सैफ अली खान ने फिल्मी करियर के संघर्ष और मां शर्मिला टैगोर की सलाह पर की बात
अभिनेता ने 'दिल चाहता है' से लेकर 'सेक्रेड गेम्स' तक के बदलाव और अपनी मां द्वारा मिले रचनात्मक 'वेक-अप कॉल' के महत्व को साझा किया।

अभिनेता सैफ अली खान (दाएं) अपनी माता और दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर (बाएं) के साथ; सैफ ने हाल ही में अपने करियर को गंभीरता से लेने के पीछे अपनी मां की प्रेरणा का जिक्र किया।
अभिनेता सैफ अली खान ने हाल ही में अपने फिल्मी सफर के संघर्षों और अपनी पहचान बनाने की लंबी प्रक्रिया पर खुलकर बात की है। सैफ का मानना है कि उन्हें एक अभिनेता के रूप में अपनी जमीन तलाशने में लंबा वक्त लगा, जिसकी शुरुआत वास्तव में साल 2001 में फरहान अख्तर की फिल्म 'दिल चाहता है' में समीर के किरदार से हुई थी। इस फिल्म ने उन्हें बॉलीवुड के एक स्टाइलिश और आधुनिक अभिनेता के रूप में स्थापित किया। हालांकि, बीते एक दशक में उनके करियर में एक बड़ा बदलाव आया, जहां उन्होंने 'लाल कप्तान' (2019), 'सेक्रेड गेम्स' और अपनी नवीनतम फिल्म 'कर्तव्य' के माध्यम से अपने भीतर के गंभीर और कठिन पहलुओं को उजागर किया है।
'स्क्रीन' को दिए एक साक्षात्कार में सैफ अली खान ने अपने करियर के मुख्य आकर्षणों पर चर्चा करते हुए कहा कि हर फिल्म मील का पत्थर नहीं होती, लेकिन कुछ काम ऐसे होते हैं जो हमेशा चमकते रहते हैं। उन्होंने 'ओमकारा' को अपनी सबसे गौरवपूर्ण उपलब्धियों में से एक बताया और 'सेक्रेड गेम्स' को उससे भी ऊपर का स्थान दिया। उनके अनुसार, इन दोनों प्रोजेक्ट्स के बीच कोई सीधा संबंध भले न हो, लेकिन करियर की ओर मुड़कर देखने पर ये कृतियां सुनहरे अक्षरों में अंकित नजर आती हैं।
सैफ के इस रचनात्मक विकास के पीछे उनकी माता और दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर का एक बड़ा हाथ रहा है। सैफ ने याद किया कि एक समय उनकी मां ने उन्हें स्पष्ट रूप से टोकते हुए कहा था कि वह एक 'दिलचस्प अभिनेता' की तरह नहीं लग रहे हैं। शर्मिला टैगोर ने उनसे अपनी पसंद में संतुलन बनाने और अधिक रचनात्मक रूप से सोचने को कहा था। सैफ बताते हैं कि वह दौर ऐसा था जब वह काम को बहुत हल्के में लेने लगे थे। एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जब उन्होंने उत्साह के साथ अपनी मां को फ्रांस में शूटिंग होने की बात बताई, तो उन्होंने इस पर कोई खुशी नहीं जताई। इसके बजाय उन्होंने सवाल किया, "तुम मुझे कब बताओगे कि तुम कोई दिलचस्प भूमिका कर रहे हो?" सैफ इसे एक सकारात्मक 'वेक-अप कॉल' मानते हैं और कहते हैं कि उनकी मां ने उनके भीतर की क्षमता को पहचानते हुए उन्हें बेहतर करने के लिए प्रेरित किया।
फिल्म निर्माण के बदलते स्वरूप पर चर्चा करते हुए सैफ ने कहा कि फिल्म जगत में हमेशा दो तरह के निर्माता रहे हैं—एक वे जो शुक्रवार के बॉक्स ऑफिस आंकड़ों पर नजर रखते हैं और दूसरे वे जो कलात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। सैफ का मानना है कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने कहानी कहने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है और इसे "महत्वपूर्ण वैकल्पिक अभिव्यक्ति" करार दिया है। उनके अनुसार, नेटफ्लिक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स ने उन कहानियों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं जिन्हें शायद सिनेमाघरों में रिलीज करने का जोखिम कोई नहीं उठाता। अंततः, सैफ अली खान का यह सफर एक व्यावसायिक चॉकलेटी हीरो से एक गंभीर और प्रयोगधर्मी वैश्विक अभिनेता बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है।

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