बॉलीवुड में अगर किसी स्टार की जिंदगी फिल्मों से भी ज्यादा ड्रामेटिक, इमोशनल और विवादों से भरी रही है, तो वो नाम है संजय दत्त। इन दिनों फिर से उनकी चर्चा हर तरफ हो रही है क्योंकि एक तरफ उनकी फिल्में लगातार बड़े पर्दे पर धमाका कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी जिंदगी की कहानी आज भी लोगों को हैरान कर देती है। कभी “मुन्ना भाई” बनकर लोगों को हंसाने वाले संजू बाबा, तो कभी “खलनायक” बनकर डर पैदा करने वाले संजय दत्त ने अपने करियर में हर रंग दिखाया है। यही वजह है कि तीन दशक बाद भी उनका स्टारडम कम नहीं हुआ।

29 जुलाई 1959 को मुंबई में जन्मे संजय दत्त फिल्मी परिवार से आते हैं। उनके पिता Sunil Dutt और मां Nargis हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े नामों में गिने जाते थे। संजय दत्त ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म “रॉकी” से की थी, लेकिन डेब्यू से ठीक पहले मां नरगिस का निधन हो गया और यही दर्द उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बन गया। इसके बाद वह नशे की लत में फंस गए और कई सालों तक उनकी जिंदगी बिखरी रही। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और खुद को फिर से खड़ा किया। यही संघर्ष उन्हें बाकी सितारों से अलग बनाता है।

90 के दशक में संजय दत्त का दौर ऐसा था जब हर दूसरा बड़ा निर्देशक उन्हें अपनी फिल्म में लेना चाहता था। “साजन”, “सड़क”, “खलनायक”, “गुमराह” और “आतिश” जैसी फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया। उनकी आवाज, स्टाइल, भारी पर्सनैलिटी और आंखों में दिखने वाला दर्द दर्शकों को अलग ही कनेक्शन देता था। वह उन एक्टर्स में शामिल रहे जिन्होंने हीरो की इमेज को पूरी तरह बदल दिया। संजय दत्त सिर्फ चॉकलेटी हीरो नहीं थे, बल्कि एक ऐसे स्टार बने जो टूटे हुए इंसान का दर्द भी स्क्रीन पर दिखा सकता था। बाद में “वास्तव” ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी और इसी फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।

अगर संजय दत्त के करियर का सबसे आइकॉनिक चैप्टर कहा जाए तो वो “मुन्ना भाई एमबीबीएस” और “लगे रहो मुन्ना भाई” है। इन फिल्मों ने उन्हें सिर्फ स्टार नहीं बल्कि जनता का फेवरेट बना दिया। “जादू की झप्पी” वाला उनका अंदाज आज भी लोगों के दिल में जिंदा है। कॉमेडी, इमोशन और मास अपील का ऐसा कॉम्बिनेशन बहुत कम एक्टर्स में देखने को मिलता है। इसके बाद उन्होंने “धमाल”, “ऑल द बेस्ट”, “अग्निपथ”, “पीके”, “केजीएफ चैप्टर 2” और “लियो” जैसी फिल्मों में दमदार रोल निभाकर साबित किया कि उम्र चाहे जो हो, स्क्रीन प्रेजेंस आज भी उन्हीं की चलती है। हाल के सालों में “धुरंधर” और “धुरंधर: द रिवेंज” जैसी फिल्मों ने उन्हें फिर से बड़े बॉक्स ऑफिस स्टार के रूप में खड़ा कर दिया।

संजय दत्त की जिंदगी का सबसे विवादित हिस्सा 1993 मुंबई ब्लास्ट केस रहा, जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। गैरकानूनी हथियार रखने के मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा और कई साल कानूनी लड़ाई में गुजरे। लेकिन इसी दौर ने उन्हें और मजबूत बना दिया। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने जिस तरह खुद को दोबारा खड़ा किया, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। उनकी जिंदगी पर बनी फिल्म “संजू” में Ranbir Kapoor ने उनका किरदार निभाया और फिल्म ने रिकॉर्डतोड़ कमाई की। यही साबित करता है कि लोग सिर्फ संजय दत्त की फिल्मों से नहीं, बल्कि उनकी असली जिंदगी से भी उतने ही प्रभावित हैं।

आज संजय दत्त सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि बॉलीवुड में सर्वाइवल, स्ट्रगल और स्टारडम का दूसरा नाम बन चुके हैं। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को हराने से लेकर जेल, विवाद और नशे की अंधेरी दुनिया से बाहर निकलने तक, उन्होंने हर मुश्किल का सामना किया। यही वजह है कि नई पीढ़ी भी उन्हें उतना ही पसंद करती है जितना 90 के दशक के दर्शक करते थे। संजू बाबा की कहानी लोगों को यह एहसास कराती है कि गिरकर फिर उठना ही असली सुपरस्टार की पहचान होती है।

Next Story