आज के दौर में जब पुराने गाने फिर से ट्रेंड कर रहे हैं, हर प्लेलिस्ट में एक नाम बार-बार सुनाई देता है—राहुल देव बर्मन, जिन्हें दुनिया प्यार से ‘पंचम दा’ कहती है। उनकी धुनों में ऐसा जादू है कि दशकों बाद भी लोग “चुरा लिया है”, “दम मारो दम” या “महबूबा महबूबा” पर झूम उठते हैं। यही वजह है कि नई पीढ़ी भी उनके संगीत को रीमिक्स और रीइमैजिन कर रही है, और सोशल मीडिया पर उनका नाम फिर से चर्चा में है।

कोलकाता में जन्मे राहुल देव बर्मन संगीत के माहौल में ही बड़े हुए। उनके पिता सचिन देव बर्मन खुद एक महान संगीतकार थे, और मां मीरा देव बर्मन गीतकार थीं। बचपन में ही उनकी प्रतिभा झलकने लगी थी, जब उन्होंने किशोर उम्र में ऐसी धुनें बनाईं जिन्हें बाद में फिल्मों में इस्तेमाल किया गया। ‘पंचम’ नाम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है—कहा जाता है कि उनके रोने की आवाज संगीत के ‘पा’ सुर जैसी थी, और यही नाम उनकी पहचान बन गया।

मुंबई आकर उन्होंने अपने पिता के साथ काम करते हुए संगीत की बारीकियां सीखी। उस्ताद अली अकबर खान और समता प्रसाद जैसे दिग्गजों से ट्रेनिंग लेकर उन्होंने खुद को एक अलग मुकाम पर पहुंचाया। बतौर स्वतंत्र संगीत निर्देशक उनकी शुरुआत भले ही धीमी रही, लेकिन “तीसरी मंजिल” ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। इसके बाद “पड़ोसन”, “कटी पतंग”, “यादों की बारात”, “अमर प्रेम” और “शोले” जैसी फिल्मों में दिए गए उनके गाने सुपरहिट ही नहीं, बल्कि एवरग्रीन बन गए।

पंचम दा की खासियत सिर्फ हिट गाने देना नहीं थी, बल्कि संगीत में प्रयोग करना भी था। उन्होंने रॉक, डिस्को, जैज़ और बंगाली फोक को इस तरह मिलाया कि एक बिल्कुल नया साउंड तैयार हुआ। कभी बोतलों से आवाज निकाली, तो कभी कंघी और कागज से बीट बनाई—उनकी क्रिएटिविटी ने हिंदी फिल्म संगीत को एक नई दिशा दी। किशोर कुमार, लता मंगेशकर, आशा भोसले और मोहम्मद रफी जैसे दिग्गजों के साथ उनकी जुगलबंदी ने कई यादगार गाने दिए।

हालांकि उनके करियर में उतार-चढ़ाव भी आए, खासकर 70 के दशक के अंत और 80 के दशक में, लेकिन उन्होंने “हम किसी से कम नहीं”, “मासूम” और “1942: ए लव स्टोरी” जैसी फिल्मों से जोरदार वापसी की। खास बात ये है कि “1942: ए लव स्टोरी” का संगीत उनकी मृत्यु के बाद रिलीज हुआ और इसके लिए उन्हें मरणोपरांत फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। उनके जाने के बाद भी उनका संगीत कभी पुराना नहीं हुआ।

आज भी पंचम दा का प्रभाव नए म्यूजिक डायरेक्टर्स और सिंगर्स पर साफ दिखता है। उनके गानों के रीमिक्स, ट्रिब्यूट एल्बम और डॉक्यूमेंट्रीज़ यह साबित करती हैं कि उनका संगीत सिर्फ एक दौर तक सीमित नहीं, बल्कि हर पीढ़ी के दिल में बसता है। यही वजह है कि राहुल देव बर्मन सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की एक अमर विरासत हैं।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story