ऋषि कपूर की छठी पुण्यतिथि: राज कपूर की विरासत से निकलकर कैसे खुद 'किंग ऑफ रोमांस' बने ऋषि कपूर?
हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर की छठी पुण्यतिथि पर उनके जीवन, फिल्मी सफर और विरासत का भावनात्मक स्मरण। कपूर परिवार से संबंध रखने वाले ऋषि कपूर ने पांच दशकों तक बॉलीवुड में यादगार भूमिकाएँ निभाईं और भारतीय सिनेमा को नई पहचान दी।

मुस्कुराते हुए अभिनेता ऋषि कपूर
भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो केवल कलाकार नहीं बल्कि एक पूरे युग की पहचान बन जाते हैं। उन्हीं में से एक नाम है ऋषि कपूर, जिन्होंने अपने करियर और व्यक्तित्व से हिंदी फिल्म उद्योग पर गहरी छाप छोड़ी। 4 सितंबर 1952 को मुंबई के प्रतिष्ठित कपूर परिवार में जन्मे ऋषि कपूर ने बचपन से ही सिनेमा की दुनिया को बेहद करीब से देखा और बहुत कम उम्र में ही अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया।
ऋषि कपूर ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत अपने पिता और महान अभिनेता-निर्देशक राज कपूर की फिल्म “मेरा नाम जोकर” से एक किशोर कलाकार के रूप में की, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। इसके बाद वर्ष 1973 में फिल्म “बॉबी” ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। इस फिल्म में उनके साथ डिंपल कपाड़िया की जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया और यहीं से उन्होंने रोमांटिक हीरो के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।
फिल्म 'झूठा कहीं का' (1979)
कपूर परिवार से आने वाले ऋषि कपूर भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली फिल्मी परिवार का हिस्सा थे। उनके दादा पृथ्वीराज कपूर, पिता राज कपूर, चाचा शम्मी कपूर और शशि कपूर जैसे दिग्गजों ने पहले ही भारतीय फिल्म उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया था। इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए ऋषि कपूर ने भी अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।
1970 और 1980 के दशक में उन्होंने “कभी-कभी”, “रफू चक्कर”, “खेल खेल में”, “अमर अकबर एंथनी”, “हम किसी से कम नहीं” और “चांदनी” जैसी कई सफल फिल्मों में काम किया। उनकी मासूम मुस्कान, सरल अभिनय और रोमांटिक छवि के कारण उन्हें “चॉकलेट बॉय” और “किंग ऑफ रोमांस” जैसे उपनाम मिले। अभिनेत्री नीतू सिंह के साथ उनकी जोड़ी उस दौर की सबसे लोकप्रिय ऑन-स्क्रीन जोड़ियों में से एक बन गई, जो बाद में जीवनसाथी के रूप में भी जुड़ी।
ऋषि कपूर ने 1980 में नीतू सिंह से विवाह किया और उनके दो बच्चे हुएअभिनेता रणबीर कपूर और रिद्धिमा कपूर। समय के साथ उन्होंने खुद को केवल रोमांटिक भूमिकाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि चरित्र अभिनय की ओर भी रुख किया। 2000 के दशक के बाद उन्होंने “ह्यूम तुम”, “फना”, “लव आज कल”, “अग्निपथ”, “स्टूडेंट ऑफ द ईयर”, “कपूर एंड संस” और “102 नॉट आउट” जैसी फिल्मों में विविध भूमिकाएं निभाईं, जिनमें उनके अभिनय को आलोचकों और दर्शकों दोनों से सराहना मिली।
2018 में उन्हें ल्यूकेमिया का निदान हुआ और वे इलाज के लिए न्यूयॉर्क गए। एक वर्ष के उपचार के बाद वे भारत लौट आए, लेकिन 29 अप्रैल 2020 को सांस लेने में तकलीफ के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। 30 अप्रैल 2020 को उन्होंने अंतिम सांस ली, जिससे पूरे देश की फिल्मी दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार मुंबई के चंदनवाड़ी श्मशान घाट पर किया गया और उनकी अस्थियां बाणगंगा में विसर्जित की गईं।
उनके निधन के बाद उनकी अंतिम फिल्म “शर्माजी नमकीन” पूरी की गई और बाद में रिलीज़ हुई। ऋषि कपूर ने अपने जीवन में न केवल एक अभिनेता के रूप में बल्कि एक सशक्त व्यक्तित्व के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2026 में उनकी छठी पुण्यतिथि के अवसर पर उनका योगदान और उनकी फिल्में आज भी भारतीय सिनेमा में उनकी अमिट छवि को जीवित रखे हुए हैं।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
