहचाने गाने के मूल बोलों की जगह पूरी तरह से ईश्वर और देवी-देवताओं के प्रति भक्ति-भाव वाली बातें जोड़ दी गई हैं। उदाहरण के तौर पर, ऐश्वर्या पंडित का गाया हुआ गाना 'सांसों की माला पे शिव का नाम' जी म्यूजिक डिवोशनल के माध्यम से स्पॉटिफाई पर आसानी से सुना जा सकता है, तो वहीं गायिका प्रियंका सिंह ने भी 'सांसों की माला पे सिमरू मैं शिव का नाम' शीर्षक से अपना नया भक्ति गीत रिलीज किया है, जो यह साबित करता है कि सांसों की माला पर पिरोया गया यह नाम और संगीत का यह सफर सदियों तक अलग-अलग रूपों में अपनी छाप छोड़ता रहेगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
