कौन हैं सदाशिव अमरापुरकर? वो विलेन जिसने डर को भी बना दिया सुपरहिट स्टाइल
फिल्म 'अर्ध सत्य' से करियर शुरू करने वाले सदाशिव अमरापुरकर ने 'सड़क' और 'आंखें' जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे।

मराठी थिएटर और हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता सदाशिव अमरापुरकर, जिन्होंने अपने तीन दशक लंबे करियर में विलेन और कॉमेडी दोनों किरदारों से पहचान बनाई।
एक दौर था जब पर्दे पर सिर्फ सदाशिव अमरापुरकर की एंट्री ही दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देती थी। आज भी सोशल मीडिया पर उनके डायलॉग, उनकी आंखों का खौफ और उनका अलग अंदाज़ वायरल होता रहता है। हिंदी और मराठी सिनेमा में करीब तीन दशकों तक राज करने वाले सदाशिव अमरापुरकर सिर्फ एक विलेन नहीं थे, बल्कि वो अभिनय की ऐसी यूनिवर्सिटी थे जिनकी हर भूमिका अपने आप में एक मास्टरक्लास बन जाती थी। “सड़क” का खौफनाक महारानी हो या “आंखें” का मजेदार इंस्पेक्टर प्यारे मोहन, उन्होंने हर किरदार को ऐसा जिया कि लोग आज भी उन्हें भूल नहीं पाए हैं।
महाराष्ट्र के अहमदनगर में 11 मई 1950 को जन्मे सदाशिव अमरापुरकर का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। पढ़ाई के दौरान ही थिएटर से उनका रिश्ता जुड़ गया और फिर उन्होंने मराठी रंगमंच पर ऐसा कमाल दिखाया कि बड़े-बड़े निर्देशक उनकी तरफ खिंचे चले आए। “हैंड्स अप” नाटक में उनकी दमदार एक्टिंग ने निर्देशक गोविंद निहलानी को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने उन्हें “अर्ध सत्य” में मौका दिया। यही फिल्म उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बनी। इस फिल्म में उनके निभाए रामा शेट्टी के किरदार ने साबित कर दिया कि हिंदी सिनेमा को एक नया और बेहद खतरनाक विलेन मिल चुका है। इसी फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला और फिर पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ी।
इसके बाद “हुकूमत”, “आखिरी रास्ता”, “ईश्वर”, “फरिश्ते”, “मोहरा”, “इश्क”, “कुली नंबर 1”, “गुप्त” और “हम साथ साथ हैं” जैसी फिल्मों में उन्होंने हर बार अपने अभिनय से दर्शकों को चौंकाया। लेकिन असली धमाका हुआ “सड़क” से, जहां उन्होंने महारानी का किरदार निभाकर हिंदी सिनेमा के इतिहास में खुद को अमर कर दिया। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक अभिनेता इतनी निर्भीकता और ताकत के साथ ऐसा किरदार निभा सकता है। इस रोल के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट विलेन अवॉर्ड मिला और ये वही साल था जब यह कैटेगरी पहली बार शुरू हुई थी। उनकी डायलॉग डिलीवरी, चेहरे के एक्सप्रेशन और आवाज का अलग अंदाज़ उन्हें बाकी विलेन्स से बिल्कुल अलग बनाता था।
दिलचस्प बात ये है कि सदाशिव अमरापुरकर सिर्फ डर पैदा करने वाले कलाकार नहीं थे। उन्होंने कॉमेडी में भी ऐसा कमाल किया कि दर्शक हंसते-हंसते लोटपोट हो जाते थे। “आंखें” में इंस्पेक्टर प्यारे मोहन का उनका किरदार आज भी लोगों का फेवरेट है। मराठी फिल्मों में भी उन्होंने “वास्तुपुरुष”, “डोगी”, “सावरखेड एक गाव” और “कदाचित” जैसी फिल्मों में गंभीर और दमदार अभिनय से अपनी अलग पहचान बनाई। अभिनय के साथ-साथ वो लेखक भी थे और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर लिखते थे। उनकी किताब “अभिनयाचे सहा पाठ” आज भी एक्टिंग सीखने वालों के लिए खास मानी जाती है।
फिल्मों के बाहर भी सदाशिव अमरापुरकर की जिंदगी बेहद प्रेरणादायक थी। वो समाजसेवा से गहराई से जुड़े हुए थे और अंधविश्वास के खिलाफ अभियान से लेकर एचआईवी पीड़ित महिलाओं और बच्चों की मदद तक, कई सामाजिक कामों में सक्रिय रहे। अन्ना हजारे आंदोलन में उनका समर्थन हो या पानी बचाने को लेकर उनकी जागरूकता, उन्होंने हमेशा एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाई। यही वजह है कि लोग उन्हें सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान के रूप में भी याद करते हैं।
2014 में फेफड़ों की बीमारी के चलते उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी बनाई हुई विरासत आज भी जिंदा है। नए दौर के कलाकार उनके अभिनय को देखकर सीखते हैं और दर्शक आज भी उनके किरदारों के वीडियो शेयर करते नहीं थकते। सदाशिव अमरापुरकर वो नाम हैं जिन्होंने साबित किया कि असली कलाकार वही होता है जो हीरो बनकर नहीं, बल्कि अपने अभिनय से पूरी फिल्म पर राज करके दिखाए।

Pratahkal Newsroom
प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
