कन्नड़ सिनेमा की दुनिया में अगर किसी कलाकार ने अपने चेहरे के एक्सप्रेशन, अजीबोगरीब टाइमिंग और अलग अंदाज से लोगों को सालों तक हंसाया है, तो वो नाम है Sadhu Kokila। इन दिनों फिर से उनका नाम चर्चा में है क्योंकि उनकी फिल्मों के क्लिप्स सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हो रहे हैं। कभी कॉमेडियन, कभी म्यूजिक डायरेक्टर, कभी डायरेक्टर तो कभी स्क्रीन पर अतरंगी किरदार निभाने वाले साधु कोकिला आज कन्नड़ इंडस्ट्री के सबसे यूनिक एंटरटेनर माने जाते हैं। उनकी खास बात ये है कि वो सिर्फ हंसी नहीं देते, बल्कि अपने हर किरदार में अलग एनर्जी और देसी वाइब भी छोड़ जाते हैं।

24 मार्च 1966 को बेंगलुरु में जन्मे साधु कोकिला का असली नाम सहाया शीलन शाद्रच है। उनका परिवार पूरी तरह संगीत से जुड़ा हुआ था। पिता कर्नाटक पुलिस बैंड में वायलिन बजाते थे, जबकि मां और बहन प्लेबैक सिंगर थीं। शायद यही वजह रही कि बचपन से ही संगीत उनकी नसों में बस गया। स्कूल के दिनों के बाद उन्होंने म्यूजिक की दुनिया में कदम रखा और मशहूर संगीतकार कस्तूरी शंकर के साथ काम करना शुरू किया। बाद में निर्देशक Upendra ने अपनी फिल्म “श्श्श!” के दौरान उन्हें “साधु कोकिला” नाम दिया और यही नाम आगे चलकर उनकी पहचान बन गया।

साधु कोकिला ने शुरुआत म्यूजिक कंपोजर के तौर पर की थी, लेकिन किस्मत उन्हें कैमरे के सामने ले आई। “ओम”, “एके 47”, “पोरकी”, “गूगली”, “मिस्टर एंड मिसेज रामाचारी”, “यजमाना” और “राजाकुमारा” जैसी फिल्मों में उनकी कॉमिक टाइमिंग ने थिएटर में सीटियां बजवा दीं। उनका चेहरा स्क्रीन पर आते ही लोग हंसने के लिए तैयार हो जाते थे। यही वजह है कि उन्हें कई बार साउथ इंडियन इंटरनेशनल मूवी अवॉर्ड्स यानी साउथ इंडियन इंटरनेशनल मूवी अवॉर्ड्स में बेस्ट कॉमेडियन के लिए नॉमिनेशन और अवॉर्ड मिले। “यारे कूगाडली” और “यजमाना” जैसी फिल्मों ने उन्हें कॉमेडी का सुपरस्टार बना दिया।

एक्टर बनने के बावजूद उन्होंने संगीत को कभी नहीं छोड़ा। “रक्षसा” और “इन्थी निन्ना प्रीथिया” जैसी फिल्मों के लिए उन्हें कर्नाटक स्टेट फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का सम्मान मिला। इतना ही नहीं, उन्होंने “एडेगारिके” फिल्म के गाने में अपनी आवाज भी दी और प्लेबैक सिंगर के तौर पर भी तारीफें बटोरीं। उनकी धुनों में लोकल फ्लेवर और इमोशनल टच होता है, जो सीधे दर्शकों के दिल तक पहुंचता है। साधु कोकिला उन कम कलाकारों में हैं जिन्होंने एक्टिंग, म्यूजिक, डायरेक्शन और राइटिंग हर फील्ड में खुद को साबित किया।

डायरेक्टर के तौर पर भी साधु कोकिला का सफर शानदार रहा। “रक्त कन्नीरु”, “रक्षसा”, “सुन्तरागाली” और “अनाथारु” जैसी फिल्मों को उन्होंने डायरेक्ट किया और दर्शकों को दिखाया कि वो सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं हैं। खास बात ये है कि उनके काम में हमेशा मास ऑडियंस वाला कनेक्शन दिखाई देता है। चाहे गांव का किरदार हो या शहर का अजीब कॉमिक रोल, साधु कोकिला हर फ्रेम में अपनी अलग पहचान छोड़ जाते हैं। आज भी कन्नड़ सिनेमा में उनका नाम आते ही लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है और यही उनकी सबसे बड़ी स्टार पावर है।

अब सोशल मीडिया के दौर में नई पीढ़ी भी साधु कोकिला के पुराने कॉमिक सीन और डायलॉग्स को रीमिक्स वीडियो और मीम्स के जरिए खूब शेयर कर रही है। यही वजह है कि सालों बाद भी उनकी लोकप्रियता कम नहीं हुई। उन्होंने अपने स्ट्रगल, टैलेंट और मेहनत से साबित कर दिया कि असली एंटरटेनर वही होता है जो हर दौर में लोगों को हंसाना जानता हो। साधु कोकिला सिर्फ एक कॉमेडियन नहीं, बल्कि कन्नड़ सिनेमा की ऐसी पहचान हैं जिन्होंने अपने हुनर से पूरी इंडस्ट्री में अलग जगह बनाई है।

Pratahkal Newsroom

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