ऋषभ शेट्टी ने अमित शाह से की मुलाकात, सिनेमा और संस्कृति पर हुई चर्चा
नेशनल अवॉर्ड विजेता फिल्ममेकर ऋषभ शेट्टी ने गृह मंत्री अमित शाह से भारतीय विरासत और फिल्ममेकिंग के तकनीकी भविष्य पर गहन विचार-विमर्श किया।

नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (बाएं) और नेशनल अवॉर्ड विजेता अभिनेता-फिल्ममेकर ऋषभ शेट्टी (दाएं) 'कांतारा' की सफलता और सिनेमाई भविष्य पर चर्चा करते हुए।
भारतीय फिल्म जगत और देश की प्रशासनिक व्यवस्था के संगम की एक महत्वपूर्ण कड़ी में, नेशनल अवॉर्ड विजेता फिल्ममेकर और अभिनेता ऋषभ शेट्टी ने माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार मुलाकात की। यह बैठक क्षेत्रीय कहानियों के सांस्कृतिक प्रभाव और भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के भविष्य की रूपरेखा तय करने के लिहाज से अत्यंत अहम मानी जा रही है। 'कांतारा' फ्रेंचाइजी की वैश्विक सफलता के बाद हुई इस मुलाकात में गृह मंत्री ने शेट्टी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी फिल्में भारतीय विरासत को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रस्तुत करने का सशक्त माध्यम हैं।
कांतारा फिल्म ने अपनी वास्तविक लोक परंपराओं और लोककथाओं के चित्रण से न केवल दर्शकों के दिलों में जगह बनाई, बल्कि भारतीय सिनेमा के प्रति नजरिया भी बदला। इस विशेष भेंट के दौरान गृह मंत्री ने विशेष रूप से 'कांतारा' और आगामी फिल्म 'कांतारा: चैप्टर 1' की प्रशंसा की। ऋषभ शेट्टी ने इस अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इसे अपने जीवन के सबसे यादगार पलों में से एक बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि गृह मंत्री के साथ इतिहास, संस्कृति, कला और फिल्म निर्माण की बारीकियों पर शानदार चर्चा हुई। शेट्टी ने विशेष रूप से अमित शाह की हमारे इतिहास और कला को लेकर गहरी समझ की प्रशंसा की, जिससे आगामी प्रोजेक्ट्स के लिए नए दृष्टिकोण प्राप्त हुए।
चर्चा का मुख्य केंद्र सिनेमा के जरिए भारतीय जड़ों को संरक्षित रखना और इतिहास को बचाए रखने की आवश्यकता रहा। इस दौरान भारत में फिल्ममेकिंग के तकनीकी विकास को लेकर भी दोनों के बीच सहमति बनी। वर्तमान में 'कांतारा: चैप्टर 1' पर काम कर रहे ऋषभ शेट्टी और गृह मंत्री के बीच हुई यह बातचीत यह स्पष्ट करती है कि जड़ों से जुड़ी कहानियों को अब देश के शीर्ष नेतृत्व का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। मुख्य रूप से कन्नड़ सिनेमा में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले और नेशनल फिल्म अवॉर्ड से सम्मानित ऋषभ शेट्टी की यह मुलाकात इस तथ्य का प्रमाण है कि क्षेत्रीय कहानियाँ राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर पुनर्परिभाषित करने की अपार क्षमता रखती हैं।

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