कौन हैं साधना सरगम? 35 भाषाओं में गूंजती वो आवाज़ जिसने नब्बे के दशक को अमर बना दिया
रत्नागिरी से बॉलीवुड तक साधना सरगम का सफर उनकी शास्त्रीय गायकी, 35 भाषाओं में गीत और संगीत जगत में उनके दशकों लंबे योगदान को दर्शाता है।

पार्श्व गायिका साधना सरगम एक लाइव संगीत कार्यक्रम के दौरान मंच पर प्रस्तुति देते हुए अपनी संगीत यात्रा के दशकों पूरे होने का जश्न मना रही हैं।
आज के दौर में जब सोशल मीडिया रील्स और म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर पुराने गानों का रीमिक्स और री-विजिट एक बड़ा ट्रेंड बन चुका है, तब एक ऐसी सुरीली आवाज़ फिर से चर्चा के केंद्र में है जिसने नब्बे के दशक को अपनी रूहानी धुन से सजाया था। हम बात कर रहे हैं साधना सरगम की, जिनकी आवाज़ में वो जादुई कशिश है जो पहला नशा जैसे रोमांटिक गानों से लेकर सात समुंदर पार जैसे थिरकाने वाले ट्रैक तक हर पीढ़ी को एक धागे में पिरो देती है। दशकों बाद भी उनकी आवाज़ की ताज़गी ऐसी है कि आज की नई जनरेशन भी उनकी म्यूजिकल जर्नी और उनकी गायकी के पीछे के संघर्ष को जानने के लिए बेताब है, यही वजह है कि आज हर संगीत प्रेमी की ज़ुबान पर बस एक ही सवाल है कि आखिर कौन है संगीत की ये मेलोडी क्वीन जिसने अपनी सादगी से करोड़ों दिल जीते।
साधना का संगीत से यह गहरा रिश्ता कोई इत्तेफाक नहीं था, बल्कि यह उनके खून में बसा था। महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के एक छोटे से कस्बे दाभोल में जन्मी साधना की मां नीला घाणेकर खुद एक मंझी हुई शास्त्रीय संगीतकार थीं, जिन्होंने बहुत छोटी उम्र में ही अपनी बेटी के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचान लिया था। महज चार साल की उम्र में स्टेज पर परफॉर्म करना और फिर संगीत मार्तंड पंडित जसराज जैसे महान उस्ताद से तालीम लेना साधना की संगीत यात्रा को असाधारण बनाता है। दूरदर्शन के उस मशहूर एनिमेटेड वीडियो एक अनेक और एकता के बैकग्राउंड स्कोर से लेकर फिल्मों में कोरस गाने तक, उन्होंने बचपन से ही फिल्म इंडस्ट्री की बारीकियों को समझना और उनमें ढलना शुरू कर दिया था।
साधना ने अस्सी के दशक में प्लेबैक सिंगिंग की दुनिया में अपना पहला कदम रखा था, लेकिन उन्हें असली शोहरत और पहचान नब्बे के दशक की शुरुआत में मिली। फिल्म जुर्म का कालजयी गाना जब कोई बात बिगड़ जाए और जांबाज फिल्म का हर किसी को नहीं मिलता जैसे गीतों ने उन्हें रातों-रात हर घर की पसंद बना दिया। इसके बाद तो जैसे चार्टबस्टर गानों की एक लंबी झड़ी लग गई। विश्वात्मा फिल्म का धमाकेदार गाना सात समुंदर पार हो या जो जीता वही सिकंदर का सदाबहार पहला नशा, साधना सरगम ने अपनी गायकी से एक ऐसा मुकाम हासिल किया जहां अलका याग्निक और कविता कृष्णमूर्ति जैसी दिग्गज गायिकाओं के बीच उन्होंने अपनी एक अलग, कोमल और बेहद मजबूत पहचान स्थापित की।
साधना सरगम की सबसे बड़ी खासियत उनकी वर्सेटिलिटी रही है, जिसने उन्हें सिर्फ बॉलीवुड की सीमाओं तक सीमित नहीं रहने दिया। हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और बंगाली समेत पैंतीस से ज्यादा भाषाओं में गाना उनकी असाधारण प्रतिभा का जीता-जागता प्रमाण है। संगीत के जादूगर ए आर रहमान के साथ फिल्म वॉटर के रूहानी गाने हों या दक्षिण भारतीय फिल्मों के लेजेंड इलैयाराजा के मुश्किल कंपोजिशन, साधना की आवाज़ हर भाषा और हर धुन में पूरी तरह घुलमिल गई। उनके साउथ इंडियन हिट्स जैसे स्नेहिताने और अक्कम पक्कम ने उन्हें पूरे भारत का एक बड़ा स्टार बना दिया और दुनिया को यह साबित कर दिया कि संगीत की अपनी कोई भाषा नहीं होती।
अगर उपलब्धियों की बात करें तो साधना के खाते में नेशनल फिल्म अवॉर्ड और फिल्मफेयर साउथ जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मान शामिल हैं। हालांकि यह बात आज भी कई लोगों को हैरान कर देती है कि इतनी बड़ी विरासत और सैकड़ों सुपरहिट गाने होने के बावजूद उन्हें हिंदी गानों के लिए कभी फिल्मफेयर अवॉर्ड नहीं मिला, लेकिन उनके चाहने वालों के लिए उनकी मखमली आवाज़ ही सबसे बड़ा पुरस्कार है। केवल फिल्मी गाने ही नहीं, बल्कि भक्ति संगीत और भजनों में भी उनका योगदान अतुलनीय है। साई राम साई श्याम जैसे उनके भक्ति गीत आज भी करोड़ों लोगों की सुबह का हिस्सा हैं और मंदिरों से लेकर घरों तक उनकी गूंज सुनाई देती है।
आज के इस फास्ट-पेस्ड डिजिटल युग में जहां हर रोज नए कलाकार आते और जाते हैं, साधना सरगम की प्रासंगिकता और उनकी डिमांड रत्ती भर भी कम नहीं हुई है। नए दौर के कोलैबोरेशन, शानदार लाइव परफॉरमेंस और अपने एवरग्रीन गानों के जरिए वह आज भी दुनिया भर में फैले अपने प्रशंसकों से मजबूती से जुड़ी हुई हैं। उनकी आवाज़ सिर्फ सुरों का कोई संगम नहीं है, बल्कि वह मानवीय भावनाओं को गहराई से महसूस कराने का एक जरिया है। दशकों का लंबा सफर तय करने के बाद भी जब लोग पूछते हैं कि साधना सरगम की लोकप्रियता का राज क्या है, तो जवाब उनके उन गानों में मिलता है जो आज भी सुनने वाले को उसी सुकून और एहसास से भर देते हैं।

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