सामंथा रुथ प्रभु ने महिला केंद्रित फिल्मों और निवेश पर कही ये बात
अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु ने फिल्म उद्योग में अभिनेत्रियों के लिए पुरुष सुपरस्टार्स के समान निवेश और समर्थन की मांग की है।

तस्वीर में अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु पारंपरिक परिधान में दिखाई दे रही हैं।
भारतीय सिनेमा में अपनी प्रतिभा और अभिनय का लोहा मनवा चुकीं सामंथा रुथ प्रभु ने महिला केंद्रित फिल्मों के भविष्य और अभिनेत्रियों की स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण विमर्श शुरू किया है। अपनी हालिया फिल्म 'मां इंटी बंगारम' की शानदार सफलता के बाद, सामंथा ने 'वैरायटी इंडिया' से विशेष बातचीत में यह पुरजोर मांग की है कि भारतीय फिल्म उद्योग को अभिनेत्रियों में भी उसी तरह का निवेश करना चाहिए, जिस तरह से वर्षों से पुरुष सुपरस्टार्स को तराशने में किया गया है। सामंथा का मानना है कि पुरुष सुपरस्टार्स रातों-रात नहीं बनते, बल्कि इसके पीछे फिल्म निर्माताओं का वर्षों का अथक परिश्रम, समय और निरंतर समर्थन होता है, जो बड़े पैमाने पर अभिनेत्रियों को प्राप्त नहीं होता।
सामंथा ने कहा कि यदि निर्देशक और निर्माता एक अभिनेत्री को सुपरस्टार बनाने में उतना ही प्रयास और समय लगाएं, तो दर्शक उन्हें भी उसी तरह अपनाएंगे। 'मां इंटी बंगारम' की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि महिला प्रधान फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर सकती हैं, बावजूद इसके कि उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बी.वी. नंदिनी रेड्डी द्वारा निर्देशित इस फिल्म में सामंथा के साथ गुलशान देवैया और दिगंथ मंचले मुख्य भूमिकाओं में हैं। सामंथा रुथ प्रभु, राज निदिमोरु और हिमांक रेड्डी दुव्वुरु द्वारा निर्मित और 'त्रालाला मूविंग पिक्चर्स' के बैनर तले बनी यह फिल्म सकारात्मक समीक्षाओं के साथ व्यावसायिक रूप से बेहद सफल रही है।
आंकड़ों की बात करें तो फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर दो सप्ताह के भीतर 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया और विश्व स्तर पर 80 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर, यह अब तक की सबसे अधिक कमाई करने वाली महिला-नेतृत्व वाली तेलुगु फिल्म बन गई है। इस सफलता को देखते हुए निर्माता राज निदिमोरु ने विशाखापत्तनम में आयोजित सक्सेस मीट में आधिकारिक तौर पर इसके सीक्वल की घोषणा की है। उन्होंने पुष्टि की कि वही टीम अगले भाग के लिए वापस आएगी और दर्शकों को दोगुना उत्साह का वादा दिया है। सामंथा के करियर के लिए यह फिल्म एक मील का पत्थर है, क्योंकि वह अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रही हैं और फिल्म की शानदार पारी के बाद उनके मातृत्व अवकाश पर जाने की संभावना है। सामंथा का यह स्पष्ट संदेश भारतीय फिल्म जगत की पितृसत्तात्मक संरचना में बदलाव की एक बड़ी आवश्यकता को रेखांकित करता है।

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